भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन 17 जुलाई से दौड़ेगी, जानें पूरा रूट

भारत की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन 17 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरी झंडी दिखाए जाने के बाद अपनी पहली यात्रा शुरू करेगी। यह ट्रेन हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर की दूरी करीब दो घंटे में तय करेगी। इस दौरान ट्रेन 12 स्टेशनों पर रुकेगी। रेलवे बोर्ड ने 8 जुलाई को इस संबंध में उत्तर रेलवे को आधिकारिक निर्देश जारी किए हैं।

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन 17 जुलाई से करेगी पहली यात्रा

निर्धारित समय के अनुसार ट्रेन संख्या 74010 सुबह 7:40 बजे जींद रेलवे स्टेशन से रवाना होगी और सुबह 9:40 बजे सोनीपत पहुंचेगी। रास्ते में यह जींद सिटी, पांडू पिंडारा, ललित खेड़ा, भांबेवां, ईशापुर खेड़ी, बुटाना, खंडराई, गोहाना, राभड़ा, लाठ, मोहाना हरियाणा और बरवासनी स्टेशनों पर रुकेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 74009 सुबह 10:40 बजे सोनीपत से चलेगी और दोपहर 1 बजे जींद पहुंचेगी। वापसी के दौरान भी सभी स्टेशन वही रहेंगे।

रेलवे बोर्ड ने उत्तर रेलवे को निर्देश दिया है कि उद्घाटन के बाद नियमित यात्री सेवा भी जल्द शुरू की जाए। हालांकि नियमित संचालन की तारीख अभी तय नहीं की गई है। फिलहाल 17 जुलाई को यह ट्रेन विशेष उद्घाटन सेवा के रूप में चलाई जाएगी।

🚆 हाइड्रोजन ट्रेन की प्रमुख जानकारी

  • उद्घाटन: 17 जुलाई
  • रूट: जींद – सोनीपत
  • दूरी: 89 किलोमीटर
  • यात्रा समय: करीब 2 घंटे
  • स्टॉपेज: 12 स्टेशन
  • उद्घाटन सेवा: विशेष ट्रेन के रूप में संचालन

रूट, समय और संचालन की पूरी जानकारी

पहले जारी जानकारी के अनुसार यह ट्रेन एक दिन में जींद और सोनीपत के बीच दो चक्कर लगाएगी और कुल 356 किलोमीटर का सफर तय करेगी। ट्रेन में 10 डिब्बे हैं, जिनमें 682 सीटें उपलब्ध हैं और कुल लगभग 2,600 यात्रियों के सफर करने की क्षमता है।

परीक्षण के दौरान इस ट्रेन ने 120 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार हासिल की थी, लेकिन नियमित सेवा के दौरान इसकी अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा रखी जाएगी।

⚙️ तकनीक और सुरक्षा की खास बातें

  • ट्रेन प्रकार: 10 डिब्बों वाली हाइड्रोजन डीईएमयू
  • सीटें: 682
  • कुल क्षमता: लगभग 2,600 यात्री
  • अधिकतम परिचालन गति: 75 किमी/घंटा
  • ईंधन: हाइड्रोजन फ्यूल सेल
  • सुरक्षा: पहले तीन महीनों तक प्रशिक्षित तकनीकी टीम साथ रहेगी

हाइड्रोजन तकनीक से पर्यावरण को मिलेगा लाभ

रेलवे बोर्ड ने मई 2026 में देश की पहली 10 डिब्बों वाली हाइड्रोजन डीईएमयू ट्रेन को मंजूरी दी थी। यह ट्रेन डीजल की जगह हाइड्रोजन फ्यूल सेल की मदद से चलती है, जिससे पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचता है。

सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेलवे मंत्रालय ने फैसला किया है कि संचालन के पहले तीन महीनों तक ट्रेन के साथ हाइड्रोजन तकनीक में प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारी भी मौजूद रहेंगे। यदि यात्रा के दौरान कोई तकनीकी समस्या आती है तो यह टीम तुरंत उसे ठीक करने का काम करेगी।

Disclaimer: यह जानकारी रेलवे बोर्ड और संबंधित आधिकारिक सूचनाओं पर आधारित है। संचालन कार्यक्रम में आवश्यकता अनुसार बदलाव संभव है।

Gourav Kumar Singh

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