अंतरराष्ट्रीय crude बाजार में मंगलवार को तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों का ध्यान अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत पर है। दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की उम्मीद से बाजार में राहत का माहौल बना, जिससे कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव देखने को मिला।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट क्यों आई
अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत में सकारात्मक संकेत मिलने से वैश्विक crude बाजार में दबाव देखने को मिला। निवेशकों को उम्मीद है कि यदि तनाव कम होता है तो ऊर्जा आपूर्ति सामान्य बनी रह सकती है।
शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड करीब 0.6 प्रतिशत गिरकर 87.82 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) लगभग 0.8 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 81.95 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। कारोबार के दौरान दोनों प्रमुख बेंचमार्क एक समय एक सप्ताह से अधिक के निचले स्तर तक भी फिसल गए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और विवाद के समाधान की संभावना बनी हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि वार्ता सफल नहीं होती है तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है। दूसरी ओर, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दोहराई है।
कच्चे तेल की कीमतों की मुख्य बातें
- ब्रेंट क्रूड: 87.82 डॉलर प्रति बैरल
- WTI: 81.95 डॉलर प्रति बैरल
- मुख्य वजह: अमेरिका-ईरान वार्ता
- बाजार: तनाव कम होने की उम्मीद
- असर: crude कीमतों पर दबाव
- फोकस: मध्य पूर्व की स्थिति
बाजार पर क्या असर पड़ा
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार इस उम्मीद पर कारोबार कर रहा है कि दोनों देशों के बीच तनाव और नहीं बढ़ेगा। यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो मध्य पूर्व से ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होने की संभावना बढ़ेगी, जिससे market में राहत बनी रह सकती है। हालांकि उनका मानना है कि हालात अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं हैं और किसी भी नए घटनाक्रम का असर कीमतों पर तुरंत पड़ सकता है।
यमन के हूती लड़ाकों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, वे बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि उनकी क्षमता सीमित है, लेकिन इसके बावजूद लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या पहले की तुलना में कम हुई है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि तेल की कीमतों में बड़ी तेजी नहीं आने की एक वजह वैश्विक मांग में कमजोरी है। खासकर एशियाई देशों में मांग पहले जैसी मजबूत नहीं दिख रही है, जिससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
निवेशकों की नजर किन बातों पर
- अमेरिका-ईरान वार्ता: आगे की प्रगति
- होर्मुज जलडमरूमध्य: ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति
- Inventory: अमेरिकी कच्चे तेल का भंडार
- वैश्विक मांग: एशियाई देशों की खपत
- Brent: अंतरराष्ट्रीय कीमतों की दिशा
- जोखिम: मध्य पूर्व में नया तनाव
आगे किस पर रहेगी नजर
एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी हाल के दिनों में घटा है। इससे साफ है कि क्षेत्र में तनाव का असर ऊर्जा आपूर्ति पर अभी भी दिखाई दे रहा है।
इस बीच शुरुआती अनुमान बताते हैं कि पिछले सप्ताह अमेरिका में inventory यानी कच्चे तेल का भंडार कम हुआ है। वहीं पेट्रोल के स्टॉक में भी गिरावट आने की संभावना जताई गई है, जबकि डीजल और अन्य डिस्टिलेट ईंधन के भंडार में कुछ बढ़ोतरी हो सकती है। अब निवेशकों की नजर आने वाले आधिकारिक आंकड़ों और मध्य पूर्व की स्थिति पर बनी हुई है, क्योंकि यही दोनों बातें आगे Brent और वैश्विक तेल बाजार की दिशा तय कर सकती हैं।
अस्वीकरण: यह जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों और बाजार के आंकड़ों पर आधारित है। कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती हैं।