फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमले शुरू होने के बाद दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई थी। उस समय विशेषज्ञों ने आशंका जताई थी कि तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ। इसके बावजूद ऊर्जा बाजार में संकट खत्म नहीं हुआ है। अब इसका असर केवल तेल की कीमतों तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि समुद्री परिवहन भी इसकी चपेट में आ गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तकनीक से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी के बीच यह समस्या धीरे-धीरे गंभीर होती जा रही है। ऊर्जा कारोबार से जुड़ी कंपनी विटोल के प्रमुख रसेल हार्डी के अनुसार, शुरुआत में यह कच्चे तेल का संकट था, फिर पेट्रोल और विमान ईंधन जैसे उत्पादों की कमी की चिंता बढ़ी और अब यह जहाजों से माल ढुलाई की बड़ी समस्या बन गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा समुद्री परिवहन का जोखिम
इस संकट का सबसे अधिक असर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर दिखाई दे रहा है। यह समुद्री रास्ता पश्चिम एशिया से कच्चे तेल और गैस को दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। संघर्ष बढ़ने के बाद ईरान की ओर से व्यापारिक जहाजों पर हमलों की घटनाओं ने समुद्री यात्रा को अधिक जोखिम भरा बना दिया है। इन हमलों में कई नाविकों की जान भी गई है। जहाजों और उनके कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता के कारण माल ढुलाई का खर्च तेजी से बढ़ा है। क्लार्कसन्स रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया से भारत के पश्चिमी तट तक एक हजार बैरल कच्चे तेल को समुद्र के रास्ते पहुंचाने की औसत लागत वर्ष 2022 से 2025 के बीच लगभग 0.5 से 0.6 डॉलर प्रति मील थी। जून 2026 में यह बढ़कर 3.4 डॉलर और अगस्त में लगभग 5.1 डॉलर प्रति मील हो गई। यानी सामान्य स्तर की तुलना में खर्च करीब आठ से दस गुना बढ़ गया।
मुख्य बात: होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षा से जुड़ा जोखिम बढ़ने पर तेल की आपूर्ति के साथ-साथ उसके परिवहन की लागत भी बढ़ जाती है। इसका असर ऊर्जा कारोबार और वैश्विक व्यापार दोनों पर पड़ सकता है।
तेलवाहक जहाजों के मालिकों की कमाई में बढ़ोतरी
जहाजों से तेल ढोने की लागत बढ़ने का फायदा जहाज मालिकों को मिल रहा है। पश्चिम एशिया से चीन तक बहुत बड़े तेलवाहक जहाजों के जरिए कच्चा तेल पहुंचाने पर मिलने वाली दैनिक सकल कमाई लगभग 12 लाख डॉलर तक पहुंच गई है। अगस्त की शुरुआत में यह करीब 4.8 लाख डॉलर प्रतिदिन थी। हालांकि, बीमा, कर्मचारियों को अतिरिक्त भुगतान और अन्य खर्च घटाने के बाद वास्तविक कमाई इससे कम रहती है। दूसरी ओर, अधिक कमाई की संभावना जहाज मालिकों को ज्यादा जोखिम उठाने के लिए भी प्रेरित कर सकती है। कुछ तेलवाहक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय अपनी पहचान और स्थिति बताने वाले संकेतक बंद कर देते हैं तथा अंधेरे में यात्रा करते हैं। इसके बाद वे ओमान की खाड़ी में दूसरे जहाजों को तेल सौंपते हैं। वहां से दूसरा जहाज तेल को भारत या चीन जैसे अंतिम बाजारों तक पहुंचाता है।
जोखिम के साथ बढ़ रही परिवहन लागत
समुद्री परिवहन में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बढ़ने पर जहाजों के बीमा, कर्मचारियों और परिचालन से जुड़े खर्च भी बढ़ सकते हैं। ऐसे में माल ढुलाई की अधिक दरों से मिलने वाली अतिरिक्त कमाई का पूरा लाभ जहाज मालिकों को नहीं मिलता। जोखिम भरे समुद्री मार्गों पर जहाजों की आवाजाही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए भी चिंता का विषय बनी रहती है।
कंटेनर जहाजों की ढुलाई भी हुई महंगी
समुद्री परिवहन की बढ़ती लागत का असर केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं है। डिब्बों में सामान ले जाने वाले जहाजों का खर्च भी बढ़ा है। फ्रेटोस बाल्टिक सूचकांक के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद ऐसे जहाजों से माल ढुलाई की लागत में लगभग 73 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हालांकि, यह बढ़ोतरी कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2020 और 2021 में देखी गई तेजी से कम है, फिर भी कारोबारियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की कीमत बढ़ना इसका एक प्रमुख कारण है। इसके अलावा, लाल सागर में हूती विद्रोहियों के हमलों के कारण कई जहाज लंबे समय से स्वेज नहर के रास्ते से बचते रहे हैं। इसके बजाय वे अफ्रीका के दक्षिणी छोर पर स्थित केप ऑफ गुड होप से होकर यूरोप पहुंचते हैं। लंबे रास्ते के कारण यात्रा में अधिक समय और ईंधन खर्च होता है। हाल के सप्ताहों में स्वेज नहर से जहाजों की आवाजाही बढ़ने के संकेत भी मिले हैं, लेकिन इससे पूरी समस्या समाप्त नहीं हुई है।
व्यापार पर असर: समुद्री मार्ग बदलने से जहाजों को अधिक दूरी तय करनी पड़ सकती है। इससे ईंधन की खपत, यात्रा का समय और माल ढुलाई का खर्च बढ़ता है, जिसका बोझ अंततः आयातकों, निर्यातकों और उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।
लौह अयस्क और खाद्यान्न की ढुलाई पर भी दबाव
लोहे के अयस्क और खाद्यान्न जैसे सामानों को ढोने वाले जहाज भी इस स्थिति से प्रभावित हुए हैं। बाल्टिक ड्राई सूचकांक के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद ऐसे माल की समुद्री ढुलाई की लागत में लगभग 49 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। हालांकि, इसके पीछे केवल अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष जिम्मेदार नहीं है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने भी अनाज की आपूर्ति को प्रभावित किया है। दोनों देश अनाज के बड़े निर्यातक हैं और उनके बीच संघर्ष के कारण बंदरगाहों तथा व्यापारिक ढांचे को नुकसान पहुंचने से अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है।
तेल निर्यात बढ़ने के बावजूद संकट बरकरार
व्यापार संबंधी आंकड़े जुटाने वाली कंपनी केप्लर के अनुसार, हाल के सप्ताहों में होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल का निर्यात बढ़ा है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि बाजार की स्थिति सामान्य हो गई है। जहाजों पर हमलों का खतरा बना रहने के कारण माल ढुलाई की लागत ऊंची बनी हुई है। इससे पता चलता है कि तेल की भौतिक आपूर्ति में सुधार होने के बावजूद सुरक्षित परिवहन के लिए अधिक खर्च करना पड़ रहा है। यदि संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है, तो कारोबारियों और उपभोक्ताओं पर इसका असर बना रह सकता है।
समुद्री व्यापार और वैश्विक आपूर्ति से जुड़े आंकड़ों के लिए संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास संगठन (UNCTAD) की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है।
नए जहाजों के निर्माण में बढ़ा निवेश
बढ़ती माल ढुलाई लागत से जहाज मालिकों की कमाई में वृद्धि हुई है, जिससे नए जहाजों के निर्माण में निवेश करने की प्रेरणा मिल रही है। संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास संगठन के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में जहाजों के निर्माण की मात्रा कम से कम वर्ष 2014 के बाद सबसे अधिक रही। वैश्विक स्तर पर नए जहाज बनाने के कारोबार में चीन और दक्षिण कोरिया की बड़ी हिस्सेदारी है। पिछले तीन वर्षों में दुनिया की नई जहाज निर्माण क्षमता में इन दोनों देशों का योगदान लगभग 80 प्रतिशत रहा है। वर्ष 2026 की शुरुआत में वैश्विक जहाज निर्माण के लिए दिए गए नए ऑर्डर भी 17 वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गए थे। इससे संकेत मिलता है कि समुद्री परिवहन कंपनियां भविष्य में अधिक जहाजों की जरूरत को देखते हुए अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं।
वैश्विक व्यापार पर लंबे समय तक पड़ सकता है असर
कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने तेल की आपूर्ति के साथ-साथ वैश्विक व्यापार की लागत को भी प्रभावित किया है। जहाजों की सुरक्षा, महंगे ईंधन और लंबे समुद्री रास्तों के कारण माल पहुंचाना पहले से अधिक खर्चीला हो गया है। यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव कम नहीं होता, तो ऊंची ढुलाई लागत लंबे समय तक बनी रह सकती है। इसका असर कारोबारियों की लागत, वस्तुओं की कीमतों और दुनिया भर में होने वाले व्यापार पर पड़ सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक व्यापार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
होर्मुज जलडमरूमध्य पश्चिम एशिया से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए एक प्रमुख समुद्री मार्ग है। यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने या जोखिम बढ़ने से ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई प्रभावित हो सकती है।
2. समुद्री माल ढुलाई की लागत क्यों बढ़ रही है?
जहाजों पर हमलों का खतरा, बीमा और सुरक्षा से जुड़े अतिरिक्त खर्च, महंगा ईंधन तथा लंबे वैकल्पिक समुद्री रास्ते माल ढुलाई की लागत बढ़ा सकते हैं। इन कारणों से ऊर्जा उत्पादों के अलावा दूसरे सामानों का परिवहन भी महंगा हो सकता है।
3. समुद्री परिवहन महंगा होने का असर आम लोगों पर कैसे पड़ता है?
जब आयात और निर्यात का खर्च बढ़ता है, तो कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है। इसका कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं तक पहुंचने पर ईंधन, खाद्य पदार्थों, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।
4. तेल निर्यात बढ़ने पर भी संकट क्यों बना रह सकता है?
तेल का निर्यात बढ़ना आपूर्ति में सुधार का संकेत हो सकता है, लेकिन इससे जहाजों की सुरक्षा और परिवहन लागत से जुड़ी समस्याएं अपने आप समाप्त नहीं होतीं। सुरक्षित मार्ग और स्थिर परिचालन उपलब्ध होने तक ढुलाई महंगी रह सकती है।
5. जहाजों के निर्माण में निवेश क्यों बढ़ रहा है?
माल ढुलाई की ऊंची दरें जहाज मालिकों को अधिक कमाई का अवसर दे सकती हैं। भविष्य में परिवहन की मांग बढ़ने और बेड़े की क्षमता बढ़ाने की उम्मीद में कंपनियां नए जहाजों के निर्माण के ऑर्डर दे सकती हैं।
निष्कर्ष
पश्चिम एशिया का संघर्ष दिखाता है कि वैश्विक ऊर्जा संकट केवल कच्चे तेल की कीमतों तक सीमित नहीं रहता। समुद्री मार्गों की सुरक्षा, ईंधन की लागत और जहाजों की उपलब्धता भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करती है। हालात सामान्य होने तक कारोबारियों और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त लागत का दबाव बना रह सकता है।
अस्वीकरण
यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दिए गए आंकड़ों और अनुमानों की नवीनतम आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि करें।

