कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को पैरा पावरलिफ्टिंग का पहला पदक दिलाकर झंडू कुमार ने इतिहास रच दिया। बिहार के नालंदा से आने वाले इस खिलाड़ी ने संघर्षों से भरे सफर के बाद ग्लासगो में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।
पैरा पावरलिफ्टर झंडू कुमार ने ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने पुरुषों की हेवीवेट स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत को इस प्रतियोगिता में पैरा पावरलिफ्टिंग का पहला पदक दिलाया। उनकी इस उपलब्धि ने देश के खेल प्रेमियों को गर्व का मौका दिया और भारतीय दल की शुरुआत भी शानदार रही।
कॉमनवेल्थ गेम्स में झंडू कुमार ने रचा इतिहास
मुकाबले में झंडू कुमार ने पहले प्रयास में 181 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इसके बाद दूसरे प्रयास में उन्होंने 190 किलोग्राम वजन उठाकर खुद को पदक की दौड़ में मजबूत कर लिया। तीसरे प्रयास में उन्होंने 196 किलोग्राम उठाने की कोशिश की, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद 190 किलोग्राम के सफल प्रयास और 130.9 अंक के साथ उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम कर लिया।
बिहार के नालंदा जिले के हरनौत के रहने वाले झंडू कुमार का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। बचपन से ही वह पोलियो से प्रभावित रहे, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था और उनके पिता सड़क पर सब्जियां बेचकर घर चलाते थे। झंडू भी पिता के साथ आलू और प्याज बेचने में मदद करते थे। कोरोना महामारी के दौरान परिवार की आय बढ़ाने के लिए उन्होंने E-rickshaw भी चलाया।
झंडू कुमार की उपलब्धि
- प्रतियोगिता: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026
- खेल: पैरा पावरलिफ्टिंग
- स्पर्धा: पुरुष हेवीवेट
- सफल लिफ्ट: 190 किलोग्राम
- उपलब्धि: भारत का पहला पैरा पावरलिफ्टिंग पदक
संघर्ष से सफलता तक का सफर
उन्होंने वर्ष 2017 में खेलों की शुरुआत शॉट पुट और डिस्कस थ्रो से की थी। बाद में उन्होंने Powerlifting को अपना खेल बनाया। इस खेल में आगे बढ़ने के लिए उन्हें प्रशिक्षण, यात्रा और उपकरणों पर काफी खर्च करना पड़ता था। आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने वर्ष 2023 में अपनी ई-रिक्शा तक बेच दी, ताकि प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकें और अभ्यास जारी रख सकें।
उसी साल उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया, जब पैरालंपिक पदक विजेता राजिंदर सिंह रहलू ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। उन्होंने झंडू कुमार को भारतीय खेल प्राधिकरण के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र, गांधीनगर में प्रशिक्षण का मौका दिलाया। वहां कड़ी मेहनत और बेहतर मार्गदर्शन के दम पर झंडू ने लगातार शानदार प्रदर्शन किया और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
करियर की प्रमुख उपलब्धियां
- राष्ट्रीय रिकॉर्ड: 205 किलोग्राम
- खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025: 206 किलोग्राम
- बीजिंग World Cup 2025: कांस्य पदक
- एशियन एवं ओशिनिया चैंपियनशिप: कांस्य पदक
- कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: कांस्य पदक
भारत के लिए खास उपलब्धि
उन्होंने 72 किलोग्राम वर्ग में राष्ट्रीय चैंपियनशिप के दौरान 205 किलोग्राम वजन उठाकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। इसके बाद खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 में 206 किलोग्राम वजन उठाया। इसी प्रदर्शन के दम पर उन्होंने बीजिंग World Cup 2025 और 2026 एशियन एवं ओशिनिया चैंपियनशिप में भी कांस्य पदक जीता.
कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक जीतने के बाद झंडू कुमार ने खुशी जताते हुए कहा कि भारत के लिए पहला पदक जीतना उनके लिए बेहद खास पल है। उन्होंने कहा कि जब वह तिरंगे को ऊंचा लहराते देखते हैं तो उन्हें सबसे ज्यादा गर्व और खुशी महसूस होती है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि कठिन मेहनत, धैर्य और मजबूत इरादों से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और सार्वजनिक रिपोर्टों पर आधारित है। प्रतियोगिता से जुड़े आंकड़ों में आधिकारिक अपडेट के अनुसार बदलाव संभव है।
