भारत से बाहर रहने वाले भारतीयों यानी एनआरआई ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए HSBC ने एक नई रणनीति अपनाई है, जिसका उसे बड़ा फायदा मिला है। जानकारी के अनुसार, बैंक अब तक करीब 5.5 अरब डॉलर के एनआरआई जमा जुटाने में सफल रहा है। यह उपलब्धि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की विशेष FCNR(B) सुविधा के तहत तैयार की गई एक खास योजना की वजह से मिली है।
HSBC ने एनआरआई जमा कैसे बढ़ाए
HSBC ने RBI की FCNR(B) सुविधा के तहत एक विशेष रणनीति अपनाकर बड़ी संख्या में एनआरआई ग्राहकों को आकर्षित किया। इसी योजना की मदद से बैंक करीब 5.5 अरब डॉलर के एनआरआई deposit जुटाने में सफल रहा।
मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, HSBC ने इस योजना के तहत ग्राहकों को अधिक leverage की सुविधा दी। बैंक ने इन जमा योजनाओं के समर्थन में 3.5 अरब डॉलर से अधिक का कर्ज भी उपलब्ध कराया। बताया जा रहा है कि इसी रणनीति के कारण बैंक अपने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धियों से काफी आगे निकल गया।
योजना के तहत यदि कोई ग्राहक भारत के किसी बैंक में विदेशी मुद्रा वाले FCNR(B) खाते में 1 लाख डॉलर जमा करता है, तो वह उसी जमा के आधार पर अधिकतम 19 लाख डॉलर तक का कर्ज ले सकता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस व्यवस्था में ग्राहक को सालाना करीब 14.25 प्रतिशत तक का संभावित return मिल सकता है, जबकि कर्ज पर ब्याज दर लगभग 5.05 से 5.15 प्रतिशत के बीच रहती है।
HSBC की योजना की मुख्य बातें
- बैंक: HSBC
- एनआरआई जमा: करीब 5.5 अरब डॉलर
- सुविधा: RBI की FCNR(B) योजना
- कर्ज: 3.5 अरब डॉलर से अधिक
- Leverage: जमा राशि के आधार पर अधिक फंडिंग
- उद्देश्य: एनआरआई ग्राहकों को आकर्षित करना
प्रतिस्पर्धियों से कैसे आगे निकला HSBC
इसी रणनीति का असर यह हुआ कि HSBC ने बड़ी मात्रा में एनआरआई जमा अपने पास आकर्षित कर लिए। दूसरी ओर, इसी तरह की योजना चलाने वाले Standard Chartered ने अपेक्षाकृत कम जोखिम वाली नीति अपनाई, जिसके चलते उसके पास करीब 1 अरब डॉलर के ही जमा आए। बताया जा रहा है कि जहां HSBC ने जमा राशि के मुकाबले 19 गुना तक फंडिंग दी, वहीं उसके प्रतिद्वंद्वी बैंक ने लगभग 9 गुना तक ही सुविधा उपलब्ध कराई।
विशेषज्ञों का मानना है कि HSBC की सफलता के पीछे उसका वैश्विक नेटवर्क भी बड़ी वजह है। भारत के GIFT City के अलावा सिंगापुर, हांगकांग और दुबई जैसे वित्तीय केंद्रों में उसकी मजबूत मौजूदगी है। इससे बैंक अपने संपन्न एनआरआई ग्राहकों तक आसानी से पहुंच बना पाया।
FCNR(B) योजना की प्रमुख बातें
- खाता: विदेशी मुद्रा में FCNR(B) जमा
- अवधि: अधिकांश जमा 5 वर्ष के
- संभावित Return: करीब 14.25 प्रतिशत तक
- ब्याज दर: कर्ज पर लगभग 5.05 से 5.15 प्रतिशत
- लोकप्रियता: एनआरआई ग्राहकों के बीच पसंदीदा
- फोकस: दीर्घकालिक deposit और निवेश
बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा
जानकारी के अनुसार, बैंक के पास आने वाले अधिकांश फंड पांच वर्ष की अवधि वाले FCNR(B) खातों में जमा किए गए हैं। ऐसे खाते विदेशी मुद्रा में जमा स्वीकार करते हैं और एनआरआई ग्राहकों के बीच लंबे समय से लोकप्रिय माने जाते हैं।
बाजार के जानकारों का कहना है कि एनआरआई ग्राहकों को आकर्षित करने की दौड़ में अंतरराष्ट्रीय बैंकों के बीच प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। HSBC की यह रणनीति दिखाती है कि बेहतर deposit योजनाओं और आकर्षक वित्तीय सुविधाओं के जरिए बैंक वैश्विक भारतीय ग्राहकों को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रहे हैं।
अस्वीकरण: यह जानकारी सार्वजनिक रिपोर्टों और उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है। किसी भी निवेश या बैंकिंग निर्णय से पहले आधिकारिक जानकारी अवश्य जांचें।