केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद और लंबे समय से चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने यह कदम शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही लेने के तौर पर उठाया। उनके इस्तीफे के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है।
NDA सरकार में शिक्षा मंत्रियों का 12 साल का सफर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार के 2014 में सत्ता में आने के बाद धर्मेंद्र प्रधान चौथे पूर्णकालिक शिक्षा मंत्री थे। पिछले 12 वर्षों में शिक्षा मंत्रालय ने कई बड़े बदलाव देखे, जिनमें नई शिक्षा नीति (NEP) 2020, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना और पाठ्यक्रम में बदलाव शामिल हैं। हालांकि, इस दौरान बोर्ड परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं से जुड़े विवाद भी सामने आए।
2014 में भाजपा सरकार बनने के बाद स्मृति ईरानी को मानव संसाधन विकास मंत्रालय (HRD) की जिम्मेदारी दी गई थी। वह इस पद को संभालने वाली सबसे कम उम्र की नेताओं में शामिल थीं। उनके कार्यकाल में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने, कौशल विकास और डिजिटल शिक्षा पर जोर दिया गया। हालांकि, विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों और शैक्षणिक स्वतंत्रता जैसे मुद्दों को लेकर उनका कार्यकाल चर्चा में रहा। 2016 में कैबिनेट बदलाव के दौरान उन्हें कपड़ा मंत्रालय भेज दिया गया।
📚 शिक्षा मंत्रालय के प्रमुख बदलाव
- 2014: स्मृति ईरानी ने HRD मंत्रालय संभाला
- 2016: प्रकाश जावड़ेकर को जिम्मेदारी मिली
- 2019: रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ शिक्षा मंत्री बने
- 2021: धर्मेंद्र प्रधान ने पद संभाला
- 2026: प्रल्हाद जोशी को अतिरिक्त जिम्मेदारी मिली
प्रकाश जावड़ेकर के कार्यकाल में शिक्षा सुधार
इसके बाद प्रकाश जावड़ेकर ने जुलाई 2016 से मई 2019 तक HRD मंत्रालय संभाला। उनके कार्यकाल में स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, ऑनलाइन शिक्षा प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देने और शिक्षकों के प्रशिक्षण पर ध्यान दिया गया। इसी दौरान नई शिक्षा नीति तैयार करने का काम भी आगे बढ़ा।
मार्च 2018 में CBSE की कक्षा 10 गणित और कक्षा 12 अर्थशास्त्र परीक्षा के पेपर लीक का मामला सामने आया था। इसके बाद कक्षा 12 अर्थशास्त्र की परीक्षा दोबारा कराई गई। कक्षा 10 गणित की परीक्षा को लेकर भी फैसला लिया गया था, लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया गया।
रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के कार्यकाल में NEP 2020
2019 में ramesh Pokhriyal ‘Nishank’ ने शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक साल 2020 में नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 को मंजूरी मिलना रहा। इसी दौरान मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय किया गया।
कोरोना महामारी के दौरान उनके कार्यकाल में ऑनलाइन कक्षाओं, डिजिटल शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में कई बदलाव किए गए। जुलाई 2021 में कैबिनेट बदलाव के दौरान उन्होंने पद छोड़ दिया।
🎓 धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की मुख्य बातें
- कार्यकाल: जुलाई 2021 से शिक्षा मंत्री
- फोकस: नई शिक्षा नीति, डिजिटल लर्निंग और कौशल आधारित शिक्षा
- चुनौती: प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े विवाद
- विवाद: NEET-UG और UGC-NET पेपर लीक आरोप
- इस्तीफा: NEET-UG 2026 विवाद के बाद
धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में परीक्षा विवाद
इसके बाद धर्मेंद्र प्रधान ने जुलाई 2021 में शिक्षा मंत्री का पद संभाला। उनके कार्यकाल में नई शिक्षा नीति को लागू करने, कौशल आधारित शिक्षा, डिजिटल लर्निंग और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सुधार पर ध्यान दिया गया।
हालांकि, उनके कार्यकाल के अंतिम वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर कई विवाद सामने आए। NEET-UG और UGC-NET परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों के बाद सरकार को जांच और सुधार के कदम उठाने पड़े। साल 2026 में NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद विरोध प्रदर्शन तेज हुए, जिसके बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग बढ़ गई।
प्रल्हाद जोशी के सामने नई चुनौती
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। वह पहले से उपभोक्ता मामले मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब उनके सामने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रक्रिया को मजबूत करने की चुनौती होगी।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। आधिकारिक अपडेट के लिए संबंधित सरकारी स्रोत देखें।
