पिछले लेख में हमने चर्चा की थी कि भारत के कई सफल नए कारोबारों ने नियमों से जुड़ी चुनौतियों से बचने के लिए सिंगापुर, अमेरिका और दूसरे देशों में अपना मुख्यालय बनाया था।
लेकिन अब यह रुझान बदलता दिखाई दे रहा है। फोनपे, ग्रो, जेप्टो, पाइन लैब्स और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियां वापस भारत आ चुकी हैं या अपनी वापसी की प्रक्रिया में हैं। इस बदलाव के लिए कंपनियों को काफी समय, मेहनत और पैसा खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर ये कंपनियां भारत लौटने का फैसला क्यों कर रही हैं?
भारतीय शेयर बाजारों में बढ़ता भरोसा
इसका सबसे बड़ा कारण भारत के शेयर बाजारों में बढ़ता भरोसा है। लगभग दस साल पहले भारत की कई नई कंपनियां अपने शेयर पहली बार बेचने के लिए अमेरिका के बाजारों की ओर देखती थीं। उन्हें लगता था कि वहां निवेश जुटाने और कारोबार का मूल्य बढ़ाने के बेहतर अवसर मिलेंगे। लेकिन अब भारत के बाजारों में भी तकनीक आधारित कारोबारों के प्रति निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। जोमैटो, नायका, पॉलिसीबाजार, फर्स्टक्राई, मामाअर्थ और स्विगी जैसी कंपनियों ने दिखाया है कि भारतीय निवेशक नए कारोबारी विचारों में पैसा लगाने के लिए तैयार हैं। इसके लिए जरूरी नहीं कि कंपनी पहले से ही अच्छा मुनाफा कमा रही हो।
मुख्य बात: भारत में तकनीक आधारित कंपनियों के लिए निवेश जुटाने के अवसर बढ़े हैं। इससे कुछ कंपनियों को विदेश में बने अपने कारोबारी ढांचे को भारत में स्थानांतरित करने का व्यावसायिक आधार मिल रहा है।
भारतीय निवेशकों को समझाना क्यों है आसान?
जिन कंपनियों के ग्राहक, कमाई और कारोबार का बड़ा हिस्सा भारत में है, उनके लिए देश के भीतर शेयर बाजार में उतरना अधिक सुविधाजनक हो सकता है। भारतीय निवेशक यहां के कारोबार और ग्राहकों की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझते हैं। उदाहरण के लिए, यूपीआई, ऑनलाइन खरीदारी और भारत में बढ़ती उपभोक्ता मांग पर आधारित किसी कंपनी के कामकाज को घरेलू निवेशकों के सामने समझाना आसान हो सकता है। इसके विपरीत, दूसरे देशों में बैठे निवेशकों को भारतीय बाजार की विशेषताओं को समझने में अधिक समय लग सकता है। स्थानीय बाजार की जानकारी से कंपनियों के मूल्य का सही आकलन करने में भी मदद मिल सकती है। इसके अलावा, भारत में बड़े निजी निवेशकों और संस्थागत निवेशकों की संख्या बढ़ी है। अब वे तकनीक से जुड़े कारोबारों में निवेश करने को पहले की तुलना में अधिक तैयार हैं।
आईपीओ के लिए घरेलू बाजार की अहमियत
जब किसी कंपनी के कारोबार का बड़ा हिस्सा भारत में होता है, तो घरेलू शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से उसे अपने ग्राहकों और निवेशकों के करीब रहने का अवसर मिल सकता है। भारतीय बाजार में सूचीबद्धता से कंपनी को स्थानीय निवेशकों तक पहुंच बनाने और भविष्य में पूंजी जुटाने के विकल्प मिल सकते हैं। हालांकि, वास्तविक लाभ कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, मूल्यांकन और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
सरकारी नियमों में बदलाव से मिली मदद
सरकार की ओर से किए गए कुछ नियमों में बदलावों ने भी इस प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद की है। दूसरे देशों में बनी कंपनियों को भारतीय कंपनियों में मिलाने से जुड़े नियमों में सुधार हुआ है। साथ ही, एंजल टैक्स हटाने और नए कारोबारों को प्रोत्साहन देने वाले कदमों से निवेश का माहौल बेहतर बनाने की कोशिश की गई है। सितंबर 2024 में सरकार ने कुछ पात्र विदेशी मूल कंपनियों को उनकी पूर्ण स्वामित्व वाली भारतीय सहायक कंपनियों में मिलाने के लिए एक सरल प्रक्रिया भी शुरू की थी। ऐसे मामलों में राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण की मंजूरी लेने की जरूरत समाप्त कर दी गई। इससे संबंधित कंपनियों के लिए पुनर्गठन की प्रक्रिया कुछ आसान हो सकती है।
नियमों का महत्व: कंपनी के पुनर्गठन से जुड़े नियमों में स्पष्टता और सरलता होने पर समय तथा अनुपालन की लागत कम हो सकती है। हालांकि, हर कंपनी की वापसी पर एक जैसे नियम लागू नहीं होते और प्रक्रिया उसकी संरचना तथा संबंधित कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करती है।
विदेश से भारत लौटने में क्या हैं चुनौतियां?
हालांकि, विदेश से भारत में कारोबार वापस लाना आसान या सस्ता काम नहीं है। इस प्रक्रिया में कंपनी के मालिकाना ढांचे में बदलाव करना, जरूरी मंजूरियां लेना, शेयरों का हस्तांतरण करना और कर से जुड़े जटिल मामलों को सुलझाना पड़ता है। इन सभी कामों में काफी खर्च हो सकता है। इसके बावजूद कंपनियां मान रही हैं कि लंबे समय में भारत में रहने और यहां के बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने से उन्हें लाभ मिल सकता है।
इस बदलाव से एक महत्वपूर्ण बात समझने की जरूरत है। जब कारोबार शुरू करने वाले लोगों ने विदेश में कंपनी बनाने का फैसला किया था, तब उनका उद्देश्य अपने कारोबार को आगे बढ़ाना और नियमों से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं को कम करना था। इसका अर्थ यह नहीं था कि वे भारत में कारोबार नहीं करना चाहते थे। अब वे भारत लौटने का फैसला भी कारोबारी जरूरतों, निवेश के अवसरों और भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखकर कर रहे हैं।
हर कंपनी के लिए भारत लौटना जरूरी नहीं
कंपनियों की वापसी सकारात्मक संकेत है, लेकिन अभी कई चुनौतियां बाकी हैं। भारत में कारोबार शुरू करने और उसे बढ़ाने की प्रक्रिया को अधिक सरल बनाने की जरूरत है। नियमों में मौजूद कमियों को दूर करना और निवेश से जुड़े मामलों में स्पष्टता लाना भी जरूरी है। हालांकि, यह मानना सही नहीं होगा कि भारत की हर नई कंपनी का कानूनी रूप से भारतीय होना आवश्यक है।
उदाहरण के लिए, सॉफ्टवेयर सेवाएं देने वाली या कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर काम करने वाली कोई कंपनी यदि अपनी अधिकांश कमाई अमेरिकी ग्राहकों से करती है, तो उसके लिए अमेरिका में पंजीकृत रहना व्यावहारिक हो सकता है। इसलिए विदेश में कंपनी बनाने के हर फैसले को भारत के लिए नुकसान के रूप में नहीं देखना चाहिए। हर कारोबार की जरूरतें, ग्राहक और विकास की योजनाएं अलग होती हैं।
कंपनियों के पुनर्गठन और भारत में कारोबार से जुड़े नियमों की जानकारी के लिए कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है।
भारत के कारोबारी माहौल के लिए आगे की राह
भारत की असली सफलता केवल इस बात में नहीं होगी कि विदेश गई कंपनियां वापस लौट रही हैं। असली सफलता तब होगी, जब देश में ऐसा कारोबारी माहौल बने कि आने वाले समय में नए उद्यमियों को अपना कारोबार शुरू करने और आगे बढ़ाने के लिए विदेश जाने की जरूरत ही महसूस न हो।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. भारतीय कंपनियां विदेश से वापस क्यों लौट रही हैं?
कुछ कंपनियां भारत के शेयर बाजारों में बढ़ते अवसरों, घरेलू निवेशकों की दिलचस्पी और अपने मुख्य ग्राहक बाजार के करीब रहने के लिए वापसी पर विचार कर रही हैं। हालांकि, हर कंपनी के फैसले के पीछे अलग कारोबारी कारण हो सकते हैं।
2. भारत में सूचीबद्ध होने से कंपनियों को क्या फायदा हो सकता है?
भारतीय शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से कंपनियों को घरेलू निवेशकों तक पहुंचने और पूंजी जुटाने का अवसर मिल सकता है। भारत में कारोबार करने वाली कंपनियों को अपने ग्राहकों और बाजार की परिस्थितियों को समझने वाले निवेशकों से जुड़ने में भी मदद मिल सकती है।
3. कंपनी को विदेश से भारत वापस लाने की प्रक्रिया में क्या मुश्किलें आती हैं?
इस प्रक्रिया में मालिकाना ढांचे का पुनर्गठन, शेयरों का हस्तांतरण, कानूनी मंजूरियां और कर संबंधी दायित्व शामिल हो सकते हैं। कंपनी की संरचना और लागू कानूनों के आधार पर प्रक्रिया लंबी और महंगी हो सकती है।
4. एंजल टैक्स हटाने से स्टार्टअप को क्या लाभ हो सकता है?
एंजल टैक्स हटाने से पात्र कंपनियों में निवेश से जुड़े कर संबंधी कुछ पुराने जोखिम कम हुए हैं। इससे निवेश का माहौल बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, स्टार्टअप को अन्य कर नियमों और कानूनी अनुपालन का पालन फिर भी करना होता है।
5. क्या हर भारतीय स्टार्टअप को भारत में ही पंजीकृत होना चाहिए?
नहीं, हर स्टार्टअप के लिए एक ही संरचना उपयुक्त नहीं होती। कंपनी के ग्राहक, निवेशक, आय के स्रोत, कानूनी जरूरतें और विस्तार की योजनाएं उसके फैसले को प्रभावित करती हैं। कुछ अंतरराष्ट्रीय कारोबारों के लिए विदेश में पंजीकरण व्यावहारिक हो सकता है।
निष्कर्ष
भारतीय कंपनियों की वापसी घरेलू निवेश बाजार और कारोबारी अवसरों में बढ़ते भरोसे का संकेत हो सकती है। लेकिन लंबे समय की सफलता के लिए सरल नियम, स्पष्ट कर व्यवस्था और बेहतर कारोबारी माहौल जरूरी हैं। लक्ष्य केवल कंपनियों को वापस लाना नहीं, बल्कि नए उद्यमियों के लिए भारत में विकास के अवसर बढ़ाना भी होना चाहिए।
डिस्क्लेमर
यह लेख सामान्य कारोबारी जानकारी के उद्देश्य से है। कंपनी के पुनर्गठन, कर और कानूनी मामलों में निर्णय लेने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

