Dengue Vaccine Qdenga: भारत में CDSCO की मंजूरी, जानें फायदे

भारत में पहली बार डेंगू से बचाव के लिए Qdenga वैक्सीन को मंजूरी मिल गई है। बढ़ते डेंगू मामलों के बीच इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, हालांकि विशेषज्ञ अब भी वैक्सीन के साथ मच्छर नियंत्रण और बचाव के उपाय अपनाने पर जोर दे रहे हैं।

भारत में इस सप्ताह CDSCO ने पहली बार डेंगू से बचाव के लिए Qdenga नाम की वैक्सीन को मंजूरी दी है। यह वैक्सीन जर्मनी की कंपनी Takeda GmbH ने तैयार की है और इसे भारत में साल 2027 की पहली छमाही से उपलब्ध कराने की योजना है। डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए इस मंजूरी को एक अहम कदम माना जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में गंभीर मरीजों की संख्या कम करने में मदद मिल सकती है।

भारत में Qdenga वैक्सीन को मिली मंजूरी

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत उन देशों में शामिल है जहां डेंगू का खतरा सबसे ज्यादा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल देश में एक लाख से अधिक डेंगू के मामले दर्ज किए गए थे। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि असली संख्या इससे काफी ज्यादा हो सकती है, क्योंकि कई लोग अस्पताल में भर्ती नहीं होते और केवल बाहरी इलाज कराकर ठीक हो जाते हैं। ऐसे मामलों का रिकॉर्ड अक्सर सरकारी आंकड़ों में शामिल नहीं हो पाता।

बेंगलुरु के डॉक्टरों का कहना है कि इस बार बारिश के मौसम में पिछले साल की तुलना में डेंगू के मरीज ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। शहरों में तेजी से बढ़ रहे निर्माण कार्यों के दौरान जगह-जगह पानी जमा हो जाता है। इसके अलावा इस साल लगातार बारिश होने के बजाय बीच-बीच में बारिश हुई है। ऐसी स्थिति में जमा हुआ पानी लंबे समय तक बना रहता है, जिससे मच्छरों के पनपने की संभावना बढ़ जाती है और संक्रमण फैलने का खतरा भी ज्यादा हो जाता है।

Qdenga वैक्सीन की मुख्य बातें

  • मंजूरी: भारत में CDSCO से पहली स्वीकृति
  • वैक्सीन: Qdenga
  • निर्माता: Takeda GmbH, जर्मनी
  • उपलब्धता: 2027 की पहली छमाही
  • खुराक: दो डोज, लगभग 3 महीने का अंतर
  • उद्देश्य: गंभीर डेंगू के जोखिम को कम करना

वैक्सीन कैसे काम करती है

नई वैक्सीन दो खुराक में दी जाएगी और दोनों खुराक के बीच लगभग तीन महीने का अंतर रखा जाएगा। यह कमजोर किए गए वायरस से तैयार की गई है ताकि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो सके। डॉक्टरों के अनुसार कुछ लोगों में इसे लेने के बाद हल्का बुखार, शरीर में दर्द या डेंगू जैसे हल्के लक्षण दिखाई दे सकते हैं, लेकिन यह सामान्य प्रतिक्रिया मानी जाती है और अधिकतर मामलों में जल्दी ठीक हो जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस वैक्सीन को इस तरह विकसित किया गया है कि यह डेंगू के चारों प्रकार के वायरस के खिलाफ सुरक्षा देने में मदद कर सके। शरीर में पहुंचने के बाद यह प्रतिरक्षा तंत्र को संक्रमण से लड़ने के लिए तैयार करती है। इसका उद्देश्य बीमारी की गंभीरता को कम करना है, ताकि संक्रमित होने पर मरीज की हालत ज्यादा खराब न हो।

डेंगू से बचाव के जरूरी उपाय

  • पूरी बांह के कपड़े: मच्छरों के काटने से बचाव
  • पानी जमा न होने दें: मच्छरों की रोकथाम
  • साफ-सफाई: घर और आसपास स्वच्छता बनाए रखें
  • मच्छरदानी: जरूरत पड़ने पर उपयोग करें
  • वैक्सीन: डॉक्टर की सलाह के अनुसार लगवाएं
  • सावधानी: केवल वैक्सीन पर निर्भर न रहें

किन लोगों के लिए है वैक्सीन

यह वैक्सीन त्वचा के नीचे इंजेक्शन के रूप में दी जाएगी। इसे 4 वर्ष से 60 वर्ष तक की उम्र के लोगों के लिए मंजूरी मिली है। हालांकि गर्भवती महिलाओं और जिन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर है, उन्हें यह वैक्सीन नहीं दी जाएगी। डॉक्टरों का यह भी कहना है कि वैक्सीन लगवाने के बाद भी डेंगू हो सकता है, लेकिन बीमारी गंभीर होने की संभावना कम रहती है।

डेंगू से बचाव में सावधानी भी जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को सलाह देते हैं कि केवल वैक्सीन पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। मच्छरों से बचाव के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनना, घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देना, साफ-सफाई बनाए रखना और जरूरत पड़ने पर मच्छरदानी या अन्य बचाव के उपाय अपनाना भी उतना ही जरूरी है। खासकर बारिश के मौसम में थोड़ी सी सावधानी भी डेंगू के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है।

Disclaimer: यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। वैक्सीन या उपचार से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

Gourav Kumar Singh

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