पिछले 15 वर्षों में दिल्ली में हुए बड़े आंदोलनों की सूची में सोमवार को Cockroach Janta Party (CJP) के संसद मार्च ने भी अपना नाम जोड़ दिया। संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़पों तथा बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिए जाने की घटना ने राजधानी में पहले हुए कई बड़े विरोध प्रदर्शनों की याद दिला दी। इनमें 2021 की किसान ट्रैक्टर रैली, 2012 का निर्भया आंदोलन, 2011 का अन्ना हजारे आंदोलन, CAA विरोध प्रदर्शन और पहलवानों का प्रदर्शन शामिल हैं।
दिल्ली में हुए बड़े आंदोलनों की कड़ी में CJP का संसद मार्च भी चर्चा का विषय बन गया है।
दिल्ली के बड़े आंदोलनों की सूची में शामिल हुआ CJP का संसद मार्च
CJP संसद मार्च की प्रमुख बातें
- मुद्दा: कथित पेपर लीक और परीक्षा गड़बड़ियां
- मांग: केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
- स्थान: संसद मार्च, दिल्ली
- कार्रवाई: बैरिकेडिंग और पुलिस तैनाती
- परिणाम: झड़प और हिरासत
सोमवार को CJP के समर्थक तिरंगा लेकर सड़कों पर उतरे और कथित पेपर लीक तथा परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए संसद की ओर मार्च करने लगे। रास्ते में कई जगह पुलिस बैरिकेड लगाए गए, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उन्हें पार करने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बल प्रयोग किया और हालात तनावपूर्ण हो गए।
बताया गया कि शुरुआत में पुलिस को उम्मीद थी कि प्रदर्शन कुछ घंटों में खत्म हो जाएगा। इसी वजह से जंतर-मंतर के आसपास बैरिकेडिंग कर करीब 2,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे। इंटरनेट सेवा भी सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक बंद रखने का आदेश जारी किया गया था। लेकिन जब भीड़ बढ़ी और प्रदर्शन तेज हो गया तो इंटरनेट बंदी शाम 6 बजे तक बढ़ा दी गई।
सुरक्षा व्यवस्था और यातायात पर असर
स्थिति बिगड़ने पर DMRC ने आसपास के पांच Metro स्टेशन भी बंद कर दिए ताकि और लोग प्रदर्शन स्थल तक न पहुंच सकें। हालांकि इससे हजारों ऑफिस जाने वाले लोगों और यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा और कई घंटों तक ट्रैफिक तथा यात्रा प्रभावित रही।
पुलिस का मुख्य उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को संसद तक पहुंचने से रोकना था, क्योंकि उसी दिन मानसून सत्र का पहला दिन चल रहा था। जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती गई, हालात पर नियंत्रण करना मुश्किल होता गया और पुलिस को अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम करने पड़े।
दिल्ली के प्रमुख आंदोलन
- 2011: अन्ना हजारे आंदोलन
- 2012: निर्भया आंदोलन
- 2019-20: CAA विरोध प्रदर्शन
- 2021: किसान ट्रैक्टर रैली
- 2023: पहलवानों का प्रदर्शन
दिल्ली इससे पहले भी कई बड़े आंदोलनों की गवाह रही है। 2021 में कृषि कानूनों के विरोध में निकली ट्रैक्टर रैली के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी तय मार्ग छोड़कर लाल किले तक पहुंच गए थे, जहां हिंसा हुई और 300 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। 2012 के निर्भया आंदोलन में हजारों छात्र और आम नागरिक इंडिया गेट और रायसीना हिल तक पहुंचे थे, जहां पुलिस ने पानी की बौछार, आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया था।
2011 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान भी बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे थे। वहीं 2019-20 के CAA विरोध प्रदर्शन और शाहीन बाग आंदोलन के दौरान भी राजधानी में लंबे समय तक धरने, सड़क बंद और भारी पुलिस तैनाती देखने को मिली थी। 2023 में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे पहलवानों ने भी नए संसद भवन की ओर मार्च करने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोककर हिरासत में ले लिया था।
राजधानी में बड़े विरोध प्रदर्शनों की लगातार कड़ी
सोमवार का CJP प्रदर्शन एक बार फिर यह दिखाता है कि जब बड़े मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन होते हैं, तो दिल्ली की सड़कों पर भारी भीड़, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक चुनौतियां एक साथ सामने आ जाती हैं। यह प्रदर्शन भी राजधानी के उन प्रमुख आंदोलनों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्होंने पिछले डेढ़ दशक में राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा बटोरी।
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