Equity Mutual Funds: 35% तक Gold, Silver में निवेश की सुविधा

सेबी के बदले हुए नियमों के बाद कुछ इक्विटी म्यूचुअल फंडों के लिए निवेश का दायरा पहले की तुलना में अधिक लचीला हो गया है। अब पात्र इक्विटी योजनाएं अपने पोर्टफोलियो के उस हिस्से का इस्तेमाल सोना, चांदी और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े निवेश साधनों में कर सकती हैं, जिसे अनिवार्य रूप से मुख्य इक्विटी निवेश में रखना जरूरी नहीं है। हालांकि, यह सुविधा संबंधित म्यूचुअल फंड श्रेणी में तय न्यूनतम इक्विटी निवेश की सीमा पर निर्भर करती है।

Table of Contents

इक्विटी म्यूचुअल फंड में 35% तक निवेश की गुंजाइश कैसे काम करेगी?

उदाहरण के लिए, जिस योजना में कम से कम 65 प्रतिशत निवेश इक्विटी में रखना जरूरी है, वहां बाकी 35 प्रतिशत हिस्से में नियमों के अनुसार दूसरे निवेश किए जा सकते हैं। वहीं ऐसी बड़ी कंपनियों पर केंद्रित योजना, जिसमें मुख्य इक्विटी श्रेणी में कम से कम 80 प्रतिशत निवेश रखना जरूरी है, उसके पास अन्य साधनों के लिए उपलब्ध हिस्सा कम होगा। इसलिए हर इक्विटी म्यूचुअल फंड में 35 प्रतिशत निवेश की समान गुंजाइश नहीं होती।

इस बदलाव से फंड प्रबंधकों को बाजार की स्थिति के अनुसार निवेश में बदलाव करने की अधिक स्वतंत्रता मिल सकती है। पहले बाजार में अनिश्चितता या शेयरों के अधिक महंगे मूल्यांकन की स्थिति में फंड के गैर-इक्विटी हिस्से को सीमित विकल्पों में रखना पड़ सकता था। अब नियमों के दायरे में रहते हुए सोना, चांदी और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े साधनों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

निवेशकों के लिए 35% की सीमा का मतलब

65 प्रतिशत न्यूनतम इक्विटी निवेश वाली योजना में नियमों के अनुसार बाकी हिस्सा दूसरे निवेश साधनों के लिए उपलब्ध हो सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि फंड प्रबंधक हमेशा पूरे 35 प्रतिशत हिस्से को सोना, चांदी या अन्य साधनों में निवेश करेगा।

निवेशकों को क्या फायदा हो सकता है?

निवेशकों के लिए इसका एक फायदा यह हो सकता है कि उन्हें अलग-अलग संपत्तियों में पैसा लगाने के लिए खुद बार-बार निवेश बदलने की जरूरत कम पड़े। अलग-अलग साधनों में सीधे निवेश करने पर लेनदेन खर्च और कुछ मामलों में कर से जुड़े प्रभाव भी हो सकते हैं। म्यूचुअल फंड के अंदर ही अलग-अलग संपत्तियों का संतुलन बनाने से निवेश प्रबंधन कुछ आसान हो सकता है।

हालांकि, केवल इस सुविधा के आधार पर किसी इक्विटी म्यूचुअल फंड का चुनाव करना उचित नहीं माना जाता। किसी योजना के पास 35 प्रतिशत तक निवेश की संभावित गुंजाइश होना यह साबित नहीं करता कि वह पूरी सीमा का इस्तेमाल करेगी या इससे निवेशक को अधिक रिटर्न जरूर मिलेगा। फंड प्रबंधक बाजार की परिस्थितियों और अपनी रणनीति के अनुसार इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकता है या नहीं भी कर सकता है।

म्यूचुअल फंड चुनते समय किन बातों पर ध्यान दें?

निवेश करने से पहले योजना से जुड़े दस्तावेजों में उसकी निवेश रणनीति देखना जरूरी है। मासिक रिपोर्ट के जरिए यह भी समझा जा सकता है कि फंड वास्तव में इक्विटी, सोना, चांदी या अन्य साधनों में कितना पैसा लगा रहा है। इसके साथ फंड प्रबंधक की निवेश प्रक्रिया, खर्च, लंबे समय का प्रदर्शन और जोखिम स्तर जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देना चाहिए।

सिर्फ 35% की सुविधा देखकर निवेश न करें

किसी इक्विटी म्यूचुअल फंड में गैर-इक्विटी निवेश की संभावित गुंजाइश अधिक होने का मतलब यह नहीं है कि फंड का रिटर्न भी अधिक होगा। निवेश से पहले योजना की रणनीति, जोखिम, खर्च और मौजूदा पोर्टफोलियो को समझना जरूरी है।

सोना और चांदी में पहले से निवेश है तो क्या ध्यान रखें?

विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव निवेश प्रबंधन के लिए एक अतिरिक्त सुविधा है, न कि अधिक कमाई की गारंटी। अगर किसी निवेशक के पास पहले से ही सोने, चांदी या अन्य संपत्तियों में पर्याप्त निवेश है, तो म्यूचुअल फंड के जरिए उन्हीं साधनों में अतिरिक्त निवेश होने से उसके पूरे पोर्टफोलियो में किसी एक क्षेत्र का हिस्सा जरूरत से ज्यादा बढ़ सकता है।

हर म्यूचुअल फंड में 35% की समान गुंजाइश नहीं

इसलिए निवेशक को केवल किसी एक नियम या सुविधा को देखकर फैसला लेने के बजाय पूरी योजना को समझना चाहिए। अलग-अलग श्रेणियों के फंड में गैर-इक्विटी निवेश की उपलब्ध सीमा भी अलग हो सकती है। उदाहरण के तौर पर 65 प्रतिशत न्यूनतम इक्विटी वाली योजना के पास अधिक हिस्सा उपलब्ध हो सकता है, जबकि 80 प्रतिशत की अनिवार्य सीमा वाली योजना में यह गुंजाइश कम रहती है।

5 FAQs

1. क्या सभी इक्विटी म्यूचुअल फंड 35% निवेश सोने और चांदी में कर सकते हैं?

नहीं। गैर-इक्विटी निवेश की उपलब्ध सीमा संबंधित म्यूचुअल फंड श्रेणी में तय न्यूनतम इक्विटी निवेश की शर्त पर निर्भर करती है। इसलिए सभी इक्विटी योजनाओं में 35 प्रतिशत की समान गुंजाइश नहीं होती।

2. 65% इक्विटी वाली योजना में बाकी 35% का क्या मतलब है?

अगर किसी योजना में कम से कम 65 प्रतिशत निवेश इक्विटी में रखना जरूरी है, तो नियमों के अनुसार बाकी हिस्सा अन्य पात्र निवेश साधनों में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह जरूरी नहीं है कि पूरा 35 प्रतिशत इस्तेमाल किया ही जाए।

3. क्या सोने और चांदी में निवेश से म्यूचुअल फंड का रिटर्न बढ़ना तय है?

नहीं। सोना, चांदी या अन्य साधनों में निवेश की सुविधा अधिक लचीलापन देती है, लेकिन इससे अधिक रिटर्न की गारंटी नहीं मिलती। वास्तविक प्रदर्शन बाजार की स्थिति और फंड की निवेश रणनीति पर निर्भर करता है।

4. निवेशक को म्यूचुअल फंड चुनते समय क्या देखना चाहिए?

निवेशक को योजना की निवेश रणनीति, जोखिम स्तर, खर्च, लंबे समय का प्रदर्शन, फंड प्रबंधक की प्रक्रिया और मासिक पोर्टफोलियो रिपोर्ट जैसे पहलुओं को देखना चाहिए। केवल गैर-इक्विटी निवेश की सीमा के आधार पर फैसला नहीं करना चाहिए।

5. अगर पहले से सोने और चांदी में निवेश है तो क्या सावधानी रखें?

ऐसे निवेशक को अपने पूरे पोर्टफोलियो में सोने, चांदी और अन्य संपत्तियों का कुल हिस्सा देखना चाहिए। म्यूचुअल फंड के जरिए इन साधनों में अतिरिक्त निवेश होने से किसी एक संपत्ति में जरूरत से ज्यादा एकाग्रता हो सकती है।

Conclusion

सेबी के बदले नियम कुछ पात्र इक्विटी म्यूचुअल फंडों को पोर्टफोलियो के गैर-इक्विटी हिस्से को सोना, चांदी और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े साधनों में इस्तेमाल करने की अधिक सुविधा देते हैं। हालांकि, हर फंड में उपलब्ध सीमा अलग हो सकती है और यह सुविधा अधिक रिटर्न की गारंटी नहीं है। इसलिए निवेशक को योजना की रणनीति, जोखिम, खर्च और पूरे पोर्टफोलियो को समझने के बाद ही निवेश से जुड़ा फैसला लेना चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य जानकारी और शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। म्यूचुअल फंड और अन्य बाजार निवेश में जोखिम होता है। निवेश करने से पहले संबंधित योजना के दस्तावेजों और आधिकारिक जानकारी को ध्यान से पढ़ें तथा जरूरत होने पर योग्य वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।

Gourav Kumar Singh

About the Author

Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

Read More →

Leave a Comment