सप्ताह की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव देखने को मिला। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण सोना गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया।
सोने की कीमतों में सप्ताह की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। सोमवार के एशियाई कारोबार में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना (XAU/USD) करीब 4,050 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक फिसल गया। इसकी बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका मजबूत हुई है और निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आगे ब्याज दरें बढ़ा सकता है। इसी कारण अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ और सोने पर दबाव देखने को मिला।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट
आज सोने के बाजार की प्रमुख बातें
- सोना (XAU/USD): करीब 4,050 डॉलर प्रति औंस
- मुख्य वजह: अमेरिका-ईरान तनाव
- कच्चा तेल: कीमतों में तेज उछाल
- अमेरिकी डॉलर: मजबूती से सोने पर दबाव
- फोकस: फेड और महंगाई के आंकड़े
- बाजार रुख: सतर्कता का माहौल
सप्ताहांत में अमेरिका ने ईरान पर बड़े सैन्य हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। इसके साथ ही ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का दावा किया, जो दुनिया में तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है। इस घटनाक्रम के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया और वैश्विक बाजार में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई।
तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई का दबाव बढ़ने की संभावना है। ऐसे में बाजार को लग रहा है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रख सकता है या आगे और बढ़ा सकता है। इसी उम्मीद ने अमेरिकी डॉलर को मजबूती दी है। मजबूत डॉलर की वजह से सोने में निवेश कम आकर्षक हो जाता है, क्योंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता।
कच्चे तेल और डॉलर का सोने पर असर
इस सप्ताह इन संकेतों पर रहेगी नजर
- फेड चेयर: बयान
- CPI: जून महीने के महंगाई आंकड़े
- PPI: उत्पादक मूल्य सूचकांक
- कच्चा तेल: कीमतों की चाल
- डॉलर: मजबूती या कमजोरी
- सोना: प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर
अब निवेशकों की नजर इस सप्ताह फेड चेयर के बयान और अमेरिका के जून महीने के महंगाई आंकड़ों पर रहेगी। मंगलवार को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और बुधवार को उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) जारी होंगे। यदि महंगाई उम्मीद से ज्यादा रहती है, तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना और मजबूत हो सकती है, जिससे सोने पर दबाव बना रह सकता है।
तकनीकी संकेत भी फिलहाल सोने के लिए बहुत मजबूत नहीं दिख रहे हैं। कीमतें अभी अपनी लंबी अवधि की प्रमुख औसत रेखा से नीचे कारोबार कर रही हैं, जिससे कमजोरी का संकेत मिलता है। अगर गिरावट जारी रहती है तो 4,000 डॉलर का स्तर महत्वपूर्ण सहारा हो सकता है। इसके नीचे जाने पर कीमतें 3,942 डॉलर के आसपास तक फिसल सकती हैं। वहीं अगर सोने में तेजी आती है तो 4,290 डॉलर के आसपास पहली बड़ी रुकावट मानी जा रही है। इसके ऊपर टिकने पर ही बाजार में मजबूत रिकवरी के संकेत मिल सकते हैं।
अस्वीकरण: यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से है। निवेश का निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की सलाह अवश्य लें।
