मानसून के मौसम में मच्छर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को सतर्क रहने और डेंगू की रोकथाम के लिए जरूरी तैयारियां मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
मानसून के दौरान डेंगू के बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को सतर्क रहने और बीमारी की रोकथाम के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से जांच व्यवस्था मजबूत करने, मच्छरों को नियंत्रित करने और अस्पतालों में तैयारियां बढ़ाने को कहा है। बारिश के मौसम में मच्छरों के पनपने की स्थिति बेहतर होने के कारण डेंगू के मामलों में बढ़ोतरी का खतरा रहता है।
केंद्र सरकार ने राज्यों को दिए डेंगू रोकथाम के निर्देश
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक देश में डेंगू के 13,336 मामले सामने आए हैं और 12 लोगों की मौत हुई है। सरकार ने राज्यों को जांच बढ़ाने, मरीजों की जानकारी समय पर भेजने और मच्छरों के प्रजनन वाले स्थानों को खत्म करने के निर्देश दिए हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से ELISA आधारित NS1 और IgM जांच किट की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा है। इसके अलावा सभी क्षेत्रों में बीमारी की निगरानी बढ़ाने और डिजिटल रिपोर्टिंग व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि डेंगू के बढ़ते मामलों का समय पर पता लगाया जा सके।
Dengue Alert: जरूरी जानकारी
- इस साल मामले: 13,336 डेंगू संक्रमण
- मौतें: 12 लोगों की मृत्यु
- जांच: ELISA आधारित NS1 और IgM टेस्ट
- खतरा: मानसून में मच्छरों का प्रजनन बढ़ना
- जरूरी कदम: साफ-सफाई और निगरानी
- लक्ष्य: Dengue Cases को नियंत्रित करना
भारत में बढ़ रहे हैं डेंगू के मामले
भारत में पिछले कुछ वर्षों में डेंगू के मामलों में तेजी देखी गई है। साल 2025 में देश में 1,21,824 मामले और 131 मौतें दर्ज की गई थीं। इससे पहले 2024 में 2,33,519 मामले और 297 मौतें, जबकि 2023 में 2,89,235 मामले और 485 मौतें दर्ज हुई थीं।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि मानसून और उसके बाद का समय डेंगू फैलाने वाले Aedes mosquito के लिए अनुकूल होता है। बारिश के कारण कूलर, गमले, बाल्टी और निर्माण स्थलों पर पानी जमा हो जाता है, जहां मच्छर तेजी से पनप सकते हैं।
Dengue Prevention Tips
- पानी जमा न होने दें: कूलर, गमले और बाल्टी साफ रखें
- मच्छर नियंत्रण: प्रजनन वाले स्थान खत्म करें
- जांच: समय पर टेस्ट कराएं
- इलाज: डॉक्टर की सलाह लें
- सावधानी: बिना सलाह दवा न लें
- सुरक्षा: आसपास साफ-सफाई रखें
तमिलनाडु में सबसे ज्यादा डेंगू केस
इस साल तमिलनाडु में डेंगू के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं। राज्य में 4,973 संक्रमण और दो मौतें दर्ज की गई हैं। इसके बाद महाराष्ट्र में 1,525 मामले, केरल में 1,403 मामले और 10 मौतें, कर्नाटक में 978 मामले तथा आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में 770-770 मामले सामने आए हैं।
केंद्र सरकार ने राज्यों को अपने action plan की समीक्षा करने और बारिश के मौसम में संक्रमण बढ़ने से रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने को कहा है। अस्पतालों को भी जरूरत पड़ने पर मरीजों के इलाज और आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को तैयार रहने के निर्देश
राज्यों को जांच किट, दवाओं और मच्छर नियंत्रण के लिए जरूरी सामग्री का पर्याप्त भंडार रखने को कहा गया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी संदिग्ध मरीजों की जांच और स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में पानी जमा होने से डेंगू फैलाने वाले मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है। शुरुआती समय में NS1 test और बाद के दिनों में IgM जांच से बीमारी की पहचान करने में मदद मिलती है।
डेंगू के गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज न करें
डॉक्टरों का कहना है कि डेंगू में केवल प्लेटलेट कम होना ही चिंता का कारण नहीं होता। ज्यादातर मरीज सही देखभाल, आराम और पर्याप्त तरल पदार्थ लेने से ठीक हो जाते हैं। हालांकि, बीमारी के तीसरे से सातवें दिन के बीच मरीज की विशेष निगरानी जरूरी होती है।
तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, खून आना, सांस लेने में परेशानी, अधिक कमजोरी या पेशाब कम होना जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। विशेषज्ञों ने लोगों को बिना सलाह के दवा लेने से बचने और समय पर इलाज कराने की सलाह दी है।
सरकार ने लोगों से अपने आसपास साफ-सफाई रखने और पानी जमा नहीं होने देने की अपील की है। इससे डेंगू के साथ-साथ chikungunya और Zika virus जैसी अन्य मच्छर जनित बीमारियों के फैलाव को भी कम किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख स्वास्थ्य संबंधी सामान्य जानकारी पर आधारित है। बीमारी में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।