भारत में डेटा सेंटर उद्योग तेजी से नए शहरों की ओर बढ़ रहा है। AI, डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग और राज्यों की नई नीतियों के कारण अब कई उभरते शहर भी इस क्षेत्र में निवेश आकर्षित कर रहे हैं।
भारत में data centre उद्योग अब केवल मुंबई, चेन्नई और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं रह गया है। अब भुवनेश्वर, पटना, जयपुर और कोलकाता जैसे शहर भी इस क्षेत्र में तेजी से उभर रहे हैं। राज्यों की ओर से दी जा रही वित्तीय सहायता, सस्ती जमीन और कर में छूट के कारण कंपनियां इन नए शहरों में निवेश बढ़ा रही हैं। साथ ही AI और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग ने छोटे शहरों में नई संभावनाएं पैदा की हैं।
भारत में डेटा सेंटर उद्योग का विस्तार
एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में छोटे edge डेटा सेंटरों की क्षमता 2024 के 60 मेगावाट से बढ़कर 2027 तक 210 मेगावाट तक पहुंच सकती है। इस दौरान लगभग 52 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ इन सुविधाओं की जरूरत लगातार बढ़ेगी।
बड़े शहरों में बने विशाल डेटा सेंटरों की तुलना में छोटे डेटा सेंटर उपयोगकर्ताओं के अधिक करीब बनाए जाते हैं। इससे जानकारी के आदान-प्रदान में समय कम लगता है और बैंकिंग, ऑनलाइन भुगतान, वीडियो सेवाओं तथा अन्य डिजिटल काम अधिक तेजी से पूरे हो पाते हैं। यही वजह है कि कंपनियां अब छोटे शहरों में भी ऐसे केंद्र स्थापित कर रही हैं।
भारत के उभरते डेटा सेंटर हब
- मुख्य उभरते शहर: पटना, जयपुर, भुवनेश्वर, कोलकाता
- मुख्य वजह: सस्ती जमीन और सरकारी प्रोत्साहन
- डिमांड: AI और डिजिटल सेवाएं
- क्षमता: 2024 में 60 मेगावाट
- अनुमान: 2027 तक 210 मेगावाट
- औसत वृद्धि: लगभग 52% वार्षिक
राज्यों की नीतियां और कंपनियों का निवेश
देश के कई राज्यों ने इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियां लागू की हैं। गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और राजस्थान जैसे राज्यों ने पूंजी सहायता, जमीन पर छूट, बिजली से जुड़ी सुविधाएं और अन्य प्रोत्साहन देने की घोषणा की है। इन योजनाओं का उद्देश्य निवेश आकर्षित करना और नए डिजिटल केंद्र विकसित करना है।
कई बड़ी कंपनियों ने इन शहरों में निवेश शुरू भी कर दिया है। CtrlS पटना में नया डेटा सेंटर बना रही है और आने वाले वर्षों में देश के 21 स्थानों पर छोटे डेटा सेंटर स्थापित करने की योजना बना रही है। वहीं Nxtra, STT GDC और NTT जैसी कंपनियां भी अलग-अलग राज्यों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं।
डेटा सेंटर उद्योग की प्रमुख चुनौतियां
- बिजली: मजबूत और लगातार आपूर्ति जरूरी
- नेटवर्क: तेज fibre कनेक्टिविटी आवश्यक
- बुनियादी ढांचा: पानी और परिवहन सुविधा
- मानव संसाधन: प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत
- जमीन: मंजूरियों में देरी की चुनौती
- लक्ष्य: मजबूत डिजिटल infrastructure तैयार करना
भविष्य की संभावनाएं और चुनौतियां
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सरकारी सहायता से यह उद्योग लंबे समय तक सफल नहीं हो सकता। मजबूत बिजली व्यवस्था, तेज fibre नेटवर्क, पर्याप्त पानी, अच्छी परिवहन सुविधा और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता भी उतनी ही जरूरी है। यदि इन बुनियादी सुविधाओं का विकास नहीं हुआ तो कई परियोजनाओं की गति धीमी पड़ सकती है।
एक बड़ी चुनौती यह भी है कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन के उपयोग में बदलाव के लिए कई मंजूरियां लेनी पड़ती हैं। कई बार स्थानीय लोगों की आपत्तियों के कारण भी परियोजनाओं में देरी हो सकती है। इसके अलावा दूर-दराज के इलाकों में काम करने के लिए अनुभवी कर्मचारियों को आकर्षित करना भी कंपनियों के लिए आसान नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में बड़े शहरों का महत्व बना रहेगा, लेकिन कुछ छोटे शहर मजबूत क्षेत्रीय डिजिटल केंद्र के रूप में विकसित हो सकते हैं। यदि वहां बिजली, इंटरनेट, परिवहन और अन्य जरूरी सुविधाओं का तेजी से विकास किया गया, तो भारत वैश्विक infrastructure क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
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