ईरान-अमेरिका तनाव से बॉन्ड बाजार में हलचल, बढ़ी यील्ड

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर सोमवार को भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार पर भी देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और वैश्विक अनिश्चितता के कारण सरकारी बॉन्ड की यील्ड में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर सोमवार को भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार पर भी देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल से निवेशकों की चिंता बढ़ गई, जिसके चलते सरकारी बॉन्ड की खरीदारी कमजोर रही और उनकी यील्ड में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार पर बढ़ते तनाव का असर

सरकारी बॉन्ड बाजार की प्रमुख बातें

  • 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड: 6.7368%
  • पिछला स्तर: 6.7139%
  • मुख्य वजह: कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
  • बाजार रुख: बॉन्ड खरीदारी में कमजोरी
  • ब्रेंट क्रूड: करीब 79 डॉलर प्रति बैरल
  • निवेशकों की नजर: महंगाई और वैश्विक घटनाक्रम

10 साल की अवधि वाले सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 6.7368 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो पिछले कारोबारी सत्र में 6.7139 प्रतिशत थी। बॉन्ड बाजार में कीमत और यील्ड एक-दूसरे के विपरीत दिशा में चलती हैं। यानी जब बॉन्ड की कीमत घटती है, तो उसकी यील्ड बढ़ जाती है।

बाजार पर दबाव की सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी रही। अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में हमले तेज कर दिए हैं। साथ ही ईरान की नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अगली सूचना तक बंद करने का दावा किया है। इसके बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 3 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 79 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई।

कच्चे तेल की कीमतों से क्यों बढ़ी चिंता

इन संकेतकों पर रहेगी बाजार की नजर

  • कच्चा तेल: कीमतों की चाल
  • पश्चिम एशिया: तनाव की स्थिति
  • CPI: जून महीने की खुदरा महंगाई
  • FAR निवेश: 4 अरब डॉलर से अधिक
  • विदेशी निवेशक: सरकारी बॉन्ड में दिलचस्पी
  • बाजार: वैश्विक घटनाक्रम पर नजर

हालांकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला हुआ है, लेकिन ईरान अपने दावे पर कायम है। इस स्थिति ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है और वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

घरेलू बाजार में निवेशकों की नजर अब जून महीने के खुदरा महंगाई (CPI) के आंकड़ों पर है। अनुमान है कि महंगाई दर 15 महीने बाद पहली बार 4 प्रतिशत के स्तर को पार कर सकती है। इसके पीछे ईंधन की बढ़ती कीमतें और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण सप्लाई चेन पर पड़ा असर प्रमुख कारण माना जा रहा है।

विदेशी निवेशकों की नजर भारतीय बॉन्ड बाजार पर

इस बीच विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी भारतीय सरकारी बॉन्ड में बनी हुई है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, फुली एक्सेसिबल रूट (FAR) के तहत विदेशी निवेश 4 अरब डॉलर के स्तर को पार कर चुका है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें, पश्चिम एशिया की स्थिति और महंगाई के आंकड़े भारतीय बॉन्ड बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

अस्वीकरण: यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के लिए है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या बाजार विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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