इजरायल में 27 अक्टूबर 2026 को होने वाले चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइज़ेनकोट के बीच मुकाबले पर दुनिया की नजर है। लेकिन इस चुनाव को समझने के लिए केवल गाजा युद्ध, ईरान और नेतन्याहू की सरकार पर ध्यान देना काफी नहीं है। इजरायल के मिजराही यहूदी मतदाता भी चुनाव की दिशा और भविष्य की नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं।
इजरायल चुनाव में Mizrahi मतदाताओं की भूमिका
मिजराही उन यहूदी समुदायों के लोगों और उनके वंशजों को कहा जाता है जिनके परिवार मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के देशों से इजरायल आए थे। 1948 में इजरायल बनने के बाद अरब देशों से बड़ी संख्या में यहूदी वहां पहुंचे। कई परिवारों ने हिंसा, भेदभाव, उत्पीड़न या अपनी संपत्ति छूट जाने जैसी मुश्किलों का सामना किया।
इजरायल पहुंचने के बाद बहुत से परिवारों को अस्थायी शिविरों में रहना पड़ा और कुछ को दूर-दराज के विकासशील कस्बों में बसाया गया। समय के साथ मिजराही समुदाय के कई लोग शिक्षा, नौकरी और कारोबार के जरिए मध्यम वर्ग तक पहुंचे। फिर भी सामाजिक और संस्थागत असमानता को लेकर चर्चा बनी हुई है।
मिजराही समुदाय इजरायल की यहूदी आबादी का बड़ा हिस्सा है। इसलिए उसके वोट किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं हैं, लेकिन लंबे समय से इस समुदाय के अनेक मतदाता नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और दक्षिणपंथी दलों का समर्थन करते रहे हैं।
🗳️ मिजराही मतदाता क्यों अहम हैं?
- समुदाय: मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका से आए यहूदी परिवारों के वंशज
- राजनीतिक असर: कई मिजराही मतदाता लंबे समय से दक्षिणपंथी दलों के समर्थक रहे हैं
- मुख्य मुद्दे: सुरक्षा, परंपरा, धर्म, परिवार और सेना में सेवा
- चुनावी महत्व: कुछ मध्यमार्गी और केंद्र-दक्षिणपंथी मतदाता गठबंधन की तस्वीर बदल सकते हैं
नेतन्याहू और आइज़ेनकोट की पृष्ठभूमि
नेतन्याहू अश्केनाजी यहूदी परिवार से आते हैं और उनकी लिकुड पार्टी को मिजराही मतदाताओं का लंबे समय से समर्थन मिलता रहा है। इसके विपरीत, गादी आइज़ेनकोट मोरक्को से आए अप्रवासी परिवार में जन्मे और इजरायल की सेना में उच्च पद तक पहुंचे। वह याशर पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ जवाबदेही, सभी के लिए सैन्य या राष्ट्रीय सेवा और 7 अक्टूबर 2023 की सुरक्षा विफलताओं की जांच जैसे मुद्दे उठा रहे हैं।
आइज़ेनकोट अपनी मोरक्को की पृष्ठभूमि को चुनाव प्रचार का मुख्य आधार नहीं बनाते। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति की पारिवारिक उत्पत्ति के बजाय उसके काम और जिम्मेदारी को महत्व मिलना चाहिए। कुछ मतदाता इसे साझा इजरायली पहचान पर जोर मानते हैं, जबकि कुछ के लिए उनकी पृष्ठभूमि समुदाय से जुड़ाव का संकेत हो सकती है।
मतदाताओं के लिए सुरक्षा, धर्म और सेना की सेवा क्यों जरूरी है?
मिजराही मतदाताओं के बीच विचार एक जैसे नहीं हैं। कुछ लोग न्यायपालिका, मीडिया और विश्वविद्यालयों जैसी संस्थाओं को पुराने अश्केनाजी अभिजात वर्ग के प्रभाव से जोड़कर देखते हैं। ऐसे मतदाताओं को आशंका है कि उदारवादी दल उनकी धार्मिक परंपराओं या सामाजिक मूल्यों को पर्याप्त सम्मान नहीं देते। हालांकि, यह नजरिया पूरे समुदाय पर लागू नहीं किया जा सकता।
सुरक्षा भी चुनाव का बड़ा मुद्दा है। 7 अक्टूबर 2023 के हमले और उसके बाद हुए युद्ध ने कई इजरायली मतदाताओं की चिंताओं को और गहरा किया है। कुछ लोग मानते हैं कि देश की सुरक्षा के लिए मजबूत सेना और सतर्क नीति जरूरी है। नेतन्याहू की सरकार को अति-रूढ़िवादी दलों के साथ गठबंधन बनाए रखने की जरूरत है, जबकि सेना में अनिवार्य सेवा से छूट को लेकर विवाद बना हुआ है।
⚖️ चुनाव के मुख्य मुद्दे
- राष्ट्रीय सुरक्षा: गाजा, ईरान और भविष्य के हमलों से निपटने की नीति
- जवाबदेही: 7 अक्टूबर 2023 की घटनाओं की जांच और सरकारी जिम्मेदारी
- सैन्य सेवा: अलग-अलग समुदायों के लिए सेवा के नियम और छूट
- न्यायपालिका: अदालतों की भूमिका और सरकार की शक्तियों पर बहस
- गठबंधन: किसी भी दल को सरकार बनाने के लिए दूसरे दलों का समर्थन चाहिए
क्या आइज़ेनकोट मिजराही मतदाताओं को आकर्षित कर सकते हैं?
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि शिक्षित, आर्थिक रूप से आगे बढ़ रहे और केंद्र या केंद्र-दक्षिणपंथ की सोच रखने वाले मिजराही मतदाता आइज़ेनकोट पर विचार कर सकते हैं। उनके लिए सेना में नेतृत्व का अनुभव, जवाबदेही और सभी नागरिकों की सेवा जैसे मुद्दे अहम हो सकते हैं। दूसरी ओर, कुछ मतदाता उन्हें वामपंथी दलों के करीब मानकर उन पर भरोसा करने से हिचक सकते हैं।
इसलिए केवल किसी नेता की पारिवारिक पृष्ठभूमि से उसके समर्थन का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। मतदाताओं के फैसले सुरक्षा, धर्म, आर्थिक स्थिति, संस्थाओं पर भरोसे और गठबंधन की संभावनाओं जैसे कई कारणों से प्रभावित होते हैं। चुनाव से पहले के सर्वेक्षण भी अलग-अलग नतीजे दिखा सकते हैं और वे अंतिम परिणाम की गारंटी नहीं होते।
इजरायल की पहचान और भविष्य पर चुनाव का असर
मिजराही समुदाय की कहानी इजरायल की राष्ट्रीय पहचान से जुड़ी हुई है। परंपरा, परिवार और समुदाय का महत्व, क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर सतर्कता और पश्चिमी लोकतांत्रिक संस्थाओं के साथ संबंध जैसे विषय चुनावी बहस में दिखाई देते हैं। इन विचारों को केवल एक समुदाय तक सीमित करना सही नहीं होगा, क्योंकि इजरायल के अलग-अलग समूहों के बीच भी कई समानताएं और मतभेद हैं।
नेतन्याहू या आइज़ेनकोट में से जो भी सरकार बनाने में सफल होगा, उसे 120 सदस्यीय संसद में बहुमत जुटाने के लिए गठबंधन की जरूरत होगी। मिजराही मतदाताओं का समर्थन इस प्रक्रिया में भूमिका निभा सकता है, लेकिन चुनाव का परिणाम कई दलों और मतदाता समूहों के फैसलों पर निर्भर करेगा। इजरायल के चुनाव और दलों की स्थिति पर ताजा जानकारी के लिए Associated Press की यह रिपोर्ट भी पढ़ी जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. मिजराही यहूदी कौन हैं?
मिजराही यहूदी आम तौर पर उन यहूदी समुदायों और उनके वंशजों के लिए इस्तेमाल होने वाला नाम है जिनकी पारिवारिक जड़ें मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में रही हैं। उनके अनुभव और राजनीतिक विचार एक जैसे नहीं हैं।
2. इजरायल का चुनाव कब होना है?
दिए गए चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, इजरायल में राष्ट्रीय चुनाव 27 अक्टूबर 2026 को होना तय है। मतदान के बाद सरकार बनाने के लिए दलों को संसद में पर्याप्त समर्थन जुटाना होगा।
3. गादी आइज़ेनकोट कौन हैं?
गादी आइज़ेनकोट इजरायल के पूर्व सेना प्रमुख और याशर पार्टी के नेता हैं। उनके चुनावी मुद्दों में सरकारी जवाबदेही, सुरक्षा से जुड़ी जांच और सैन्य या राष्ट्रीय सेवा के नियम शामिल हैं।
4. मिजराही मतदाता नेतन्याहू का समर्थन क्यों करते रहे हैं?
कई मिजराही मतदाताओं को दक्षिणपंथी दलों की धार्मिक परंपराओं, राष्ट्रीय सुरक्षा और समुदाय से जुड़े मूल्यों पर जोर पसंद आता है। हालांकि, सभी मिजराही मतदाता एक ही पार्टी को वोट नहीं देते।
5. क्या मिजराही वोट चुनाव का परिणाम तय करेंगे?
उनका समर्थन महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन परिणाम केवल एक समुदाय पर निर्भर नहीं है। विभिन्न दलों का प्रदर्शन, दूसरे मतदाता समूहों के फैसले और सरकार बनाने के लिए होने वाली गठबंधन वार्ता भी अहम होगी।
निष्कर्ष
इजरायल का चुनाव केवल नेतन्याहू और आइज़ेनकोट के बीच मुकाबला नहीं है। इसमें सुरक्षा, धर्म, न्यायपालिका, सेना में सेवा और राष्ट्रीय पहचान जैसे मुद्दे जुड़े हैं। मिजराही मतदाता इन बहसों में अहम भूमिका निभा सकते हैं, लेकिन अंतिम परिणाम कई समुदायों और दलों के फैसलों से तय होगा।
अस्वीकरण: यह लेख सार्वजनिक रिपोर्टों और विश्लेषण पर आधारित है। चुनावी परिस्थितियां बदल सकती हैं; पाठक किसी निष्कर्ष से पहले नवीनतम विश्वसनीय स्रोतों की जांच करें।
