भारत में पेट्रोल में एथनॉल मिलाने की योजना ने चीनी उद्योग की कई परेशानियों को कम करने और अतिरिक्त अनाज के इस्तेमाल में मदद की है। हालांकि, अब 20 प्रतिशत से ज्यादा एथनॉल मिलाने की चर्चा के बीच खाद्य सुरक्षा, वाहनों की क्षमता और ईंधन की कीमत को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में आगे की नीति तय करने से पहले विशेषज्ञों की राय लेना जरूरी माना जा रहा है।
20 प्रतिशत से ज्यादा एथनॉल मिश्रण पर उठे सवाल
इस मामले की मौजूदा चर्चा की शुरुआत 27 अप्रैल 2026 को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी मसौदा अधिसूचना के बाद हुई। इसमें E85 यानी 85 प्रतिशत एथनॉल और E100 यानी लगभग पूरी तरह एथनॉल से चलने वाले वाहनों को सक्षम बनाने की बात कही गई थी। इसके बाद जून में सार्वजनिक तेल कंपनियों के 48 पेट्रोल पंपों पर E85 ईंधन की बिक्री शुरू की गई। इस फैसले के बाद एथनॉल मिश्रण को लेकर लोगों की चिंता और चर्चा दोनों बढ़ गई।
पहले E20 मिश्रण के कारण कुछ वाहनों के माइलेज पर असर पड़ने की खबरें सामने आई थीं। अप्रैल की अधिसूचना के बाद लोगों को आशंका हुई कि सरकार जल्द ही 20 प्रतिशत से अधिक मिश्रण की अनुमति दे सकती है। इससे उन वाहन मालिकों में भी चिंता बढ़ी, जिन्होंने मार्च 2023 के बाद अपने वाहन खरीदे थे। एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम शुरू होने के बाद वाहन मालिकों को बिना एथनॉल वाला पेट्रोल चुनने का विकल्प भी उपलब्ध नहीं रहा है। इसलिए सरकार की ओर से इस पूरी योजना और भविष्य की नीति के बारे में ज्यादा स्पष्ट जानकारी देने की जरूरत है।
चीनी उद्योग की समस्या से शुरू हुई थी एथनॉल योजना
एथनॉल मिश्रण योजना की शुरुआत चीनी मिलों पर गन्ना किसानों के बकाये की समस्या के बीच हुई थी। 2017-18 और 2018-19 में गन्ने और चीनी का उत्पादन काफी अधिक रहा था। इससे चीनी की कीमतों पर दबाव पड़ा और चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी। किसानों को गन्ने का भुगतान समय पर नहीं मिल रहा था। 2017-18 में गन्ने का बकाया 11,697 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।
इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए। इनमें पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण योजना, चीनी मिलों को वित्तीय सहायता, सॉफ्ट लोन, चीनी निर्यात को बढ़ावा और चीनी के लिए न्यूनतम बिक्री मूल्य तय करना शामिल था। गन्ने को एथनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने के लिए नई डिस्टिलरी लगाने पर ब्याज सहायता भी दी गई। इन कदमों से चीनी मिलों की नकदी की स्थिति में सुधार हुआ और किसानों का बकाया 2019-20 के 16.4 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 3.5 प्रतिशत रह गया।
एथनॉल उत्पादन क्षमता में हुआ बड़ा विस्तार
बाद में सहकारी चीनी मिलों के लिए अलग सहायता योजना लाई गई। इसके तहत मौजूदा डिस्टिलरी को ऐसे संयंत्रों में बदलने की सुविधा दी गई, जहां शीरे के साथ खाद्यान्न से भी एथनॉल बनाया जा सके। तेल कंपनियों और एथनॉल डिस्टिलरी के बीच लंबे समय के खरीद समझौतों ने भी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद की।
गन्ने पर आधारित डिस्टिलरी की एथनॉल उत्पादन क्षमता बढ़कर 8.38 अरब लीटर हो गई है। दिसंबर 2025 तक बैंकों ने नई गन्ना और अनाज आधारित डिस्टिलरी लगाने तथा मौजूदा संयंत्रों का विस्तार करने के लिए करीब 42,000 करोड़ रुपये के कर्ज को मंजूरी दी थी। देश में करीब 20 अरब लीटर एथनॉल उत्पादन क्षमता तैयार हो चुकी है, जबकि 20 प्रतिशत मिश्रण के लिए करीब 10 अरब लीटर की जरूरत है। औद्योगिक इस्तेमाल के लिए भी करीब 3 अरब लीटर की जरूरत होती है।
⛽ एथनॉल मिश्रण की बड़ी बातें
- E20 मिश्रण: पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक एथनॉल
- E85: 85 प्रतिशत एथनॉल वाला ईंधन
- E100: लगभग पूरी तरह एथनॉल वाला ईंधन
- उत्पादन क्षमता: करीब 20 अरब लीटर
- 20% मिश्रण की जरूरत: करीब 10 अरब लीटर
- औद्योगिक जरूरत: करीब 3 अरब लीटर
सरकारी भंडार में बढ़ा अतिरिक्त चावल
इसी बीच सरकारी भंडार में चावल का अतिरिक्त स्टॉक भी एक बड़ी समस्या बन गया है। सिंचाई क्षेत्र बढ़ने, तेलंगाना जैसे गैर-पारंपरिक राज्यों में धान उत्पादन बढ़ने और कई राज्यों में सरकारी खरीद की गारंटी के कारण चावल की खरीद लगातार अधिक रही। 1 जुलाई 2026 को केंद्रीय भंडार में चावल का स्टॉक 6.621 करोड़ टन था, जबकि तय बफर मानक करीब 1.354 करोड़ टन है। यानी भंडार तय जरूरत से पांच गुना से भी अधिक था।
सरकार इस अतिरिक्त चावल का कुछ हिस्सा एथनॉल बनाने वाली डिस्टिलरी को देती है। 2025-26 के एथनॉल आपूर्ति वर्ष में भारतीय खाद्य निगम के चावल की कीमत 2,320 रुपये प्रति क्विंटल रखी गई थी। आंकड़ों के अनुसार, 2023-24 में 8.96 लाख टन, 2024-25 में 2.36 लाख टन और 2025-26 में 52.22 लाख टन चावल एथनॉल उत्पादन के लिए जारी किया गया।
एथनॉल के कच्चे माल की कीमत भी अहम
एथनॉल बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमत भी महत्वपूर्ण है। मक्का से बनने वाले एथनॉल के लिए तेल कंपनियां 71.86 रुपये प्रति लीटर भुगतान करती हैं, जबकि भारतीय खाद्य निगम के चावल से बने एथनॉल की कीमत 60.32 रुपये प्रति लीटर है। C-heavy शीरे से बनने वाले एथनॉल की कीमत 57.97 रुपये प्रति लीटर है। B-heavy शीरे से यह 60.73 रुपये और गन्ने के रस, चीनी की चाशनी या चीनी से बने एथनॉल की कीमत 65.61 रुपये प्रति लीटर है।
🌾 आगे सरकार के सामने क्या विकल्प?
- अतिरिक्त चावल: सरकारी भंडार के अतिरिक्त स्टॉक का इस्तेमाल
- खाद्य सुरक्षा: सरकारी भंडार की जरूरत को ध्यान में रखना
- गन्ना: एथनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल पर नियंत्रण
- फसल नीति: प्रोटीन वाली फसलों और तिलहन को बढ़ावा
- विशेषज्ञ समिति: 20 प्रतिशत से ज्यादा मिश्रण से पहले व्यापक अध्ययन
- मुख्य मुद्दे: वाहन, कीमत, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण
20 प्रतिशत से ज्यादा मिश्रण से पहले विशेषज्ञों की राय जरूरी
आगे सरकार के सामने अतिरिक्त चावल के इस्तेमाल का सवाल भी रहेगा। अगर चावल की सरकारी खरीद इसी स्तर पर जारी रहती है, तो बाली समझौते के तहत खाद्य सुरक्षा के लिए रखे गए सरकारी भंडार के चावल के निर्यात से जुड़ी छूट मांगने पर विचार किया जा सकता है। इसके अलावा अंत्योदय परिवारों के लिए चावल का आवंटन मौजूदा प्रस्तावित मात्रा से बढ़ाने का विकल्प भी देखा जा सकता है।
चीनी के अगले वर्ष में गन्ने को एथनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने की मात्रा पर भी नियंत्रण संभव है। इससे अतिरिक्त एथनॉल उत्पादन को कम करने में मदद मिल सकती है। लंबे समय में चावल, मक्का और गन्ने का उत्पादन बढ़ाने के बजाय प्रोटीन वाली फसलों और तिलहन को बढ़ावा देने पर अधिक ध्यान देने की जरूरत बताई जा रही है।
20 प्रतिशत से ज्यादा एथनॉल मिश्रण को लागू करने से पहले स्वतंत्र विशेषज्ञों की एक समिति बनाकर इसका व्यापक अध्ययन किया जाना चाहिए। इस समिति को खाद्य सुरक्षा, धान किसानों से जुड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रभाव, ज्यादा एथनॉल वाले ईंधन के लिए वाहनों की तैयारी और अलग-अलग मिश्रण वाले पेट्रोल की कीमत जैसे मुद्दों की जांच करनी चाहिए। इससे आगे की नीति लोगों, किसानों, वाहन मालिकों और उद्योग सभी के हितों को ध्यान में रखकर तय करने में मदद मिल सकती है।
Disclaimer: यह जानकारी समाचार उद्देश्य के लिए है और भविष्य की एथनॉल नीति पर अंतिम सरकारी निर्णय का संकेत नहीं है।

