अमेरिका की नई व्यापार नीति के तहत कई देशों से आने वाले आयातित सामान पर नए शुल्क लागू किए जाने की तैयारी है। इस फैसले का असर वैश्विक व्यापार, आयात-निर्यात, निवेश और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन जल्द ही लगभग सभी आयातित सामान पर नए शुल्क लागू करने जा रहा है। यह नया फैसला उन पुराने 10 प्रतिशत शुल्क की जगह लेगा, जिनकी अवधि अब समाप्त हो रही है। नए नियमों के तहत करीब 60 व्यापारिक साझेदार देशों से आने वाले अधिकांश सामान पर 10 प्रतिशत से 12.5 प्रतिशत तक tariff लगाया जाएगा।
अमेरिका नए आयात शुल्क लागू करेगा
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम उन देशों के खिलाफ उठाया जा रहा है, जहां जबरन मजदूरी से बने उत्पादों पर रोक लगाने के लिए पर्याप्त कानून या प्रभावी व्यवस्था नहीं है। यह कार्रवाई Section 301 के तहत की जाएगी, जो अमेरिका को अनुचित व्यापारिक गतिविधियों के खिलाफ शुल्क लगाने का अधिकार देता है।
जिन देशों ने जबरन मजदूरी से बने सामान पर आंशिक प्रतिबंध लगाया है या ऐसा करने की दिशा में कदम उठाए हैं, उन पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा। इस सूची में भारत, कनाडा, मैक्सिको और ब्रिटेन जैसे देश शामिल हैं। वहीं जिन देशों में ऐसी व्यवस्था कमजोर मानी गई है, उन पर 12.5 प्रतिशत शुल्क लागू होगा। इस श्रेणी में चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश शामिल हैं।
नए अमेरिकी शुल्क की मुख्य बातें
- लागू देश: लगभग 60 व्यापारिक साझेदार
- न्यूनतम शुल्क: 10%
- अधिकतम शुल्क: 12.5%
- कानूनी आधार: Section 301
- मुख्य उद्देश्य: जबरन मजदूरी से बने उत्पादों पर रोक
- प्रभाव: वैश्विक व्यापार और आयात
किन देशों पर कितना शुल्क लगेगा
हालांकि जिन उत्पादों पर पहले से राष्ट्रीय सुरक्षा या किसी विशेष क्षेत्र से जुड़े अलग शुल्क लागू हैं, उन पर यह नया नियम लागू नहीं होगा। प्रशासन का कहना है कि इसका उद्देश्य वैश्विक व्यापार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात को हतोत्साहित करना है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन लगातार व्यापार नीति को सख्त बना रहा है। हाल के दिनों में कनाडा और ब्राजील से आने वाले कुछ उत्पादों पर भी भारी शुल्क लगाने की घोषणा की गई है। इसके अलावा अमेरिका में दवाइयों का उत्पादन बढ़ाने के लिए विदेशी imports पर भी सख्त रुख अपनाया गया है।
व्यापार नीति का संभावित प्रभाव
- भारत सहित कई देश: 10% शुल्क श्रेणी
- चीन, जापान, दक्षिण कोरिया: 12.5% शुल्क श्रेणी
- यूरोपीय संघ: व्यापारिक तनाव बढ़ने की संभावना
- निवेशक: पहले से औसत trade शुल्क का अनुमान
- कंपनियां: सुझाव देने का अवसर मिलेगा
- संभावना: कुछ उत्पादों को राहत मिल सकती है
यूरोपीय संघ और बाजार पर असर
यूरोपीय संघ के साथ चल रही व्यापारिक बातचीत पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है। अमेरिकी अधिकारियों ने डिजिटल नियमों और गूगल पर लगाए गए बड़े जुर्माने को लेकर यूरोपीय संघ के साथ हुए समझौते पर सवाल उठाए हैं। इससे दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों ने पहले से ही 10 से 15 प्रतिशत के औसत trade शुल्क की संभावना को ध्यान में रखा हुआ है। इसलिए फिलहाल शेयर बाजार में ज्यादा घबराहट देखने को नहीं मिली है। उनका यह भी कहना है कि कुछ जरूरी उत्पादों को इन नए नियमों से छूट मिल सकती है।
व्यापार मामलों के जानकारों के अनुसार, आने वाले समय में और भी कई फैसले लिए जा सकते हैं। हालांकि नए नियम लागू करने से पहले कंपनियों और उद्योग संगठनों को अपनी राय देने का अवसर मिलेगा। इससे कुछ उत्पादों या उद्योगों को राहत मिलने की संभावना भी बनी रहेगी।
अस्वीकरण: यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से है। किसी भी व्यापारिक या निवेश निर्णय से पहले आधिकारिक जानकारी अवश्य जांचें।
