India Data Centre Capacity 2030 तक 3.6 GW पहुंचने की उम्मीद

भारत में डेटा सेंटर क्षमता आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। Axis Capital की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2030 तक देश की डेटा सेंटर क्षमता करीब 3 से 3.6 GW तक पहुंच सकती है। हालांकि, कंपनियों द्वारा घोषित 6-8 GW के लक्ष्य को विशेषज्ञों ने काफी बड़ा बताया है और वास्तविक क्षमता इससे कम रह सकती है।

भारत में डेटा सेंटर क्षमता 2030 तक 3.6 GW तक पहुंचने की उम्मीद

रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी तकनीकी कंपनियां डेटा सेंटर की मांग बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगी। Amazon Web Services, Microsoft और Google जैसी कंपनियां भारत में अपनी सुविधाओं का विस्तार कर रही हैं। इसके साथ ही AI आधारित सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल से भी डेटा सेंटर की जरूरत बढ़ रही है।

फिलहाल भारत में डेटा सेंटर की कुल क्षमता करीब 1.3 से 1.4 GW है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा तीसरे पक्ष द्वारा संचालित सुविधाओं का है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 60-65 प्रतिशत है। इसके बाद बड़ी कंपनियों की खुद की या किराये पर ली गई क्षमता का योगदान 25-30 प्रतिशत है।

AI और बड़ी टेक कंपनियों से बढ़ रही डेटा सेंटर की मांग

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 तक घोषित सभी योजनाओं को पूरा करना आसान नहीं होगा। बिजली की उपलब्धता, उपकरणों की आपूर्ति, निर्माण में देरी और कर्मचारियों की कमी जैसी समस्याएं इस क्षेत्र की गति को प्रभावित कर सकती हैं।

अनुमान के अनुसार, 2030 के मध्य तक लगभग 3.4-3.6 GW क्षमता तैयार हो सकती है, जबकि वास्तव में चालू क्षमता करीब 2.8 GW रहने की संभावना है। साल 2026 में पिछले कुछ महीनों के दौरान करीब 900 MW से 1.2 GW क्षमता वाले डेटा सेंटर प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है।

🖥️ भारत का डेटा सेंटर सेक्टर

  • वर्तमान क्षमता: करीब 1.3 से 1.4 GW
  • 2030 अनुमान: 3 से 3.6 GW क्षमता
  • मुख्य मांग: AI और डिजिटल सेवाएं
  • बड़ी कंपनियां: Amazon Web Services, Microsoft और Google
  • मुख्य चुनौती: बिजली, उपकरण और निर्माण में देरी

हालांकि, किसी प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के बाद उसे शुरू होने में लंबा समय लगता है। रिपोर्ट के अनुसार, बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट के शुरुआती चरण को पूरा करने में लगभग 32-36 महीने लग सकते हैं।

AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से डेटा सेंटर बनाने की लागत भी बढ़ रही है। सामान्य सुविधाओं की लागत लगभग 44-46.6 करोड़ रुपये प्रति MW हो सकती है, जबकि AI आधारित ढांचे की लागत 48-54 करोड़ रुपये प्रति MW तक पहुंच सकती है।

AI डेटा सेंटर से बढ़ेगी लागत और निवेश की जरूरत

भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र के विस्तार से बिजली, कूलिंग सिस्टम, बैकअप सुविधा, निर्माण और इलेक्ट्रिकल उपकरणों से जुड़े उद्योगों को फायदा मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार, अगर सभी योजनाएं सफल रहती हैं, तो साल 2035 तक भारत की डेटा सेंटर क्षमता 7-8 GW तक पहुंच सकती है।

🚀 डेटा सेंटर विस्तार के फायदे

  • 2035 लक्ष्य: 7-8 GW क्षमता तक पहुंचने की संभावना
  • AI प्रभाव: डेटा सेंटर की मांग और लागत दोनों बढ़ रही हैं
  • लागत: AI आधारित ढांचे में ज्यादा निवेश की जरूरत
  • फायदा: बिजली, कूलिंग और इलेक्ट्रिकल उद्योगों को बढ़ावा
  • समय: बड़े प्रोजेक्ट में 32-36 महीने लग सकते हैं

Disclaimer: यह जानकारी रिपोर्ट पर आधारित है, निवेश या व्यावसायिक निर्णय से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।

Gourav Kumar Singh

About the Author

Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

Read More →

Leave a Comment