भारत में सोने की खरीदारी की मात्रा भले ही कम हुई हो, लेकिन इस पर लोगों का कुल खर्च नया रिकॉर्ड बना गया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) में देश की कुल Gold Demand 6% घटकर 131 टन रही। इसके बावजूद ऊंची कीमतों के कारण सोने पर कुल खर्च 50% बढ़कर रिकॉर्ड 1.98 लाख करोड़ रुपये (करीब 21 अरब डॉलर) पहुंच गया।
Gold Demand घटी लेकिन खर्च ने बनाया नया रिकॉर्ड
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो वर्षों में सोने की कीमतों में लगातार आई तेजी, आयात शुल्क में बढ़ोतरी, रुपये की कमजोरी और इस अवधि में कम शुभ मुहूर्त होने से खरीदारी की मात्रा प्रभावित हुई। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में कुछ नरमी आई, लेकिन भारत में Import Duty और कमजोर रुपये के कारण घरेलू कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहीं।
हालांकि लोगों ने सोना खरीदना पूरी तरह बंद नहीं किया, बल्कि खरीदारी का तरीका बदल दिया। ग्राहक अब हल्के वजन के गहने, कम कैरेट की Jewellery और स्टडेड डिजाइन को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इसके अलावा पुराने गहनों के बदले नए गहने लेने वाली Exchange Scheme का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है। कई ज्वैलर्स के अनुसार, उनकी कुल बिक्री में 70% तक हिस्सा एक्सचेंज के जरिए आया।
📊 भारत में Gold Demand के प्रमुख आंकड़े
- कुल Gold Demand: 131 टन
- सालाना बदलाव: 6% की गिरावट
- कुल खर्च: ₹1.98 लाख करोड़
- खर्च में वृद्धि: 50%
- वैश्विक ज्वेलरी हिस्सेदारी: 27%
ज्वेलरी बाजार में मांग और खर्च दोनों मजबूत
ज्वेलरी की मांग पिछली तिमाही की तुलना में 14% बढ़कर 75 टन रही, क्योंकि अक्षय तृतीया और शादी-ब्याह के सीजन ने खरीदारी को सहारा दिया। हालांकि सालाना आधार पर यह 15% कम रही। इसके बावजूद ज्वेलरी पर होने वाला कुल खर्च 34% बढ़कर 1.13 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। वैश्विक स्तर पर भी भारत 27% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा ज्वेलरी बाजार बना रहा।
निवेश के लिए खरीदे जाने वाले सोने, जिसमें Gold Bar, Coin और Gold ETF शामिल हैं, की मांग भी कुछ कम हुई। कुल निवेश मांग 54 टन रही, जो पिछले तीन तिमाहियों के औसत से कम है। वहीं बार और सिक्कों की खरीद पिछली तिमाही के मुकाबले 19% घटी, लेकिन सालाना आधार पर इसमें 9% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस साल की पहली छमाही में बार और सिक्कों की खरीद पिछले 13 वर्षों के सबसे ऊंचे स्तर पर रही।
Gold ETF और निवेश में क्या रहा रुझान
Gold ETF में निवेश की रफ्तार भी धीमी पड़ी और यह करीब 4 टन रही। इसके बावजूद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल रहा, जहां Gold ETF में निवेश का प्रवाह सकारात्मक बना रहा। जून के अंत तक देश में Gold ETF की कुल होल्डिंग 119 टन और प्रबंधन के तहत कुल संपत्ति 1.7 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
दूसरी ओर, सोने की आपूर्ति छह साल के निचले स्तर पर आ गई। आयात शुल्क बढ़ने के बाद सोने का आयात पिछली तिमाही की तुलना में 53% और पिछले साल के मुकाबले 22% घट गया। हालांकि बाजार में सोने की कोई कमी नहीं रही, क्योंकि रीसाइकिल किए गए सोने और पहले से मौजूद स्टॉक ने मांग को पूरा किया।
💰 Gold Loan और ETF की स्थिति
- Gold ETF होल्डिंग: 119 टन
- ETF AUM: ₹1.7 लाख करोड़
- बैंकों का Gold Loan: ₹5.1 लाख करोड़
- NBFC Gold Loan: ₹3.3 लाख करोड़
- आयात: तिमाही आधार पर 53% कम
Gold Loan की मांग में आई तेज बढ़ोतरी
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि रिकॉर्ड कीमतों के बावजूद लोगों ने पुराने गहने बेचने के बजाय उन्हें गिरवी रखकर लोन लेना ज्यादा पसंद किया। बैंकों का Gold Loan पोर्टफोलियो एक साल में दोगुना होकर 5.1 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) का गोल्ड लोन कारोबार 70% बढ़कर 3.3 लाख करोड़ रुपये हो गया।
त्योहारी सीजन में बढ़ सकती है Gold Demand
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का मानना है कि आने वाले महीनों में सोने की मांग काफी हद तक कीमतों पर निर्भर करेगी। यदि कीमतों में स्थिरता आती है या कुछ गिरावट होती है, तो त्योहारों और शादी के सीजन के दौरान Gold Demand और Investment Demand दोनों को अच्छा समर्थन मिल सकता है。
Disclaimer: यह जानकारी सार्वजनिक रिपोर्ट और उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह अवश्य लें।
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