D-Propulse ने बनाया स्वदेशी RDE इंजन, रक्षा क्षेत्र को मिलेगी ताकत

भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक नई उपलब्धि सामने आई है। देश में ही तैयार किए गए आधुनिक इंजन के सफल परीक्षण को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वदेशी इंजन तकनीक विकसित होने से भारत को भविष्य में विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

भारत में तैयार RDE इंजन का सफल परीक्षण

भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक नई उपलब्धि सामने आई है। दिल्ली की एक रक्षा Startup कंपनी ने देश में ही तैयार किए गए आधुनिक इंजन का सफल परीक्षण करने का दावा किया है। इस विकास को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वदेशी इंजन तकनीक विकसित होने से भारत को विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

स्वदेशी इंजन परीक्षण की मुख्य बातें

  • कंपनी: D-Propulse
  • तकनीक: Rotating Detonation Engine (RDE)
  • स्थान: DRDO सुविधा, हैदराबाद
  • परीक्षण: 21 और 22 जुलाई
  • उपलब्धि: 5 किलो न्यूटन थ्रस्ट का दावा
  • लक्ष्य: रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाना

D-Propulse नाम की कंपनी ने हैदराबाद में DRDO की एक सुविधा में Rotating Detonation Engine यानी RDE का जमीन पर परीक्षण किया। कंपनी के संस्थापक सौरव झा के अनुसार यह परीक्षण 21 और 22 जुलाई को किया गया था। इस तरह की तकनीक को दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण रक्षा तकनीकों में से एक माना जाता है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी देश के लिए इंजन निर्माण की क्षमता बहुत महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी देश को विमान या मिसाइल के इंजन के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है, तो केवल खरीद ही नहीं बल्कि मरम्मत, पुर्जों और भविष्य के सुधार के लिए भी उसी देश पर निर्भर रहना पड़ता है। इसलिए घरेलू स्तर पर ऐसी क्षमता विकसित करना रणनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।

RDE तकनीक को क्यों माना जा रहा है खास

RDE को अगली पीढ़ी का इंजन माना जाता है। सामान्य इंजन में ईंधन लगातार जलता है, जबकि इस तकनीक में नियंत्रित छोटे विस्फोटों के जरिए ज्यादा ताकत पैदा की जाती है। इससे कम ईंधन में अधिक ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। भविष्य में ऐसी तकनीक का उपयोग तेज ड्रोन, मिसाइल, विमान और रॉकेट जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है।

कंपनी के अनुसार यह इंजन मौजूदा जेट इंजनों की तुलना में 15 से 25 प्रतिशत तक अधिक प्रभावी हो सकता है। इसका मतलब है कि समान मात्रा में ईंधन का इस्तेमाल करते हुए अधिक शक्ति प्राप्त की जा सकती है। इससे भविष्य में छोटे आकार के लेकिन ज्यादा क्षमता वाले इंजन बनाए जा सकते हैं।

कंपनी की योजना वर्ष 2027 तक पहला उड़ान परीक्षण करने और 2029 तक सैन्य उपयोग के लिए परीक्षण पूरा करने की है। इसका लक्ष्य भारतीय सेना को अपने प्रमुख ग्राहक के रूप में जोड़ना और भविष्य में RDE आधारित प्रणालियों का निर्माण करना है।

रक्षा क्षेत्र में संभावित फायदे

  • निर्भरता: विदेशी तकनीक पर कम निर्भरता
  • क्षमता: आधुनिक इंजन निर्माण में मजबूती
  • उपयोग: ड्रोन, मिसाइल, विमान और रॉकेट
  • फायदा: छोटे आकार में ज्यादा शक्ति
  • Startup: रक्षा क्षेत्र में नई कंपनियों को बढ़ावा
  • भविष्य: Aerospace क्षेत्र में भारत की भूमिका मजबूत

रक्षा Startup और स्वदेशी तकनीक को मिलेगा बढ़ावा

परीक्षण के दौरान कंपनी ने दावा किया कि इंजन ने 5 किलो न्यूटन का थ्रस्ट यानी आगे बढ़ाने वाली शक्ति पैदा की। कंपनी का कहना है कि दुनिया में कई संस्थान इस तकनीक पर काम कर रहे हैं, लेकिन लगातार अधिक क्षमता वाला ऐसा परीक्षण अभी भी काफी चुनौतीपूर्ण माना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भारत के रक्षा Startup क्षेत्र को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है। इससे अन्य छोटी कंपनियों और शोध संस्थानों को भी नई रक्षा तकनीक पर काम करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। इसके अलावा प्रतिस्पर्धा बढ़ने से लागत कम करने और देश में निर्माण क्षमता बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।

रक्षा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि इंजन बनाना भारत के लिए लंबे समय से एक बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती रहा है। यदि यह प्रयास सफल होता है तो देश को आधुनिक रक्षा प्रणालियों के निर्माण में बड़ी मजबूती मिल सकती है।

इस कंपनी की शुरुआत सौरव झा और पूर्व DRDO वैज्ञानिक डॉ. वी. रामानुजाचारी ने की थी। कंपनी ने पिछले साल निवेश भी जुटाया था ताकि इस तकनीक को आगे बढ़ाया जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार अभी पूरी तरह व्यावसायिक उपयोग में कुछ समय लग सकता है, लेकिन इंजन के छोटे हिस्सों और अन्य उपकरणों का निर्माण पहले शुरू हो सकता है।

वैश्विक स्तर पर Aerospace क्षेत्र में नई तकनीकों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारत की स्वदेशी इंजन तकनीक आने वाले वर्षों में रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में देश की भूमिका को और मजबूत कर सकती है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से दी गई है। रक्षा तकनीक से जुड़े आधिकारिक अपडेट को ही अंतिम माना जाए।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

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