ईशा अंबानी ने बताया कि कॉलेज के दिनों में इंटरनेट से जुड़ी एक परेशानी ने उन्हें और उनके भाई आकाश अंबानी को भारत में डिजिटल सुविधाओं की स्थिति पर सोचने के लिए प्रेरित किया था। गुरुवार को जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ से जुड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने इस घटना को याद किया।
उन्होंने बताया कि जब वह और आकाश अमेरिका में पढ़ाई कर रहे थे, तब छुट्टियों में मुंबई आए थे। इसी दौरान उन्हें कॉलेज का एक असाइनमेंट इंटरनेट के माध्यम से जमा करना था, लेकिन इंटरनेट काम नहीं कर रहा था। इसके कारण वह अपना काम जमा नहीं कर पाईं।
इंटरनेट की परेशानी से आया जियो शुरू करने का विचार
ईशा अंबानी के अनुसार, इस घटना के बाद दोनों भाई-बहन ने चर्चा की कि भारत में उन्हें अमेरिका जैसी इंटरनेट सुविधा क्यों नहीं मिल रही है। उनके मन में सवाल उठा कि देश में भी लोगों को तेज और बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी क्यों नहीं मिलनी चाहिए। आकाश अंबानी का मानना था कि इस समस्या का समाधान ऐसी डिजिटल तकनीक वाली कंपनी बनाकर किया जा सकता है, जो देश में इंटरनेट की जरूरतों को पूरा करे। आगे चलकर इसी सोच ने रिलायंस जियो की शुरुआत का रास्ता तैयार किया।
जियो की शुरुआत से जुड़ी प्रमुख बातें
- ईशा और आकाश अंबानी को कॉलेज के एक असाइनमेंट के दौरान इंटरनेट की परेशानी का सामना करना पड़ा था।
- इस अनुभव ने भारत में बेहतर इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने के विचार को आगे बढ़ाया।
- जियो ने सितंबर 2016 में व्यावसायिक रूप से अपनी सेवाएं शुरू की थीं।
- कंपनी की शुरुआत के बाद भारत में मोबाइल डेटा का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा।
जियो की शुरुआत के बाद भारत में बढ़ा मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल
रिलायंस जियो ने सितंबर 2016 में व्यावसायिक रूप से अपनी सेवाएं शुरू की थीं। शुरुआत में कंपनी ने ग्राहकों को मुफ्त कॉलिंग और डेटा की सुविधा दी। इससे बड़ी संख्या में लोगों के लिए मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल आसान हुआ। जियो के बाजार में आने के बाद दूरसंचार कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ गई और डेटा की कीमतों में भी काफी कमी आई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जियो की शुरुआत से पहले भारत में हर महीने लगभग 20 करोड़ जीबी मोबाइल डेटा का इस्तेमाल होता था। वर्ष 2018 तक यह खपत बढ़कर करीब 370 करोड़ जीबी हो गई थी।
मुफ्त कॉलिंग और डेटा से बदला दूरसंचार बाजार
जियो की शुरुआती सेवाओं ने मोबाइल इंटरनेट को अधिक लोगों तक पहुंचाने में भूमिका निभाई। कम कीमतों और मुफ्त कॉलिंग की पेशकश के कारण दूरसंचार क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ी। इससे दूसरी कंपनियों को भी अपनी योजनाओं और सेवाओं में बदलाव करना पड़ा। मोबाइल डेटा की बढ़ती खपत ने भारत में डिजिटल सेवाओं के विस्तार को भी गति दी।
मोबाइल डेटा इस्तेमाल में बड़ी बढ़ोतरी
- जियो की शुरुआत से पहले मासिक मोबाइल डेटा खपत लगभग 20 करोड़ जीबी थी।
- वर्ष 2018 तक यह खपत करीब 370 करोड़ जीबी हो गई थी।
- कम कीमत वाले डेटा और मुफ्त कॉलिंग ने इंटरनेट के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया।
- दूरसंचार कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हुई।
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ की तैयारी
करीब एक दशक बाद अब जियो प्लेटफॉर्म्स शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रही है। यह रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और दूरसंचार कारोबार से जुड़ी कंपनी है। कंपनी ने 14 अक्टूबर को आईपीओ से संबंधित दस्तावेज जमा किए। इसके लिए प्रति शेयर 1,065 रुपये से 1,119 रुपये का मूल्य दायरा तय किया गया है। आईपीओ के तहत अधिकतम 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। इसमें निवेश के लिए आवेदन 21 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक किया जा सकेगा, जबकि बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया 19 अक्टूबर को निर्धारित है।
आईपीओ से जुटाई जा सकती है 30,213 करोड़ रुपये की रकम
इस आईपीओ के माध्यम से कंपनी लगभग 30,213 करोड़ रुपये जुटा सकती है। इससे मिलने वाली रकम का एक हिस्सा रिलायंस जियो इन्फोकॉम के कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल किया जाएगा। बाकी राशि का उपयोग कंपनी अपने सामान्य कारोबारी कामकाज और अन्य जरूरतों के लिए करेगी। रिलायंस ने वर्ष 2025 की वार्षिक आम बैठक में जियो प्लेटफॉर्म्स को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने की योजना की जानकारी दी थी। इसके बाद कंपनी ने 19 जून 2026 को शुरुआती दस्तावेज जमा किए और 28 अगस्त को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड से आवश्यक प्रक्रिया के तहत टिप्पणी पत्र प्राप्त किया।
रिलायंस की लंबी अवधि की कारोबारी रणनीति
ईशा अंबानी ने इस दौरान यह भी बताया कि रिलायंस अपने कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए लंबी अवधि की योजना, बड़े स्तर पर विस्तार और योजनाओं को सही तरीके से लागू करने पर ध्यान देती है। उनके अनुसार, कंपनी किसी नए कारोबार को केवल तत्काल मिलने वाले लाभ के आधार पर नहीं देखती, बल्कि यह समझने की कोशिश करती है कि आने वाले कई वर्षों में वह उद्योग में कितना बदलाव ला सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यवसाय को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए वित्तीय अनुशासन बनाए रखना जरूरी है।
रिलायंस ने कर्ज मुक्त बनने का लक्ष्य कैसे हासिल किया?
उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज को कर्ज से मुक्त बनाने के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। वर्ष 2019 में मुकेश अंबानी ने मार्च 2021 तक कंपनी को कर्ज मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा था। रिलायंस ने जून 2020 में घोषणा की कि उसने तय समय से पहले ही यह लक्ष्य हासिल कर लिया है। इस दौरान जियो प्लेटफॉर्म्स में निवेश और राइट्स इश्यू से जुटाई गई रकम की अहम भूमिका रही।
धीरूभाई अंबानी की सोच को आगे बढ़ाने की कोशिश
ईशा अंबानी ने अपने दादा धीरूभाई अंबानी की सोच का जिक्र करते हुए कहा कि परिवार की नई पीढ़ी भी उनके उस विचार को आगे बढ़ाना चाहती है, जिसके तहत देश के लोगों को आर्थिक विकास में भाग लेने के अधिक अवसर मिलें। धीरूभाई अंबानी ने वर्ष 1977 में रिलायंस इंडस्ट्रीज को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराया था। आज कंपनी डिजिटल सेवाओं और दूरसंचार सहित कई क्षेत्रों में अपना कारोबार बढ़ा रही है।
जियो के आईपीओ का निवेशकों के लिए क्या महत्व है?
जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रस्तावित आईपीओ भारत के डिजिटल और दूरसंचार क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। कंपनी की शुरुआत के पीछे इंटरनेट को अधिक सुलभ बनाने का विचार था, जबकि अब उसका कारोबार बड़े ग्राहक आधार और डिजिटल सेवाओं तक पहुंच चुका है। निवेशकों को आईपीओ में आवेदन करने से पहले कंपनी के आधिकारिक दस्तावेज, वित्तीय स्थिति, मूल्यांकन और निवेश से जुड़े जोखिमों का अध्ययन करना चाहिए।
कंपनी और उसकी सेवाओं से जुड़ी जानकारी के लिए जियो की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है। आईपीओ से संबंधित दस्तावेजों और नियामकीय जानकारी के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड की वेबसाइट भी उपयोगी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. जियो शुरू करने का विचार ईशा और आकाश अंबानी को कैसे आया?
ईशा अंबानी के अनुसार, अमेरिका में पढ़ाई के दौरान मुंबई में छुट्टियां बिताते समय उन्हें कॉलेज का असाइनमेंट इंटरनेट से जमा करने में परेशानी हुई थी। इस अनुभव के बाद दोनों ने भारत में बेहतर इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने पर विचार किया।
2. रिलायंस जियो ने अपनी सेवाएं कब शुरू की थीं?
रिलायंस जियो ने सितंबर 2016 में व्यावसायिक रूप से अपनी सेवाएं शुरू की थीं। शुरुआत में कंपनी ने मुफ्त कॉलिंग और डेटा की सुविधा दी, जिससे मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ा और दूरसंचार कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हुई।
3. जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ का मूल्य दायरा क्या है?
लेख में दी गई जानकारी के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ का मूल्य दायरा 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है। निवेशकों को आवेदन से पहले आधिकारिक दस्तावेजों में दी गई शर्तों की पुष्टि करनी चाहिए।
4. जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कहां होगा?
प्रस्तावित योजना के अनुसार, आईपीओ से मिलने वाली रकम का एक हिस्सा रिलायंस जियो इन्फोकॉम का कर्ज चुकाने में इस्तेमाल किया जाएगा। शेष राशि कंपनी के सामान्य कारोबारी कामकाज और अन्य जरूरतों के लिए उपयोग की जा सकती है।
5. जियो की शुरुआत के बाद मोबाइल डेटा का इस्तेमाल कितना बढ़ा?
लेख में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, जियो की शुरुआत से पहले भारत में हर महीने लगभग 20 करोड़ जीबी मोबाइल डेटा इस्तेमाल होता था। वर्ष 2018 तक यह खपत बढ़कर करीब 370 करोड़ जीबी हो गई थी।
निष्कर्ष
इंटरनेट से जुड़ी एक परेशानी से शुरू हुआ विचार आगे चलकर रिलायंस जियो के कारोबार का आधार बना। जियो ने मोबाइल इंटरनेट की पहुंच बढ़ाने और दूरसंचार बाजार में प्रतिस्पर्धा तेज करने में भूमिका निभाई। अब जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रस्तावित आईपीओ कंपनी के विकास का अगला महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
अस्वीकरण
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है, निवेश सलाह नहीं। आईपीओ में निवेश से पहले आधिकारिक दस्तावेजों की जांच करें और जरूरत पड़ने पर प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।
