सोने की कीमतों में मंगलवार को बहुत बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला और यह सीमित दायरे में कारोबार करता रहा। निवेशकों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के साथ-साथ दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावनाओं पर बनी हुई है। बाजार का मानना है कि यदि तनाव कम होता है और कूटनीतिक प्रयास सफल रहते हैं, तो ऊर्जा कीमतों पर दबाव घट सकता है। इसका असर अमेरिकी ब्याज दरों की संभावित दिशा पर भी पड़ सकता है, जिससे सोने के भाव प्रभावित होंगे।
सोने की कीमतों पर अमेरिका-ईरान तनाव और ब्याज दरों की नजर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना लगभग 4,060 डॉलर प्रति औंस के आसपास बना रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत का उनका नया प्रस्ताव आखिरी मौका है और उन्हें उम्मीद है कि होरमुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुल जाएगा। दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका के साथ सीधी बातचीत से इनकार किया, लेकिन ओमान के साथ जहाजों की आवाजाही सामान्य करने के प्रयासों में प्रगति की बात कही।
इसी बीच अमेरिका और जापान के अधिकारियों ने संकेत दिए कि वे येन को मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाने के पक्ष में हैं। जापान अमेरिकी सरकारी बॉन्ड का सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है। ऐसे में यदि वह अपनी मुद्रा को सहारा देने के लिए इन बॉन्ड की बिक्री करता है, तो इसका असर अमेरिकी बॉन्ड बाजार पर भी पड़ सकता है।
🪙 Gold Market की प्रमुख बातें
- Gold Price: लगभग 4,060 डॉलर प्रति औंस
- फोकस: अमेरिका-ईरान तनाव
- ब्याज दर: Federal Reserve के अगले कदम पर नजर
- ऊर्जा बाजार: तेल कीमतों का असर
- निवेशक: सुरक्षित निवेश की मांग पर फोकस
Federal Reserve और महंगाई पर बाजार की नजर
इस साल फरवरी के आखिर में शुरू हुए अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद से सोने की कीमतों में 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है। ऊंची Energy कीमतों ने महंगाई का दबाव बढ़ाया, जिससे लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरें बने रहने की आशंका मजबूत हुई। हालांकि पिछले सप्ताह हुई बैठक में Federal Reserve ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया।
न्यूयॉर्क फेड के अध्यक्ष जॉन विलियम्स का कहना है कि मौजूदा Interest Rate फिलहाल उचित स्तर पर हैं और साल की दूसरी छमाही में महंगाई कम होने की उम्मीद है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि महंगाई उम्मीद के अनुसार नहीं घटती है, तो केंद्रीय बैंक आवश्यक कदम उठा सकता है।
📈 आगे Gold Price पर क्या रहेगा असर
- मध्य पूर्व: तनाव और कूटनीतिक प्रयास
- Central Banks: Gold खरीद की रफ्तार
- Dollar: मजबूती या कमजोरी
- Goldman Sachs: केंद्रीय बैंकों की खरीद से समर्थन
- Citi: चौथी तिमाही में तेजी की संभावना
विशेषज्ञों का Gold Price को लेकर अनुमान
बाजार की नजर अब मध्य पूर्व की स्थिति के साथ-साथ आने वाले समय में सोने की मांग पर भी है। Goldman Sachs का मानना है कि चीन समेत कई देशों के केंद्रीय बैंकों की खरीद बढ़ने से आने वाले समय में सोने की कीमतों को सहारा मिल सकता है, भले ही अभी कुछ समय तक दबाव बना रहे। वहीं Citi के विश्लेषकों का अनुमान है कि अगले एक महीने तक सोने के भाव सीमित रह सकते हैं या कुछ कमजोर भी पड़ सकते हैं, लेकिन साल की चौथी तिमाही में कीमतें फिर मजबूत होकर लगभग 4,500 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं। उनका मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है, होरमुज जलडमरूमध्य में आवाजाही सामान्य होती है और डॉलर कमजोर पड़ता है, तो Gold में निवेशकों की दिलचस्पी दोबारा बढ़ सकती है।
Disclaimer: यह जानकारी सार्वजनिक रिपोर्टों और बाजार अनुमानों पर आधारित है। सोने में निवेश से पहले वित्तीय सलाह अवश्य लें।