भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से लंबित मामलों की सुनवाई तेज करने के लिए चार विशेष पीठों (बेंच) का गठन किया है। ये विशेष बेंच केवल सुप्रीम कोर्ट के सबसे पुराने सिविल और आपराधिक मामलों की सुनवाई करेंगी। इस पहल का उद्देश्य वर्षों से लंबित मामलों को जल्द निपटाना और लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत करना है।
CJI सूर्यकांत ने पुराने मामलों के निपटारे के लिए बनाई विशेष बेंच
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका की जिम्मेदारी केवल मामलों का फैसला करना नहीं है, बल्कि समय पर न्याय देना भी है ताकि लोगों का कानून और न्याय प्रणाली पर विश्वास बना रहे। उनके अनुसार, हर पुराना मामला किसी ऐसे व्यक्ति से जुड़ा होता है जो कई वर्षों से अपने फैसले का इंतजार कर रहा है। किसी मामले का पुराना होना उसके लगातार लंबित रहने का कारण नहीं बनना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने हाल के वर्षों में लंबित मामलों को कम करने के लिए एक विशेष योजना के तहत करीब 800 पुराने मामलों की पहचान की है। अब इन मामलों को चारों विशेष पीठों के जरिए प्राथमिकता के आधार पर सुना जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट की विशेष बेंच की अहम जानकारी
- कुल विशेष बेंच: 4
- पुराने मामलों की पहचान: करीब 800
- सुनवाई के दिन: मंगलवार, बुधवार और गुरुवार
- मामलों की श्रेणी: पुराने सिविल और आपराधिक मामले
- उद्देश्य: लंबित मामलों का तेजी से निपटारा
पुराने मामलों की सुनवाई के लिए तय किए गए दिन
जानकारी के अनुसार, इन चारों विशेष बेंच को सप्ताह में तीन दिन पुराने मामलों की सुनवाई के लिए रखा जाएगा। मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को ये पीठ सामान्य मामलों की जगह केवल पुराने लंबित मामलों पर ध्यान देंगी।
दो डिवीजन बेंच पुराने सिविल मामलों की सुनवाई करेंगी। इनमें जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एसवीएन भट्टी की अध्यक्षता वाली पीठ शामिल हैं। वहीं, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्जल भुइयां की अध्यक्षता वाली दो अन्य पीठ पुराने आपराधिक मामलों की सुनवाई करेंगी।
800 पुराने मामलों को तेजी से निपटाने की योजना
सूत्रों के मुताबिक, शुरुआत में प्रत्येक विशेष बेंच के लिए करीब 200 पुराने मामलों की पहचान की गई है। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 800 पुराने मामलों को तेजी से निपटाने पर ध्यान दिया जाएगा।
यह कदम सीजेआई सूर्यकांत द्वारा उठाए गए प्रमुख प्रशासनिक सुधारों में से एक माना जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल अचानक सुनवाई अभियान चलाने के बजाय एक व्यवस्थित तरीके से लंबित मामलों को कम करना है।
न्याय व्यवस्था में भरोसा बढ़ाने की पहल
सुप्रीम कोर्ट की इस पहल से उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है जो लंबे समय से अपने मामलों के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं। पुराने मामलों के निपटारे से न्याय प्रणाली की कार्यक्षमता और लोगों का भरोसा दोनों मजबूत हो सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है, अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
