Global Gold Demand: दुनिया में सोने की मांग का नया आंकड़ा

दुनिया में सोने की मांग को लेकर 3 नवंबर 2026 को जारी नई रिपोर्ट ने बाजार की तस्वीर साफ की है। World Gold Council के अनुसार जुलाई से सितंबर की तीसरी तिमाही में कुल वैश्विक मांग 1,369 टन रही, जो पिछले साल की इसी अवधि से करीब 1 प्रतिशत कम है। इसके बावजूद सोने पर खर्च की कुल रकम बढ़ी है, क्योंकि इस दौरान कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर बनी रहीं। इसका मतलब है कि लोगों और संस्थाओं ने कुछ कम मात्रा में सोना खरीदा, लेकिन उस पर पहले से अधिक पैसा खर्च किया।

वैश्विक मांग और खर्च में क्या अंतर दिखा?

रिपोर्ट के मुताबिक तीसरी तिमाही में मांग का कुल मूल्य 188 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जो सालाना आधार पर 22 प्रतिशत अधिक है। जनवरी से सितंबर तक दुनिया में सोने की कुल मांग 3,881 टन रही। यह 2025 के इसी समय के रिकॉर्ड 3,884 टन के लगभग बराबर है। मूल्य के आधार पर पहले नौ महीनों की मांग 566 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। ये आंकड़े बताते हैं कि मात्रा में थोड़ी कमी के बावजूद सोना वैश्विक वित्तीय व्यवस्था और बचत में अहम बना हुआ है।

इस बदलाव की एक बड़ी वजह कीमत है। तीसरी तिमाही में अंतरराष्ट्रीय सोने का औसत भाव 4,262 डॉलर प्रति औंस रहा, जो एक साल पहले के मुकाबले 23 प्रतिशत अधिक था। जब किसी वस्तु की कीमत तेजी से बढ़ती है तो खरीदार अक्सर मात्रा कम कर देते हैं। लेकिन जिन निवेशकों या संस्थाओं को सुरक्षा और बचत के लिए सोना जरूरी लगता है, वे ऊंची कीमत के बावजूद खरीद जारी रख सकते हैं। यही कारण है कि कुल खर्च बढ़ा, जबकि कुल वजन थोड़ा घटा।

सोने की मांग के मुख्य आंकड़े

  • तीसरी तिमाही की कुल मांग: 1,369 टन
  • सालाना बदलाव: 1 प्रतिशत की कमी
  • तीसरी तिमाही का कुल मूल्य: 188 अरब डॉलर
  • पहले नौ महीनों की मांग: 3,881 टन
  • औसत अंतरराष्ट्रीय भाव: 4,262 डॉलर प्रति औंस

मांग को किन क्षेत्रों ने सहारा दिया?

मांग के अलग-अलग हिस्सों में रुझान एक जैसा नहीं रहा। केंद्रीय बैंकों ने बड़ी मात्रा में सोना खरीदा और निवेश से जुड़े फंड में भी पैसा वापस आया। दूसरी ओर गहनों तथा सिक्कों और छड़ों की खरीद में पिछले साल के मुकाबले कमजोरी रही। इससे पता चलता है कि सोने की मांग केवल शादी या त्योहारों पर होने वाली खरीद से तय नहीं होती। बड़े वित्तीय संस्थान, सरकारें, निवेशक और तकनीकी उद्योग भी इसकी कुल मांग को प्रभावित करते हैं।

केंद्रीय बैंकों की खरीद तीसरी तिमाही में 321 टन रही। यह पिछले साल की समान अवधि से 42 प्रतिशत अधिक है। जनवरी से सितंबर तक इनकी कुल खरीद 675 टन पहुंच गई। कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में अलग-अलग संपत्तियों का संतुलन बनाए रखने के लिए सोना रखते हैं। किसी एक मुद्रा या निवेश पर बहुत अधिक निर्भरता कम करना इसका एक कारण हो सकता है। हालांकि हर देश की खरीद का फैसला उसकी आर्थिक नीति और जरूरतों पर निर्भर करता है।

सोने से जुड़े निवेश फंड में भी तीसरी तिमाही के दौरान 211 टन की शुद्ध आवक दर्ज हुई। इससे पहले दूसरी तिमाही में इन फंडों से पैसा निकला था। निवेशकों की वापसी के पीछे महंगाई, सरकारी कर्ज और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में तनाव को लेकर चिंता जैसे कारण बताए गए हैं। फिर भी फंड में पैसा आने का अर्थ यह नहीं है कि सोने की कीमत आगे भी निश्चित रूप से बढ़ेगी। ब्याज दर, डॉलर, शेयर बाजार और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता भाव को बदल सकती है।

गहनों की मांग में 17 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 313 टन रही। ऊंची कीमतों के कारण कई ग्राहक हल्के वजन या कम शुद्धता वाले आभूषणों की ओर जा रहे हैं। इसके बावजूद गहनों पर कुल खर्च थोड़ा बढ़ा और 43 अरब डॉलर के आसपास रहा। यह अंतर भारतीय परिवारों के लिए भी समझने योग्य है। जब सोना महंगा होता है तो परिवार समान बजट में पहले जितना वजन नहीं खरीद पाते, लेकिन शादी या पारिवारिक जरूरत के कारण खरीद पूरी तरह बंद भी नहीं करते।

भारत के खरीदारों और कारोबार पर असर

भारत दुनिया के बड़े सोना उपभोक्ता देशों में है। अंतरराष्ट्रीय भाव में बदलाव का असर आयात लागत, घरेलू बाजार और आभूषणों के खुदरा भाव पर पड़ सकता है। हालांकि भारत में अंतिम कीमत केवल विदेशी बाजार से तय नहीं होती। रुपये की चाल, आयात शुल्क, स्थानीय मांग, कर और दुकानदार के शुल्क भी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट देखकर सीधे यह अनुमान नहीं लगाना चाहिए कि अगले दिन आपके शहर में सोना कितने रुपये सस्ता या महंगा होगा।

ग्राहक के लिए बेहतर तरीका यह है कि खरीदारी से पहले अपने शहर का ताजा भाव देखें और अलग-अलग दुकानों से कुल बिल की तुलना करें। केवल प्रति दस ग्राम का भाव जानना पर्याप्त नहीं है। गहने की शुद्धता, हॉलमार्क, वजन, बनाने का शुल्क और बिल में शामिल कर भी जांचें। यदि खरीद निवेश के लिए है तो आभूषण, सिक्का और अन्य निवेश विकल्पों के खर्च तथा बेचने की शर्तों को अलग-अलग समझें।

इस रिपोर्ट का एक और संदेश यह है कि सोने की मांग को एक ही खबर से नहीं समझा जा सकता। यदि केंद्रीय बैंक खरीद रहे हों लेकिन परिवार महंगे गहने कम खरीद रहे हों, तो कुल मांग पर दोनों का अलग असर पड़ता है। इसी तरह निवेश फंड में पैसा आने के बावजूद सिक्कों और छड़ों की खरीद कमजोर रह सकती है। इसलिए निवेशक को कुल आंकड़े के साथ उसके अलग-अलग हिस्से भी देखने चाहिए।

खरीदारी से पहले ध्यान रखें

  • अपने शहर का ताजा भाव जांचें।
  • हॉलमार्क और शुद्धता की पुष्टि करें।
  • मेकिंग चार्ज और कर सहित पूरा बिल देखें।
  • निवेश से पहले जोखिम और बेचने की शर्तें समझें।

रिपोर्ट और उसके आंकड़े World Gold Council की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। पाठक मूल विवरण यहां पढ़ सकते हैं: आधिकारिक रिपोर्ट देखें।

सोने के सिक्के या छोटी कीमती वस्तुएं रखने वालों के लिए अलग-अलग खानों वाला सुरक्षित डिब्बा उपयोगी हो सकता है। इससे सिक्कों पर खरोंच लगने और उनके खोने का जोखिम कम किया जा सकता है। खरीदने से पहले आकार, अंदर की परत और बंद होने की गुणवत्ता देख लें। सोने के सिक्कों का स्टोरेज बॉक्स Amazon पर देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. तीसरी तिमाही में दुनिया की कुल सोने की मांग कितनी रही?

World Gold Council के अनुसार जुलाई से सितंबर 2026 के बीच कुल मांग 1,369 टन रही। यह पिछले साल की समान तिमाही से लगभग एक प्रतिशत कम थी, जबकि सोने पर खर्च की कुल रकम बढ़ी।

2. सोने पर कुल खर्च बढ़ने का कारण क्या था?

इस अवधि में सोने का औसत अंतरराष्ट्रीय भाव पिछले साल से काफी ऊंचा रहा। इसलिए खरीदारों ने वजन के हिसाब से थोड़ी कम मात्रा ली, लेकिन उस खरीद पर अधिक पैसा खर्च किया।

3. क्या रिपोर्ट के आंकड़े भारत के खुदरा भाव बताते हैं?

नहीं, यह वैश्विक मांग और बाजार का अध्ययन है। भारत में ग्राहकों को अपने शहर का भाव, रुपये की स्थिति, आयात शुल्क, कर और जौहरी के शुल्क देखकर अंतिम कीमत समझनी चाहिए।

4. क्या सोने की मांग घटने से कीमत भी घटेगी?

जरूरी नहीं। कीमत पर निवेश, केंद्रीय बैंकों की खरीद, डॉलर, ब्याज दर, भू-राजनीतिक घटनाएं और आपूर्ति का असर पड़ता है। केवल एक तिमाही की मांग देखकर भाव का निश्चित अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

5. सोना खरीदते समय ग्राहक को क्या जांचना चाहिए?

ग्राहक को हॉलमार्क, कैरेट, सही वजन, बनाने का शुल्क, कर और पक्का बिल देखना चाहिए। निवेश के लिए खरीद रहे हों तो बेचने की शर्तें और खरीद-बिक्री के बीच का अंतर भी समझें।

निष्कर्ष: तीसरी तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि ऊंची कीमतों के बावजूद सोना वैश्विक बचत और निवेश में महत्वपूर्ण है। लेकिन अलग-अलग क्षेत्रों की मांग कमजोर और मजबूत दोनों रही। इसलिए खरीद या निवेश से पहले पूरी जानकारी लेना जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रिपोर्टों पर आधारित है। सोने की कीमत बदलती रहती है। निवेश या खरीद का निर्णय अपनी जरूरत और जोखिम समझकर लें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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