ESOP टैक्स पर ITAT का बड़ा फैसला, स्टार्टअप कर्मचारियों को राहत

स्टार्टअप और टेक कंपनियों के कर्मचारियों के लिए ESOP से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। बेंगलुरु स्थित आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने एक पूर्व Flipkart कर्मचारी के मामले में आयकर विभाग को दोबारा विचार करने का निर्देश दिया है। यह मामला उन ESOP से जुड़ा है जो कर्मचारी को मिल चुके थे, लेकिन उन्होंने अभी तक उनका इस्तेमाल कर शेयर नहीं खरीदे थे। बाद में कंपनी ने इन विकल्पों को वापस खरीद लिया और कर्मचारी को करीब ₹39.74 लाख का भुगतान किया।

ESOP टैक्स विवाद में ITAT का बड़ा निर्देश

कर्मचारी ने इस राशि को Capital Gains मानकर टैक्स रिटर्न दाखिल किया था। हालांकि आयकर विभाग ने इसे Salary के रूप में माना, क्योंकि कंपनी ने इस भुगतान पर TDS काटकर उसे Form 16 में वेतन के तहत दिखाया था। अब ITAT ने कहा है कि इस मामले की दोबारा जांच की जाए और कर्नाटक हाईकोर्ट के पहले दिए गए फैसले को भी ध्यान में रखा जाए।

कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में स्पष्ट किया था कि ESOP पर वेतन के रूप में टैक्स तभी लगाया जा सकता है, जब कर्मचारी वास्तव में अपने विकल्प का उपयोग करके शेयर हासिल कर ले। यदि कर्मचारी के पास केवल भविष्य में शेयर खरीदने का अधिकार है और उसने अभी तक शेयर प्राप्त नहीं किए हैं, तो ऐसे मामले में मिलने वाली राशि को केवल इस आधार पर वेतन नहीं माना जा सकता कि कंपनी ने TDS काट लिया था। आय की प्रकृति का निर्धारण आयकर कानून के प्रावधानों के अनुसार किया जाना चाहिए।

📌 ESOP टैक्स विवाद की मुख्य बातें

  • मामला: Flipkart के पूर्व कर्मचारी का ESOP विवाद
  • भुगतान: करीब ₹39.74 लाख
  • विवाद: Capital Gains या Salary
  • निर्देश: ITAT ने दोबारा जांच के आदेश दिए
  • आधार: कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले पर विचार

हाईकोर्ट ने ESOP टैक्स को लेकर क्या कहा

हाईकोर्ट ने यह भी बताया था कि ESOP पर टैक्स आमतौर पर दो चरणों में लगता है। पहला, जब कर्मचारी विकल्प का उपयोग कर शेयर प्राप्त करता है, तब बाजार मूल्य और खरीद मूल्य के अंतर पर टैक्स लगता है। दूसरा, जब बाद में उन शेयरों को बेचा जाता है, तब होने वाले लाभ पर पूंजीगत लाभ के नियम लागू होते हैं।

ITAT ने इस मामले में अंतिम फैसला नहीं दिया है, लेकिन इसे दोबारा सुनवाई के लिए भेजना स्टार्टअप कर्मचारियों के लिए राहत माना जा रहा है। इससे ऐसे कर्मचारियों को यह दलील देने का आधार मिल सकता है कि यदि उन्हें इस्तेमाल न किए गए ESOP के बदले भुगतान मिला है, तो उस पर Capital Gains के नियम लागू होने चाहिए, न कि Salary के।

💼 कर्मचारियों के लिए इसका क्या मतलब है

  • ESOP: इस्तेमाल न होने पर भी टैक्स विवाद संभव
  • Buyback: भुगतान की टैक्स प्रकृति अहम
  • Capital Gains: कर्मचारियों को राहत मिल सकती है
  • Salary: हर मामले में लागू होना जरूरी नहीं
  • प्रभाव: कुल टैक्स देनदारी पर बड़ा असर

स्टार्टअप कर्मचारियों पर संभावित असर

इस मामले का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि कई स्टार्टअप कंपनियों में कर्मचारियों को वेतन के साथ ESOP भी दिए जाते हैं। कई बार कंपनी के अधिग्रहण, Buyback या अन्य सौदों के दौरान कर्मचारियों को इन विकल्पों के बदले भुगतान मिलता है। ऐसे मामलों में यह तय करना कि आय पर टैक्स वेतन के रूप में लगेगा या पूंजीगत लाभ के रूप में, कर्मचारी की कुल टैक्स देनदारी पर बड़ा असर डाल सकता है।

Disclaimer: यह जानकारी सार्वजनिक रिपोर्ट और न्यायिक आदेशों पर आधारित है। अंतिम टैक्स देनदारी प्रत्येक मामले के तथ्यों और लागू कानून पर निर्भर करेगी।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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