यूरोप में जून महीने के दौरान पड़ी भीषण गर्मी ने हजारों लोगों की जान ले ली। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार इस हीटवेव से पूरे यूरोप में करीब 20 हजार लोगों की मौत हुई है। इसे महाद्वीप के इतिहास की सबसे व्यापक और सबसे तीव्र गर्मी की लहरों में से एक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते वैश्विक तापमान ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
यूरोप में भीषण हीटवेव से हजारों लोगों की मौत
जर्मनी में तापमान 41.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर है। शुरुआती सरकारी आंकड़ों के अनुसार वहां करीब 5,500 लोगों की मौत हुई है। वहीं इंग्लैंड और वेल्स में जून की इस भीषण गर्मी के दौरान लगभग 2,700 लोगों ने अपनी जान गंवाई। तीन दिनों के सबसे गर्म दौर में हर दिन करीब 440 लोगों की मौत दर्ज की गई।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस हीटवेव के दौरान हुई 40 प्रतिशत से ज्यादा मौतें मानव गतिविधियों के कारण बढ़े वैश्विक तापमान के बिना नहीं होतीं। वैज्ञानिकों का कहना है कि जीवाश्म ईंधन के लगातार इस्तेमाल से वातावरण में प्रदूषण बढ़ रहा है, जिससे भविष्य में ऐसी भीषण गर्मी की घटनाएं और ज्यादा देखने को मिल सकती हैं।
🌡️ यूरोप हीटवेव के प्रमुख आंकड़े
- कुल अनुमानित मौतें: करीब 20 हजार
- जर्मनी का अधिकतम तापमान: 41.7 डिग्री सेल्सियस
- जर्मनी में मौतें: करीब 5,500
- इंग्लैंड और वेल्स में मौतें: लगभग 2,700
- सबसे गर्म दिनों में: प्रतिदिन करीब 440 मौतें
- मुख्य कारण: भीषण गर्मी और जलवायु परिवर्तन
जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई हीटवेव की गंभीरता
ब्रिटेन में हालात इतने खराब हो गए कि स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी और मौसम विभाग को लगातार तीन दिनों तक रेड अलर्ट जारी करना पड़ा। इस साल मई में भी लंदन में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया था, जबकि जून में कई इलाकों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया। शोधकर्ताओं का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक अतिरिक्त बढ़ोतरी हुई।
ब्रिटेन की स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, 2020 से 2024 के बीच गर्मी की लहरों के कारण 10 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था भविष्य की ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है। उनका यह भी मानना है कि यदि एल नीनो का प्रभाव बढ़ा तो अगले साल गर्मी और ज्यादा गंभीर हो सकती है।
⚠️ विशेषज्ञों की चेतावनी
- जलवायु परिवर्तन: हीटवेव की तीव्रता बढ़ने की बड़ी वजह
- प्रदूषण: जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल से जोखिम बढ़ा
- ब्रिटेन: लगातार तीन दिन रेड अलर्ट
- एल नीनो: अगले वर्ष और गंभीर गर्मी की आशंका
- सुरक्षा चुनौती: मौजूदा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत
गर्मी से जुड़े हादसों में भी बढ़ी मौतों की संख्या
जर्मनी में केवल गर्मी ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े हादसों में भी बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। रॉबर्ट कॉख इंस्टीट्यूट के अनुसार, इस साल अब तक कम से कम 5,120 लोगों की मौत गर्मी से जुड़ी वजहों से हुई है, जिनमें ज्यादातर 75 वर्ष या उससे अधिक उम्र के थे। वहीं जून में 99 लोगों की डूबने से मौत हुई, जो वर्ष 2003 के बाद किसी एक महीने में सबसे अधिक है। इनमें अधिकांश युवा पुरुष थे, जो गर्मी से राहत पाने के लिए पानी में गए थे।
Disclaimer: यह जानकारी उपलब्ध शुरुआती रिपोर्टों और आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है। अंतिम जांच और अपडेट के बाद आंकड़ों में बदलाव संभव है।
