भारत में शहरी परिवहन को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। देश का पहला Air Taxi अब फुल-स्केल प्रोटोटाइप के रूप में सामने आ चुका है और इसे 2028 तक व्यावसायिक रूप से शुरू करने की योजना है।
सात साल की रिसर्च और लगातार विकास के बाद भारत का पहला Air Taxi अब प्रयोगशाला से निकलकर फुल-स्केल प्रोटोटाइप के रूप में सामने आ गया है। चेन्नई की ईप्लेन कंपनी ने इस इलेक्ट्रिक उड़ने वाले वाहन का अनावरण किया है, जिसे 2028 तक व्यावसायिक रूप से शुरू करने की तैयारी चल रही है। कंपनी का दावा है कि यह शहरी परिवहन के तरीके को बदल सकता है और कम दूरी की यात्रा को पहले से कहीं अधिक तेज बना देगा।
भारत का पहला Air Taxi अब व्यावसायिक उड़ान की ओर
आईआईटी मद्रास से शुरू हुई इस परियोजना को अब करीब 2,000 किलोग्राम वजन वाले विमान के रूप में विकसित किया गया है। यह हेलीकॉप्टर की तरह सीधा उड़ान भर सकता है और इसमें एक पायलट के साथ दो यात्रियों के बैठने की व्यवस्था है। एक बार पूरी तरह चार्ज होने पर यह लगभग 100 किलोमीटर तक उड़ान भर सकेगा। कंपनी का कहना है कि सेवा शुरू होने के बाद इसका किराया सामान्य कैब सेवा से करीब ढाई गुना तक हो सकता है।
कंपनी के अनुसार यह अपने आकार के हिसाब से दुनिया के सबसे छोटे इलेक्ट्रिक उड़ने वाले टैक्सी मॉडलों में से एक है। इसका डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है कि इसे शहरों में सीमित जगह पर भी आसानी से संचालित किया जा सके। फिलहाल इसका परीक्षण जारी है और 2027 के अंत तक सभी जरूरी उड़ान परीक्षण पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है।
Air Taxi की प्रमुख विशेषताएं
- रेंज: एक चार्ज में लगभग 100 किलोमीटर
- क्षमता: 1 पायलट और 2 यात्री
- टेक्नोलॉजी: इलेक्ट्रिक eVTOL
- लॉन्च लक्ष्य: वर्ष 2028
- विशेषता: हेलीकॉप्टर की तरह सीधी उड़ान और लैंडिंग
विकास, परीक्षण और निवेश की तैयारी
इस परियोजना की शुरुआत 2019 में हुई थी और अब तक कंपनी को लगभग 2 करोड़ डॉलर की फंडिंग मिल चुकी है। आने वाले महीनों में कंपनी अतिरिक्त निवेश जुटाने की भी तैयारी कर रही है। इसके बाद सरकार की रिसर्च और इनोवेशन योजना के तहत भी वित्तीय सहयोग मिलने की संभावना है, जिससे विकास की रफ्तार और तेज हो सकती है।
कंपनी के बोर्ड में विमानन और तकनीक दोनों क्षेत्रों के अनुभवी लोग शामिल हैं। उनका मानना है कि इस वाहन का उद्देश्य लंबी दूरी तय करना नहीं बल्कि शहरों के भीतर तेज और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराना है। इसलिए इसे खास तौर पर छोटी दूरी के सफर और तेज आवाजाही को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
eVTOL Startup के सामने बड़ी चुनौतियां
- मुख्य उपयोग: एयर एम्बुलेंस और शहरी यात्रा
- सुरक्षा: कई मोटर आधारित डिजाइन
- जरूरत: सरकारी मंजूरी और सुरक्षित संचालन
- साझेदारी: अस्पताल, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक्स कंपनियां
- लक्ष्य: भरोसेमंद और किफायती सेवा
eVTOL तकनीक और Startup की भविष्य की योजना
ईप्लेन का एक बड़ा लक्ष्य eVTOL तकनीक के जरिए एयर एम्बुलेंस सेवा भी उपलब्ध कराना है। इसी वजह से इसमें एक पायलट के साथ दो लोगों के बैठने की व्यवस्था रखी गई है ताकि जरूरत पड़ने पर मरीज और मेडिकल स्टाफ दोनों सफर कर सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की सेवा गंभीर मरीजों को कम समय में अस्पताल पहुंचाने में काफी मददगार साबित हो सकती है।
कंपनी का दावा है कि इसके डिजाइन में कई छोटे मोटर लगाए गए हैं, जिससे किसी एक मोटर में खराबी आने पर भी बाकी सिस्टम विमान को सुरक्षित उड़ाने में सक्षम रहेगा। यही तकनीक इसे कई विदेशी मॉडलों से अलग बनाती है, जहां घूमने वाले हिस्सों के कारण तकनीकी जोखिम अधिक हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल अच्छी तकनीक होने से सफलता नहीं मिलेगी। किसी भी Startup के लिए जरूरी होगा कि वह सरकारी मंजूरी, सुरक्षित संचालन, कम लागत में निर्माण और मजबूत कारोबारी मॉडल पर भी बराबर ध्यान दे। इसके अलावा अस्पतालों, हवाई अड्डों, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और सरकारी एजेंसियों के साथ साझेदारी भी इस क्षेत्र की सफलता में अहम भूमिका निभाएगी।
भारत में इलेक्ट्रिक उड़ने वाली टैक्सी को लेकर प्रतिस्पर्धा भी तेज हो रही है। कई घरेलू और विदेशी कंपनियां इस क्षेत्र में निवेश कर रही हैं। ऐसे में आने वाले वर्षों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सी कंपनी सबसे पहले सुरक्षित, किफायती और भरोसेमंद सेवा शुरू कर पाती है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो 2028 तक भारत के बड़े शहरों में लोगों को सड़क के बजाय आसमान के रास्ते यात्रा करने का नया विकल्प मिल सकता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से है। तकनीक, लॉन्च और नियामकीय मंजूरियों से जुड़े अंतिम निर्णय समय के साथ बदल सकते हैं।

