महेशपुर में अवैध रेत खनन जारी, प्रशासन पर उठे सवाल

महेशपुर थाना क्षेत्र में रेत माफियाओं का दुस्साहस इस समय अपने चरम पर पहुँच चुका है। इस समस्या को लेकर मीडिया में लगातार खबरें प्रकाशित होने के बावजूद, प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण स्थानीय लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। ब्लॉक के तेलियापोखर, रोलाग्राम और बलियाडांगल पंचायत क्षेत्रों में स्थित शाहरी बांसलोई घाट, मालधारा घाट, कैराछत्तर घाट और रोलाग्राम घाट जैसे कई नदी घाटों पर, रेत का खुला और अवैध खनन बिना किसी रोक-टोक के बदस्तूर जारी है।

महेशपुर में नदी घाट से रेत ले जाते ट्रैक्टर और अवैध खनन का दृश्य
महेशपुर क्षेत्र में नदी घाटों से खुलेआम हो रहा अवैध रेत खनन और परिवहन।

 

हालात यहाँ तक पहुँच गए हैं कि दिन भर सड़कों पर रेत से लदे ट्रैक्टरों को बेधड़क दौड़ते हुए देखा जा सकता है; इसके बावजूद, संबंधित सरकारी एजेंसियाँ उचित कार्रवाई करने के बजाय पूरी तरह से मौन साधे हुए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध खनन और परिवहन का यह गोरखधंधा प्रशासन की नाक के नीचे, उनकी पूरी जानकारी में, खुलेआम चल रहा है। ब्लॉक सर्किल अधिकारी संजय कुमार सिन्हा, जिनसे इस मुद्दे पर फ़ोन पर बात की गई, के अनुसार, ट्रैक्टर मालिकों को रेत ले जाने की अनुमति तभी मिलती है जब वे *मुखिया* (गाँव के मुखिया) से चालान (अनुमति पत्र) प्राप्त कर लेते हैं। वहीं, स्थानीय लोगों का दावा है कि ज़्यादातर ट्रैक्टर बिना किसी वैध चालान के ही रेत ढो रहे हैं।

सूत्रों का दावा है कि हर ट्रैक्टर से साप्ताहिक शुल्क वसूलने पर भी चर्चा चल रही है। औपचारिक पुष्टि न होने के बावजूद, गाँव वालों के बीच इस मामले पर तीखी बहस जारी है। लोग सोच रहे हैं कि इस अवैध धंधे को कौन पैसे दे रहा है, जिससे अंततः सरकार को ही आर्थिक नुकसान हो रहा है।

गाँव वालों का दावा है कि सुबह तड़के से लेकर देर रात तक, रेत से भरे सैकड़ों ट्रैक्टर बसलोई और शाहरी नदी घाटों से महेशपुर की ओर जाते हुए दिखाई देते हैं, जो मालधारा, कैराछत्तर और रोलाग्राम से होकर गुज़रते हैं।

वाहनों की लगातार बढ़ती भीड़ ने दुर्घटनाओं की संभावना को काफ़ी बढ़ा दिया है और सड़कों को भी नुकसान पहुँचा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, रोज़ाना होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के डर के कारण, नियमित यात्रियों को अपनी जान का काफ़ी जोखिम उठाकर सफ़र करना पड़ता है।

पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि चल रहा यह अवैध खनन बसलोई नदी के अस्तित्व के लिए ख़तरा बन सकता है। चिंता जताई जा रही है कि रेत का अनियंत्रित खनन भूजल स्तर को नीचे गिरा सकता है और प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ सकता है।

शाहरी-बसलोई नदी के किनारे स्थित आदिवासी टोला घाट से भी रेत की अवैध तस्करी की शिकायतें मिल रही हैं, जो दिन और रात, दोनों समय होती है। इन शिकायतों के बावजूद, प्रशासनिक कार्रवाई के अभाव में प्रशासन के कामकाज और कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि सरकार इस अवैध धंधे को कितनी जल्दी रोक पाएगी, या फिर यह व्यवस्था रेत माफ़िया के सामने इसी तरह बेबस बनी रहेगी।

Gourav Kumar Singh

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