Leveraged ETF: बढ़ते जोखिम से बैंक और निवेशक क्यों चिंतित हैं

अमेरिका और एशिया के बाजारों में तेजी से बढ़ रहे Leveraged ETF ने निवेशकों के साथ-साथ बैंकों के लिए भी नई चुनौतियां पैदा कर दी हैं। ये ऐसे निवेश उत्पाद हैं, जिनमें किसी शेयर के रोजाना रिटर्न का दो या तीन गुना फायदा मिलने की संभावना होती है, लेकिन इनमें जोखिम भी काफी अधिक होता है।

Leveraged ETF में बढ़ता निवेश और जोखिम

दक्षिण कोरिया में इन फंड्स की बढ़ती लोकप्रियता के बाद नियामकों ने खुदरा निवेशकों के लिए कुछ प्रतिबंध बढ़ाए हैं। इसका कारण बाजार में बढ़ती अस्थिरता है, क्योंकि अचानक बड़ी गिरावट आने पर इन फंड्स पर भारी दबाव बन सकता है।

बैंक जो इन ETF को leverage उपलब्ध कराते हैं, उन्हें भी जोखिम का सामना करना पड़ता है। इसी जोखिम को कम करने के लिए वित्तीय संस्थान अब Crash Puts जैसे विशेष विकल्पों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये एक तरह का सुरक्षा उपाय है, जिससे बाजार में बड़ी गिरावट आने पर नुकसान को सीमित किया जा सके।

Leveraged ETF की मुख्य बातें

  • रिटर्न: शेयर के दैनिक रिटर्न का 2X या 3X फायदा
  • जोखिम: अचानक गिरावट में बड़ा नुकसान
  • निवेशक: खुदरा निवेशकों की बढ़ती रुचि
  • बैंक: Leverage देने में जोखिम का सामना
  • उपाय: Crash Puts से सुरक्षा
  • बाजार: अमेरिका और एशिया में तेजी

Crash Puts से जोखिम कम करने की कोशिश

Derivatives Market में इस तरह के सौदों की गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। निवेश बैंक, hedge funds और बड़े संस्थागत निवेशक इन उत्पादों के जरिए जोखिम को दूसरे पक्ष में स्थानांतरित करने की कोशिश कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, Crash Puts की मांग इसलिए बढ़ी है क्योंकि Leveraged ETF में अचानक बड़ी गिरावट का खतरा बना रहता है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी 2X ETF से जुड़े शेयर में एक दिन में करीब 50 प्रतिशत की गिरावट आती है, तो फंड को भारी नुकसान हो सकता है।

ETF संचालन में Total Return Swaps का इस्तेमाल

इन ETF को चलाने के लिए बैंक अक्सर Total Return Swaps का उपयोग करते हैं। इसमें बैंक निवेशक को शेयर के प्रदर्शन के अनुसार रिटर्न देने का समझौता करते हैं और अपने जोखिम को कम करने के लिए अलग-अलग बाजार साधनों में निवेश करते हैं।

हालांकि, इसमें Gap Risk नाम का खतरा बना रहता है। अगर किसी शेयर की कीमत अचानक बहुत तेजी से गिर जाती है, तो ETF की संपत्ति नुकसान को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं रह सकती और इसका असर बैंक पर भी पड़ सकता है।

Leveraged ETF Risk Factors

  • Market Crash: अचानक गिरावट से बड़ा नुकसान
  • Gap Risk: तेज गिरावट में सुरक्षा कम होना
  • Leverage: ज्यादा रिटर्न के साथ ज्यादा खतरा
  • Derivatives: जटिल वित्तीय साधनों का उपयोग
  • स्थिरता: बाजार पर असर की संभावना
  • सावधानी: निवेश से पहले जोखिम समझना जरूरी

दक्षिण कोरिया में बढ़ी चिंता

दक्षिण कोरिया के बाजार में भी इसी तरह की चिंता देखी जा रही है। वहां शेयरों में रोजाना कीमत सीमा और अन्य सुरक्षा नियम मौजूद हैं, लेकिन कई दिनों तक लगातार गिरावट आने पर नुकसान बढ़ सकता है।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि Leveraged ETF की बढ़ती संख्या के कारण जोखिम प्रबंधन पहले से ज्यादा कठिन हो गया है। कई बड़े बैंक अब इस जोखिम को कम करने के लिए Crash Puts बाजार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है सावधानी

इन उत्पादों से जुड़े निवेशकों को अधिक रिटर्न का मौका मिलता है, लेकिन इसके साथ बड़ा नुकसान होने की संभावना भी रहती है। कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि leverage और कई वित्तीय संस्थानों के बीच जुड़े जोखिम भविष्य में बाजार की स्थिरता के लिए चुनौती बन सकते हैं।

दुनिया भर में Leveraged ETF का बाजार काफी बढ़ चुका है और इनमें बड़ी मात्रा में निवेश जुड़ा हुआ है। अमेरिका में ऐसे कई सौ फंड उपलब्ध हैं, जिनमें अलग-अलग शेयरों और इंडेक्स से जुड़े उत्पाद शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय innovation से नए अवसर मिलते हैं, लेकिन जब इसमें ज्यादा leverage और छिपे हुए जोखिम शामिल होते हैं तो बाजार पर इसका असर गंभीर हो सकता है। इसलिए निवेशकों को ऐसे उत्पादों में पैसा लगाने से पहले जोखिम को अच्छी तरह समझना जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह लेख निवेश संबंधी सामान्य जानकारी पर आधारित है, निवेश से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।

Gourav Kumar Singh

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Gourav Kumar Singh

Gourav Kumar Singh is the Founder and Editor of Wealth Scope News. He writes about finance, business, stock market, technology, government schemes and trending news. His mission is to provide readers with accurate, reliable and easy-to-understand information through well-researched articles.

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