सरकार ने Hindustan Copper में हिस्सेदारी बिक्री के लिए लाए गए प्रस्ताव को निवेशकों से मिली मजबूत मांग के बाद बढ़ा दिया है। संस्थागत निवेशकों ने पहले दिन ही बड़ी संख्या में बोली लगाई, जिसके चलते सरकार ने अतिरिक्त शेयर बेचने के विकल्प का पूरा इस्तेमाल करने का फैसला किया। इस हिस्सेदारी बिक्री को लेकर बाजार में अच्छी दिलचस्पी देखने को मिली है।
हिंदुस्तान कॉपर हिस्सेदारी बिक्री में मजबूत मांग
निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग यानी Dipam के सचिव अरुणिश चावला ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी दी कि पहले दिन संस्थागत निवेशकों की ओर से उम्मीद से ज्यादा मांग आई। उनके अनुसार, बिक्री के लिए रखे गए शेयरों के मुकाबले करीब 3.41 गुना बोली मिली है। अधिक मांग को देखते हुए सरकार अब अतिरिक्त शेयरों की बिक्री के विकल्प का भी इस्तेमाल करेगी।

सरकार ने सोमवार को हिंदुस्तान कॉपर में अपनी 3 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की पेशकश की थी। इसके तहत करीब 2.90 करोड़ शेयर बिक्री के लिए रखे गए थे। साथ ही जरूरत पड़ने पर 3 प्रतिशत अतिरिक्त हिस्सेदारी बेचने का विकल्प भी रखा गया था। इस तरह सरकार कुल 6 प्रतिशत तक हिस्सेदारी बेच सकती है।
stake sale के लिए प्रति शेयर 514 रुपये का न्यूनतम मूल्य तय किया गया है। यह कीमत पिछले कारोबारी दिन के बंद भाव से 10 प्रतिशत से अधिक कम थी। कम कीमत पर शेयर बिक्री की खबर के बाद कंपनी के शेयर पर दबाव देखा गया और मंगलवार को यह बीएसई पर करीब 7 प्रतिशत गिरकर 533.20 रुपये पर बंद हुआ।
हिंदुस्तान कॉपर OFS की मुख्य जानकारी
- प्रारंभिक हिस्सेदारी बिक्री: 3 प्रतिशत
- अतिरिक्त विकल्प: 3 प्रतिशत
- कुल संभावित बिक्री: 6 प्रतिशत
- बिक्री के लिए शेयर: करीब 2.90 करोड़
- न्यूनतम मूल्य: 514 रुपये प्रति शेयर
- संस्थागत मांग: करीब 3.41 गुना
अगर सरकार पूरे 6 प्रतिशत शेयर बेचने में सफल रहती है तो उसे करीब 2,982 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। यह बिक्री सरकार के वित्त वर्ष 2026-27 के विनिवेश लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार ने इस वित्त वर्ष के लिए करीब 80,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य तय किया है।
Retail investors के लिए भी मौका
इस बिक्री में Retail investors और पात्र कर्मचारी बुधवार को हिस्सा ले सकेंगे। कुल प्रस्ताव का 10 प्रतिशत हिस्सा खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित रखा गया है। वहीं पात्र कर्मचारियों के लिए अधिकतम 25,000 शेयर अलग रखे गए हैं। इससे आम निवेशकों को भी कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने का मौका मिलेगा।
Hindustan Copper Central Government के नियंत्रण वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है और यह खनन मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करती है। कंपनी का मुख्य काम तांबे की खोज, खनन, अयस्क को उपयोग योग्य बनाना, गलाना और शुद्ध तांबा तैयार करना है। भारत में तांबा क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख सरकारी कंपनियों में इसका महत्वपूर्ण स्थान है।
सरकार की हिस्सेदारी कितनी रह जाएगी
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सरकार के पास हिंदुस्तान कॉपर के करीब 63.96 करोड़ शेयर हैं, जो कंपनी की लगभग 66.14 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर हैं। यदि पूरी 6 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री हो जाती है तो सरकार की हिस्सेदारी घटकर करीब 60.14 प्रतिशत रह जाएगी। हालांकि इसके बावजूद कंपनी का प्रबंधन नियंत्रण सरकार के पास ही रहेगा।
सरकार की यह हिस्सेदारी बिक्री व्यापक विनिवेश कार्यक्रम का हिस्सा है। सरकार समय-समय पर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में अपनी छोटी हिस्सेदारी बेचकर धन जुटाती है। ऐसी बिक्री में आमतौर पर कंपनी का प्रबंधन निजी हाथों में नहीं जाता, बल्कि सरकार केवल अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा कम करती है।
विनिवेश से सरकार ने अब तक कितना जुटाया
चालू वित्त वर्ष में सरकार विनिवेश से अब तक करीब 52,716 करोड़ रुपये जुटा चुकी है। इस रकम का बड़ा हिस्सा अगस्त की शुरुआत में भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी में 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री से आया था। उस सौदे से सरकार को करीब 31,515 करोड़ रुपये मिले थे। एलआईसी में सरकार की हिस्सेदारी को तय न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी नियमों के अनुसार कम करना भी इस बिक्री का एक उद्देश्य था।
निवेशकों के लिए अहम बातें
- मजबूत मांग: संस्थागत निवेशकों की ओर से करीब 3.41 गुना बोली मिली
- सरकार की हिस्सेदारी: पूरी बिक्री के बाद करीब 60.14 प्रतिशत
- विनिवेश लक्ष्य: वित्त वर्ष 2026-27 के लिए करीब 80,000 करोड़ रुपये
- पहली तिमाही का लाभ: 352.37 करोड़ रुपये
- शुद्ध बिक्री: 936.5 करोड़ रुपये
- निवेश सावधानी: OFS से पहले वित्तीय स्थिति, शेयर मूल्य और जोखिम समझना जरूरी
हिंदुस्तान कॉपर के हालिया वित्तीय नतीजे भी मजबूत रहे हैं। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी के समायोजित शुद्ध लाभ में सालाना आधार पर करीब 162.47 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 352.37 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं कंपनी की शुद्ध बिक्री भी करीब 81.36 प्रतिशत बढ़कर 936.5 करोड़ रुपये रही।
अब खुदरा निवेशकों की भागीदारी पर नजर
संस्थागत निवेशकों से मिली मजबूत मांग के बाद अब बाजार की नजर खुदरा निवेशकों की भागीदारी पर रहेगी। हिस्सेदारी बिक्री की पूरी प्रक्रिया और शेयर की कीमत पर इसका असर आने वाले कारोबारी सत्रों में भी देखने को मिल सकता है। निवेशकों के लिए किसी भी OFS में हिस्सा लेने से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, शेयर मूल्य और अपने जोखिम को समझना जरूरी होता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के लिए है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें और अपने जोखिम को समझें।