शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में लंबे समय तक नियमित निवेश करने वालों के लिए SIP एक लोकप्रिय तरीका माना जाता है। हालांकि निवेश की शुरुआत में कई लोगों को लगता है कि उनका पैसा बहुत धीमी गति से बढ़ रहा है।
इसका कारण यह है कि शुरुआती वर्षों में खाते में मौजूद अधिकांश राशि निवेशक द्वारा हर महीने जमा किए गए पैसों की होती है, जबकि निवेश से मिलने वाला लाभ अपेक्षाकृत कम रहता है। बाजार में उतार-चढ़ाव भी इस दौरान कुल फंड की वृद्धि को प्रभावित कर सकता है। ऐसे समय में कई निवेशक धैर्य खोकर निवेश रोक देते हैं, जबकि लंबे समय तक बने रहने पर बेहतर परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
SIP में शुरुआती बढ़त धीमी क्यों दिखती है
मान लीजिए कोई व्यक्ति हर महीने 30,000 रुपये का निवेश करता है और उसे औसतन 12 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता है। इस स्थिति में लगभग 8 साल 3 महीने बाद उसका कुल फंड करीब 50 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। इस अवधि में वह लगभग 29.70 लाख रुपये का निवेश करेगा, जबकि करीब 20.64 लाख रुपये का अनुमानित लाभ जुड़ सकता है। यानी शुरुआती 50 लाख रुपये तैयार करने में सबसे अधिक समय लगता है क्योंकि उस समय तक निवेश का आधार छोटा होता है।
इसके बाद तस्वीर बदलने लगती है। जब निवेश की कुल राशि बड़ी हो जाती है, तो उससे मिलने वाला लाभ भी तेजी से बढ़ने लगता है। यही कारण है कि अगले 50 लाख रुपये जोड़ने में पहले की तुलना में कम समय लगता है। समय बीतने के साथ फंड का आकार बढ़ता रहता है और हर नया लक्ष्य पहले से जल्दी पूरा होने लगता है। यही वजह है कि लंबे समय तक लगातार निवेश करने वाले लोगों को बाद के वर्षों में अधिक तेज़ी से संपत्ति बढ़ती हुई दिखाई देती है।
SIP उदाहरण एक नजर में
- मासिक SIP: 30,000 रुपये
- अनुमानित रिटर्न: 12 प्रतिशत सालाना
- 50 लाख तक पहुंचने का समय: लगभग 8 साल 3 महीने
- कुल निवेश: लगभग 29.70 लाख रुपये
- अनुमानित लाभ: करीब 20.64 लाख रुपये
Compounding कैसे बढ़ाता है निवेश
इस पूरी प्रक्रिया के पीछे सबसे बड़ा कारण Compounding का प्रभाव है। निवेश से मिलने वाला लाभ दोबारा उसी फंड में जुड़ता रहता है और आगे चलकर वही लाभ भी नया लाभ कमाने लगता है। धीरे-धीरे स्थिति ऐसी बन जाती है कि हर महीने जमा की जाने वाली राशि से ज्यादा योगदान पहले से मिले रिटर्न का होने लगता है। इसलिए विशेषज्ञ अक्सर सलाह देते हैं कि यदि आर्थिक स्थिति अनुमति देती है, तो बाजार के उतार-चढ़ाव से घबराकर SIP बंद करने के बजाय लंबे समय तक निवेश जारी रखना अधिक लाभदायक हो सकता है।
लंबी अवधि के निवेश की मुख्य बातें
- मुख्य लाभ: Compounding का असर
- रणनीति: नियमित SIP जारी रखें
- बाजार उतार-चढ़ाव: धैर्य बनाए रखना जरूरी
- निवेश विकल्प: Mutual Fund योजनाएं
- ध्यान रखें: निवेश लक्ष्य और जोखिम क्षमता के अनुसार निर्णय लें
निवेश से पहले इन बातों का रखें ध्यान
ध्यान देने वाली बात यह है कि ऊपर दिया गया उदाहरण केवल समझाने के उद्देश्य से है। वास्तविक रिटर्न बाजार की स्थिति, निवेश अवधि और चुनी गई Mutual Fund योजना के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा। इसलिए निवेश का फैसला अपनी वित्तीय जरूरत, जोखिम उठाने की क्षमता और लक्ष्य को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।
