कनाडा में मेटा बनाएगी 13 अरब डॉलर का AI डेटा सेंटर

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग को देखते हुए मेटा अपने वैश्विक डेटा सेंटर नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रही है। इसी दिशा में कंपनी ने कनाडा में अपने पहले डेटा सेंटर के निर्माण की घोषणा की है, जिस पर अरबों डॉलर का निवेश किया जाएगा और यह भविष्य की एआई जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सोशल मीडिया कंपनी मेटा ने कनाडा में अपना पहला डेटा सेंटर बनाने की घोषणा की है। यह अत्याधुनिक डेटा सेंटर कनाडा के अल्बर्टा प्रांत के स्टर्जन काउंटी में बनाया जाएगा। इस परियोजना पर लगभग 13 अरब कनाडाई डॉलर (करीब 9.17 अरब अमेरिकी डॉलर) का निवेश किया जाएगा। शुरुआती चरण में इसकी क्षमता 1 गीगावाट होगी, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 1.8 गीगावाट तक किया जा सकेगा।

कनाडा में मेटा का पहला AI डेटा सेंटर

🏗️ परियोजना की प्रमुख बातें

  • कंपनी: मेटा
  • स्थान: अल्बर्टा, स्टर्जन काउंटी, कनाडा
  • निवेश: 13 अरब कनाडाई डॉलर
  • प्रारंभिक क्षमता: 1 गीगावाट
  • भविष्य की क्षमता: 1.8 गीगावाट

मेटा ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए कंपनी दुनिया भर में अपने डेटा सेंटर नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रही है। अल्बर्टा में बनने वाला यह केंद्र मेटा का दुनिया भर में 33वां डेटा सेंटर होगा। कंपनी पहले ही अमेरिका में भी एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े पैमाने पर निवेश की घोषणा कर चुकी है।

अल्बर्टा सरकार का कहना है कि यह निवेश प्रांत के लिए बड़ी उपलब्धि है। सरकार पिछले कुछ वर्षों से वैश्विक टेक कंपनियों को यहां निवेश के लिए आकर्षित करने की कोशिश कर रही थी। अधिकारियों के अनुसार, प्रांत में इस तरह की कई अन्य बड़ी डेटा सेंटर परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है।

अल्बर्टा को क्यों चुना गया?

⚡ डेटा सेंटर की खास बातें

  • ऊर्जा स्रोत: प्राकृतिक गैस और ग्रिड सपोर्ट
  • बिजली खपत: लगभग 8 लाख घरों के बराबर
  • कूलिंग तकनीक: क्लोज्ड-लूप लिक्विड कूलिंग सिस्टम
  • फोकस: स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा निवेश
  • उद्देश्य: AI इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार

अल्बर्टा को इस परियोजना के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि यहां प्राकृतिक गैस आसानी से उपलब्ध है और इसकी कीमत भी अपेक्षाकृत कम है। इसके अलावा ठंडा मौसम डेटा सेंटर के सर्वर और सुपर कंप्यूटर को ठंडा रखने में मदद करता है, जिससे परिचालन लागत कम होती है।

मेटा ने कहा कि यह डेटा सेंटर जितनी बिजली इस्तेमाल करेगा, वह लगभग 8 लाख घरों की बिजली खपत के बराबर होगी। कंपनी इसके लिए नई बिजली उत्पादन और ग्रिड से जुड़ी आवश्यक सुविधाओं पर भी निवेश करेगी। साथ ही, बिजली की खपत की भरपाई के लिए स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में भी निवेश किया जाएगा।

नई तकनीक और ऊर्जा प्रबंधन पर रहेगा फोकस

कंपनी ने यह भी बताया कि डेटा सेंटर में आधुनिक क्लोज्ड-लूप लिक्विड कूलिंग सिस्टम लगाया जाएगा। इस तकनीक की मदद से पानी की खपत काफी कम होगी और यह एक सामान्य गोल्फ कोर्स की तुलना में भी कम पानी इस्तेमाल करेगा।

इस परियोजना के लिए मेटा ने अल्बर्टा की कंपनी पेम्बिना पाइपलाइन के साथ समझौता किया है, जो प्राकृतिक गैस आधारित बिजली संयंत्र विकसित कर रही है। इसके चालू होने तक शुरुआती वर्षों में स्थानीय बिजली कंपनी कैपिटल पावर इस डेटा सेंटर को बिजली उपलब्ध कराएगी।

पर्यावरण को लेकर उठीं चिंताएं

हालांकि इस परियोजना को लेकर पर्यावरण संगठनों ने चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि इतने बड़े डेटा सेंटर से ऊर्जा की मांग और कार्बन उत्सर्जन बढ़ सकता है। कुछ पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने सरकार से मांग की है कि बड़े एआई डेटा सेंटरों को मंजूरी देने से पहले पर्यावरण और मानवाधिकारों से जुड़े नियमों को और मजबूत किया जाए।


डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। परियोजना से जुड़े निर्णय और आंकड़े समय के साथ बदल सकते हैं।

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I’m Gourav Kumar Singh, a graduate by education and a blogger by passion. Since starting my blogging journey in 2020, I have worked in digital marketing and content creation. Read more about me.

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