सोने की ऊंची कीमतों का असर अब दुनिया भर में गहनों की खरीद पर साफ दिखाई दे रहा है। World Gold Council की 3 नवंबर 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार जुलाई से सितंबर के बीच वैश्विक स्तर पर सोने के गहनों की मांग 313 टन रही। यह पिछले साल की इसी तिमाही से 17 प्रतिशत कम है और परिषद के उपलब्ध आंकड़ों में तीसरी तिमाही का सबसे कमजोर स्तर बताया गया है। हालांकि गहनों पर खर्च की कुल रकम करीब 43 अरब डॉलर रही, जो सालाना आधार पर थोड़ी अधिक है। इसका अर्थ है कि लोग कम वजन खरीद रहे हैं, लेकिन ऊंचे भाव के कारण खर्च कम नहीं हुआ।
गहनों की खरीद में गिरावट क्यों आई?
सोना महंगा होने पर परिवार अपने बजट के अनुसार खरीदारी बदलते हैं। पहले जो ग्राहक तय वजन का हार या चेन खरीदना चाहते थे, वे अब हल्के डिजाइन देख सकते हैं। कुछ खरीदार कम कैरेट वाले आभूषण चुनते हैं, जबकि कुछ खरीदारी को आगे के लिए टाल देते हैं। शादी और त्योहार जैसे अवसरों पर जरूरत बनी रहती है, लेकिन ऊंची कीमत समान बजट में मिलने वाले सोने का वजन घटा देती है।
रिपोर्ट में बताया गया कि तीसरी तिमाही में सोने का औसत अंतरराष्ट्रीय भाव 4,262 डॉलर प्रति औंस रहा। यह पिछले साल के मुकाबले 23 प्रतिशत अधिक था। कीमत में इतनी बढ़ोतरी का असर केवल निवेशकों पर नहीं पड़ता, बल्कि उन परिवारों पर भी पड़ता है जो गहनों को सांस्कृतिक, पारिवारिक और सामाजिक जरूरत के रूप में खरीदते हैं। इसीलिए कुल वजन में गिरावट के बावजूद गहनों पर खर्च की रकम ऊंची बनी रही।
दुनिया के कई बाजारों में ग्राहकों की पसंद हल्के और कम शुद्धता वाले गहनों की ओर बढ़ी है। इसका मतलब यह नहीं कि हर ग्राहक कम शुद्धता वाला आभूषण चुनेगा। खरीद का फैसला देश, परिवार की परंपरा, बजट, डिजाइन और भविष्य में बेचने या बदलने की योजना के आधार पर होता है। खरीदार को शुद्धता और हॉलमार्क की जानकारी समझकर ही कोई विकल्प चुनना चाहिए।
गहनों की मांग के आंकड़े
- वैश्विक मांग: 313 टन
- सालाना गिरावट: 17 प्रतिशत
- तीसरी तिमाही का खर्च: करीब 43 अरब डॉलर
- औसत अंतरराष्ट्रीय भाव: 4,262 डॉलर प्रति औंस
- ग्राहकों का रुझान: हल्के और कम कैरेट वाले डिजाइन
भारत के ज्वेलरी बाजार पर क्या असर हो सकता है?
भारत में गहनों की खरीद शादी, त्योहार और पारिवारिक कार्यक्रमों से जुड़ी होती है। इसलिए वैश्विक मांग में गिरावट का मतलब यह नहीं कि भारत में हर दुकान पर बिक्री समान रूप से घट जाएगी। स्थानीय त्योहारों का समय, शादी का मौसम, ग्रामीण आय, शहरों की मांग और घरेलू कीमतें अलग असर डाल सकती हैं। World Gold Council की भारत संबंधी रिपोर्ट भी बताती है कि तीसरी तिमाही में देश में गहनों की मांग पिछली तिमाही से बढ़ी, लेकिन पिछले साल की तुलना में कमजोर रही।
त्योहार और शादी के मौसम में कुछ परिवार पहले से तय खरीदारी करते हैं। वे गहनों का वजन कम कर सकते हैं, पुराने गहने बदल सकते हैं या डिजाइन में बदलाव कर सकते हैं। ज्वेलर्स भी हल्के डिजाइन और अलग बजट के विकल्प दिखा सकते हैं। लेकिन ग्राहकों को केवल कम वजन देखकर निर्णय नहीं लेना चाहिए। शुद्धता, पत्थरों का वजन, बनाने का शुल्क और वापस बेचने की शर्तें भी पूछनी चाहिए।
गहने खरीदते समय बिल में सोने का शुद्ध वजन और कैरेट स्पष्ट होना चाहिए। यदि आभूषण में पत्थर लगे हैं तो उनका वजन अलग से दर्ज होना चाहिए। हॉलमार्क की जांच करें और दुकान से खरीद का पक्का बिल लें। केवल विज्ञापन में लिखी छूट पर भरोसा न करें। कई बार बनाने के शुल्क या दूसरे खर्च कुल बिल को बदल देते हैं। इसलिए दो दुकानों के बिल की तुलना करना उपयोगी रहता है।
कम वजन खरीदने का मतलब हमेशा कम खर्च नहीं
यदि सोने का भाव बढ़ा हुआ है तो हल्के गहने का कुल बिल भी परिवार के बजट से अधिक हो सकता है। इसलिए खरीदारी से पहले अधिकतम बजट तय करना और अलग-अलग डिजाइन देखना बेहतर है। कुछ ग्राहक पुराने सोने को बदलकर नया गहना लेते हैं। ऐसे में पुराने सोने की जांच, कटौती और नई खरीद के शुल्क की जानकारी लिखित बिल में देखना जरूरी है।
गहने लंबे समय तक इस्तेमाल किए जाते हैं, इसलिए डिजाइन और मजबूती भी मायने रखते हैं। बहुत पतली चेन या नाजुक कंगन रोजाना इस्तेमाल में जल्दी मुड़ सकते हैं। ग्राहक को केवल दिखावट नहीं, बल्कि जोड़, ताला और वजन का संतुलन भी देखना चाहिए। यदि गहने में कीमती पत्थर लगे हों तो उनकी गुणवत्ता और प्रमाणपत्र के बारे में पूछें।
ज्वेलरी कारोबार के लिए मांग में गिरावट एक चुनौती हो सकती है। दुकानों को अलग-अलग बजट वाले ग्राहकों की जरूरत समझनी होगी। हल्के डिजाइन, पुराने गहने बदलने की पारदर्शी सुविधा और सही बिलिंग से ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने में मदद मिल सकती है। दूसरी ओर, ग्राहकों को भी जल्दबाजी में खरीदने के बजाय भाव और शुल्क की तुलना करनी चाहिए।
गहने खरीदने की जरूरी जांच
- हॉलमार्क और कैरेट की पुष्टि करें।
- पत्थरों और सोने का वजन अलग देखें।
- मेकिंग चार्ज और कर सहित बिल लें।
- पुराने गहने बदलने पर कटौती पूछें।
रिपोर्ट का पूरा विवरण यहां पढ़ें: World Gold Council की आधिकारिक रिपोर्ट। गहनों को अलग-अलग रखने और उलझने से बचाने के लिए ज्वेलरी ऑर्गनाइजर बॉक्स Amazon पर देखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. तीसरी तिमाही में गहनों की वैश्विक मांग कितनी रही?
जुलाई से सितंबर 2026 के बीच वैश्विक सोने के गहनों की मांग 313 टन रही। World Gold Council के अनुसार यह पिछले साल की समान तिमाही से 17 प्रतिशत कम थी और रिकॉर्ड में कमजोर तीसरी तिमाही रही।
2. ऊंची कीमत से गहनों की खरीद कैसे प्रभावित होती है?
कीमत बढ़ने पर समान बजट में कम वजन मिलता है। इसलिए कुछ परिवार खरीद टालते हैं, हल्के डिजाइन चुनते हैं या कम वजन के गहने खरीदते हैं। इससे कुल मांग के वजन में गिरावट आ सकती है।
3. क्या भारत में भी गहनों की मांग कम हुई?
भारत में तीसरी तिमाही में पिछली तिमाही के मुकाबले खरीद में सुधार दिखा, लेकिन पिछले साल की समान अवधि से मांग कम रही। त्योहार, शादी और स्थानीय कीमतें भारतीय बाजार को प्रभावित करती हैं।
4. हल्के गहने खरीदते समय क्या देखना चाहिए?
ग्राहक को कैरेट, हॉलमार्क, वजन, जोड़ और ताले की मजबूती देखनी चाहिए। पत्थर लगे हों तो उनका वजन अलग लिखवाएं। मेकिंग चार्ज और कर सहित पूरा बिल लेकर ही भुगतान करें।
5. पुराने गहने बदलते समय क्या सावधानी रखें?
पुराने सोने की शुद्धता और वजन की जांच अपने सामने करवाएं। जौहरी से कटौती, पिघलाने या जांच शुल्क और नए गहने के बनाने का शुल्क स्पष्ट पूछें। पूरी गणना बिल में लिखवाना बेहतर है।
निष्कर्ष: ऊंची कीमतों ने दुनिया भर में गहनों की खरीद का तरीका बदला है। परिवार हल्के डिजाइन और सीमित बजट चुन रहे हैं। खरीदारी में शुद्धता, बिल और कुल लागत को प्राथमिकता देना समझदारी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रिपोर्ट पर आधारित है। स्थानीय भाव और दुकान के शुल्क अलग हो सकते हैं। खरीद से पहले अपने जौहरी से जानकारी जांचें।