महाराष्ट्र के तीरंदाज साहिल जाधव एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए अच्छा प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं। इस बड़े मुकाबले से पहले ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर शेन वॉटसन की किताब ने उन्हें मानसिक दबाव से निपटने में काफी मदद की है। साहिल ने बताया कि करीब एक महीने पहले उन्होंने वॉटसन की किताब पढ़ना शुरू किया था। इसका उद्देश्य मोबाइल पर समय कम करना था, लेकिन उन्हें प्रतियोगिता के दौरान दबाव संभालने और ध्यान बनाए रखने के बारे में काफी उपयोगी बातें सीखने को मिलीं।
साहिल जाधव ने तीरंदाजी की शुरुआत 19 साल की उम्र में की थी
साहिल जाधव ने तीरंदाजी की शुरुआत 19 साल की उम्र में की थी। उनके लिए राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। पहला राष्ट्रीय पदक जीतने में उन्हें करीब सात साल लग गए। इस दौरान कई बार वह बहुत कम अंतर से पदक से चूक गए। मुश्किल समय में उनके परिवार ने लगातार उनका साथ दिया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
साहिल ने बताया कि उनके परिवार ने उनके लिए कई त्याग किए हैं। उन्होंने कहा कि जब वह लगातार सफल नहीं हो पा रहे थे, तब भी परिवार उनके साथ खड़ा रहा। लंबे इंतजार और मेहनत के बाद 2024 में उन्होंने सीनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में अपना पहला पदक जीता और स्वर्ण पदक हासिल किया।
साहिल जाधव की उपलब्धियां
- तीरंदाजी की शुरुआत: 19 साल की उम्र में
- पहला राष्ट्रीय पदक: 2024
- राष्ट्रीय प्रतियोगिता: स्वर्ण पदक
- विश्व विश्वविद्यालय खेल 2025: व्यक्तिगत स्वर्ण पदक
- टीम स्पर्धा: रजत पदक
- Archery World Cup 2026: कांस्य पदक
इसके बाद उनके प्रदर्शन में लगातार सुधार हुआ। 2025 के विश्व विश्वविद्यालय खेलों में उन्होंने व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता और टीम स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया। इस साल भी उनका प्रदर्शन अच्छा रहा है। शंघाई में हुए Archery World Cup 2026 के दूसरे चरण में उन्होंने पुरुष व्यक्तिगत कंपाउंड स्पर्धा में कांस्य पदक जीता, जो उनके करियर के सबसे बड़े परिणामों में से एक है।
साहिल ने बताया कि पदक जीतने के बाद उन्हें अपने माता-पिता की याद आई
साहिल ने बताया कि पदक जीतने के बाद उन्हें अपने माता-पिता की याद आई। उन्होंने कहा कि इस सफलता के पीछे परिवार का सहयोग और पिछले कई वर्षों की मेहनत शामिल है। अब उनका ध्यान जापान में होने वाले एशियन गेम्स पर है, जो उनके करियर की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता है।
भारत के तीरंदाजों को दक्षिण कोरिया, चीन और जापान जैसे मजबूत खिलाड़ियों से चुनौती मिलने की उम्मीद है। साहिल का मानना है कि भारतीय खिलाड़ियों में दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों को हराने की क्षमता है। उनके अनुसार, भारत के खिलाड़ियों को चयन प्रतियोगिता में जगह बनाने के लिए ही काफी कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ता है।
एशियन गेम्स से पहले साहिल की तैयारी
- मुख्य लक्ष्य: एशियन गेम्स में भारत के लिए अच्छा प्रदर्शन
- मानसिक तैयारी: दबाव संभालने और ध्यान बनाए रखने पर जोर
- मुख्य चुनौती: दक्षिण कोरिया, चीन और जापान के मजबूत खिलाड़ी
- कमजोरी: दबाव में छोटी गलतियां
- अभ्यास केंद्र: कोलकाता स्थित SAI का राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र
- उद्देश्य: जापान में भारत के लिए पदक जीतना
साहिल ने कहा कि कई बार भारतीय तीरंदाज दबाव में छोटी गलतियां कर देते हैं और एक-दो अंक से मुकाबला हाथ से निकल जाता है। उनके मुताबिक, इस कमजोरी को दूर करना जरूरी है। अगर खिलाड़ी दबाव में अपना पूरा प्रदर्शन कर पाते हैं तो भारत के लिए अच्छे परिणाम हासिल करना मुश्किल नहीं होगा।
फिलहाल साहिल कोलकाता स्थित SAI के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में अभ्यास कर रहे हैं
फिलहाल साहिल कोलकाता स्थित SAI के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र में अभ्यास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वहां प्रशिक्षण के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं। पिछले तीन-चार वर्षों से वह इस केंद्र में अभ्यास कर रहे हैं और उनके अनुसार प्रशिक्षण, रहने, भोजन, उपकरण और दूसरी सुविधाओं में संस्था ने उनका काफी सहयोग किया है।
अब साहिल की कोशिश एशियन गेम्स में अपने प्रदर्शन को और बेहतर करने की है। वर्षों की मेहनत के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके साहिल को उम्मीद है कि मानसिक मजबूती और लगातार अभ्यास के दम पर वह जापान में भारत के लिए पदक जीतने में सफल होंगे।
Disclaimer: यह जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट पर आधारित है और प्रतियोगिता के परिणाम अलग हो सकते हैं।