सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) ने अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की विशेष डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा के तहत 50 करोड़ डॉलर का विदेशी कर्ज जुटाया है। कंपनी का कहना है कि दिसंबर तक यह सुविधा उपलब्ध रहेगी और जरूरत पड़ने पर वह इसके जरिए आगे भी विदेश से धन जुटाने पर विचार करेगी। हाल के महीनों में ईंधन की बिक्री कम मार्जिन पर होने और रसोई गैस पर बढ़ते नुकसान की वजह से कंपनी की फंडिंग जरूरत बढ़ी है।
IOC ने RBI स्वैप सुविधा के तहत जुटाया विदेशी कर्ज
कंपनी के चेयरमैन अरविंदर सिंह सहनी ने बताया कि यह कर्ज पिछले सप्ताह लिया गया है। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में अतिरिक्त धन की जरूरत हुई तो इसी सुविधा का इस्तेमाल किया जा सकता है। RBI की यह व्यवस्था सरकारी कंपनियों को कम लागत पर विदेशी कर्ज लेने और विदेशी मुद्रा जोखिम को नियंत्रित करने में मदद करती है। इससे कंपनियों के लिए Overseas Borrowing पहले की तुलना में सस्ता हो जाता है।
अप्रैल से जून तिमाही के दौरान कंपनी का कुल कर्ज लगभग 20,000 करोड़ रुपये बढ़ गया। इसकी बड़ी वजह पेट्रोल और डीजल की बिक्री बाजार भाव से कम कीमत पर करना और एलपीजी पर लगातार होने वाला नुकसान रहा। ऐसे में कंपनी ने अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत रखने के लिए अतिरिक्त धन जुटाने का फैसला किया।
IOC की फंडिंग और कर्ज की मुख्य जानकारी
- विदेशी कर्ज: 50 करोड़ डॉलर
- सुविधा: RBI डॉलर-रुपया स्वैप
- उद्देश्य: वित्तीय जरूरतें और कम लागत पर फंडिंग
- कुल कर्ज में बढ़ोतरी: लगभग 20,000 करोड़ रुपये
- मुख्य कारण: कम मार्जिन और एलपीजी पर नुकसान
ऊर्जा आपूर्ति मजबूत रखने की तैयारी
पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए कंपनी ने ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए भी कई कदम उठाए हैं। IOC का कहना है कि उसके पास अगले 45 से 50 दिनों की जरूरत के लिए कच्चे तेल और रसोई गैस की व्यवस्था है। अगस्त महीने की पूरी और सितंबर के अधिकांश हिस्से की खरीद पहले ही तय की जा चुकी है। कंपनी का मानना है कि फिलहाल कच्चे तेल की उपलब्धता को लेकर कोई बड़ी चिंता नहीं है।
मध्य पूर्व में आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए कंपनी ने दूसरे देशों से भी तेल खरीद बढ़ाई है। पश्चिम अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, ब्राजील और वेनेजुएला जैसे देशों से आयात में बढ़ोतरी की गई है। वहीं रूस से आने वाला कच्चा तेल अभी भी कंपनी के कुल आयात का बड़ा हिस्सा बना हुआ है। यदि जरूरत पड़ी तो सऊदी अरब से अफ्रीका के लंबे समुद्री मार्ग के जरिए भी तेल मंगाने की तैयारी पूरी है।
IOC की आपूर्ति और वित्तीय स्थिति
- कच्चे तेल का स्टॉक: 45 से 50 दिनों की व्यवस्था
- नए आयात स्रोत: अल्जीरिया और अजरबैजान सहित कई देश
- शुद्ध घाटा: 1,141.09 करोड़ रुपये
- मुख्य चुनौती: कम Marketing Margin
- सकारात्मक पक्ष: रिफाइनरी प्रोसेसिंग और घरेलू बिक्री में बढ़ोतरी
नए आयात स्रोत और कारोबार की स्थिति
एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कंपनी ने नए देशों से भी खरीद शुरू की है। अब अल्जीरिया और अजरबैजान जैसे देशों से भी रसोई गैस मंगाई जा रही है, ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो और आपूर्ति लगातार बनी रहे।
वित्तीय नतीजों की बात करें तो चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी को 1,141.09 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में उसे 6,808.12 करोड़ रुपये का लाभ हुआ था। कम Marketing Margin का असर सीधे कंपनी की कमाई पर पड़ा। हालांकि इस दौरान रिफाइनरी में कच्चे तेल की प्रोसेसिंग और घरेलू बिक्री में बढ़ोतरी दर्ज की गई, लेकिन निर्यात में गिरावट देखने को मिली।
आगे की रणनीति पर कंपनी का फोकस
कंपनी का मानना है कि मजबूत आपूर्ति व्यवस्था, अलग-अलग देशों से खरीद और बेहतर वित्तीय योजना के जरिए आने वाले समय में कारोबार को स्थिर बनाए रखने की कोशिश जारी रहेगी। बदलते वैश्विक हालात के बीच IOC अपनी ऊर्जा सुरक्षा और वित्तीय जरूरतों दोनों पर एक साथ ध्यान दे रही है।
