भारत कई बड़े देशों और क्षेत्रों के साथ व्यापार समझौते (FTA) को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। इसके अलावा यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, चिली, पेरू, इजरायल, कनाडा और मालदीव जैसे देशों के साथ भी नए समझौतों पर चर्चा चल रही है।
भारत का लक्ष्य नए व्यापार समझौतों के जरिए निर्यात बढ़ाना, विदेशी निवेश आकर्षित करना और भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
अमेरिका और यूरोपीय संघ समेत कई देशों से FTA पर बातचीत
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, इन समझौतों का उद्देश्य भारतीय कंपनियों और निर्यातकों को विदेशी बाजारों में बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। सरकार का लक्ष्य व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ निवेश को आकर्षित करना और घरेलू उद्योग, किसानों व कामगारों को फायदा पहुंचाना है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि भारत अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर बातचीत कर रहा है। वहीं भारत और यूरोपीय संघ के बीच FTA वार्ता 27 जनवरी 2026 को पूरी हो चुकी है।
कई देशों के साथ व्यापार संबंध मजबूत करने की तैयारी
सरकार कई अन्य देशों के साथ भी व्यापार संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसमें यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन, पेरू, चिली, इजरायल, कनाडा और मालदीव शामिल हैं। इसके अलावा दक्षिण कोरिया, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया और ASEAN के साथ पहले से मौजूद समझौतों में सुधार की प्रक्रिया भी चल रही है।
इन व्यापार समझौतों से कपड़ा, परिधान और चमड़ा जैसे रोजगार देने वाले क्षेत्रों को विदेशी बाजारों तक पहुंच बढ़ाने में मदद मिल सकती है। सरकार का मानना है कि बेहतर बाजार पहुंच से भारतीय निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और देश की वैश्विक व्यापार स्थिति मजबूत होगी।
भारत के प्रमुख व्यापार समझौते
- अमेरिका के साथ FTA बातचीत जारी
- यूरोपीय संघ के साथ FTA वार्ता पूरी
- ऑस्ट्रेलिया, चिली और पेरू से चर्चा
- इजरायल, कनाडा और मालदीव के साथ बातचीत
- ASEAN और अन्य समझौतों की समीक्षा
- निर्यात बढ़ाने पर सरकार का फोकस
पुराने व्यापार समझौतों को अपडेट करने की योजना
भारत कुछ पुराने समझौतों को भी अपडेट करने पर काम कर रहा है। इनमें भारत-दक्षिण कोरिया CEPA, भारत-श्रीलंका ETCA और भारत-ऑस्ट्रेलिया CECA जैसे समझौते शामिल हैं। ASEAN-India Trade in Goods Agreement की समीक्षा भी जारी है।
सरकार ने बताया कि भारतीय निर्यातकों को आने वाली गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। इनमें तकनीकी मानक, गुणवत्ता जांच, नियमों से जुड़ी आवश्यकताएं और अन्य प्रक्रियाएं शामिल हैं।
Export Promotion Mission से निर्यात को बढ़ावा
- कुल योजना राशि: 25,060 करोड़ रुपये
- अवधि: 2025-26 से 2030-31 तक
- लाभार्थी: निर्यातक, MSME और स्टार्टअप
- छोटे कारोबारियों को सहायता देने का प्रयास
- वैश्विक बाजार तक पहुंच बढ़ाने की योजना
ई-कॉमर्स निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर
इसके साथ ही सरकार ने सीमा पार ई-कॉमर्स निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भी नए कदम उठा रही है। इसके तहत ई-कॉमर्स Export Hubs, निर्यात प्रक्रिया में सुधार और छोटे कारोबारियों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की योजनाओं पर काम किया जा रहा है।
भारत लगातार नए व्यापार साझेदारों के साथ संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहा है ताकि घरेलू उत्पादों को दुनिया के अधिक बाजारों तक पहुंच मिल सके और देश का निर्यात क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ सके।
यह जानकारी केवल सामान्य उद्देश्य के लिए है। व्यापार नियमों से जुड़े अंतिम निर्णय सरकार की आधिकारिक घोषणा पर निर्भर करेंगे।
