MSME निर्यातकों की वर्किंग कैपिटल समस्या को दूर करने के लिए केंद्र सरकार नई एक्सपोर्ट फाइनेंस व्यवस्था पर विचार कर रही है। इस पहल का उद्देश्य छोटे निर्यातकों के नकदी प्रवाह को मजबूत करना और वैश्विक व्यापार में उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाना है।
MSME निर्यातकों के लिए नई एक्सपोर्ट फाइनेंस व्यवस्था पर सरकार का विचार, वर्किंग कैपिटल संकट होगा कम सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को निर्यात के दौरान आने वाली वर्किंग कैपिटल की समस्या से राहत दिलाने के लिए केंद्र सरकार नई एक्सपोर्ट फाइनेंस व्यवस्था तैयार करने पर विचार कर रही है।
MSME निर्यातकों के लिए नई एक्सपोर्ट फाइनेंस व्यवस्था पर सरकार का विचार
इस प्रस्ताव पर वित्तीय सेवा विभाग (DFS), उद्योग संगठनों और एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल्स (EPCs) के साथ मिलकर काम किया जाएगा।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब MSME निर्यातकों ने सरकार के सामने लंबी भुगतान अवधि (Payment Cycle) के कारण नकदी प्रवाह (Cash Flow) पर पड़ रहे दबाव का मुद्दा उठाया है।
📦 नई एक्सपोर्ट फाइनेंस व्यवस्था की मुख्य बातें
- उद्देश्य: MSME निर्यातकों की वर्किंग कैपिटल समस्या कम करना
- किसके साथ तैयारी: DFS, उद्योग संगठन और EPCs
- मुख्य फोकस: एक्सपोर्ट फाइनेंस व्यवस्था मजबूत करना
- लाभ: बेहतर नकदी प्रवाह और आसान कार्यशील पूंजी
- प्रभाव: छोटे निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी
- सरकार का लक्ष्य: MSME निर्यात को गति देना
सरकार नई वित्तीय व्यवस्था पर करेगी काम
MSME सचिव भरत खेड़ा ने मंगलवार को भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के एक कार्यक्रम में कहा कि निर्यात वित्तपोषण (Export Finance) ऐसा क्षेत्र है, जिस पर गंभीरता से काम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार उद्योग, DFS और एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल्स के साथ मिलकर एक उपयुक्त वित्तीय व्यवस्था तैयार करने की संभावना तलाशेगी।
उद्योग प्रतिनिधियों ने सरकार को बताया कि MSME निर्यातकों को अपने घरेलू सप्लायर्स का भुगतान 45 दिनों के भीतर करना होता है, जबकि निर्यात का भुगतान विदेशी खरीदारों से अक्सर 90 दिनों या उससे अधिक समय बाद मिलता है। इस वजह से कंपनियों के सामने वर्किंग कैपिटल का बड़ा संकट पैदा हो जाता है।
भरत खेड़ा ने माना कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण कुछ निर्यात शिपमेंट और भुगतान प्रभावित हुए हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही Emergency Credit Guarantee Scheme (ECGS) के माध्यम से MSMEs को अतिरिक्त कार्यशील पूंजी (Working Capital) उपलब्ध कराने की व्यवस्था कर चुकी है। इसके अलावा राजस्व विभाग और शिपिंग अधिकारियों के साथ मिलकर लॉजिस्टिक्स संबंधी समस्याओं को भी दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
💰 MSME के लिए सरकार की प्रमुख वित्तीय सहायता
- Credit Guarantee: ₹13 लाख करोड़ की गारंटी
- बैंक क्रेडिट: ₹10 लाख करोड़ से बढ़कर ₹37 लाख करोड़
- ECGS: 20% अतिरिक्त ऋण और 100% गारंटी कवर
- वितरित राशि: ₹1 लाख करोड़ से अधिक
- Self-Reliant India Fund: ₹58,000 करोड़ निवेश जुटाया गया
- लक्ष्य: MSMEs को आसान और सस्ती वित्तीय सहायता
सरकार की वित्तीय योजनाओं का विस्तार
उन्होंने बताया कि MSME क्षेत्र के लिए सस्ती और आसान वित्तीय उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। Credit Guarantee Scheme for Micro and Small Enterprises के तहत अब तक करीब ₹13 लाख करोड़ की गारंटी दी जा चुकी है, जिससे इस क्षेत्र में बैंक ऋण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पिछले दस वर्षों में MSMEs को मिलने वाला बैंक क्रेडिट लगभग ₹10 लाख करोड़ से बढ़कर ₹37 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
सरकार द्वारा लागू Emergency Credit Guarantee Scheme के तहत पात्र MSMEs को उनकी मौजूदा कार्यशील पूंजी सीमा के अतिरिक्त 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त ऋण और 100 प्रतिशत गारंटी कवर उपलब्ध कराया जाता है। वित्तीय सेवा विभाग के अनुसार, इस योजना के तहत अब तक ₹1 लाख करोड़ से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है।
सरकार इक्विटी फंडिंग को भी बढ़ावा दे रही है। Self-Reliant India Fund के माध्यम से अब तक करीब ₹58,000 करोड़ का निवेश जुटाया गया है और बड़ी संख्या में MSMEs को इक्विटी सहायता प्रदान की गई है।
TReDS और Samadhaan पोर्टल पर सरकार का फोकस
देरी से होने वाले भुगतान की समस्या को कम करने के लिए सरकार Trade Receivables Discounting System (TReDS) को महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म मान रही है। भरत खेड़ा ने कहा कि इस प्लेटफॉर्म पर इनवॉइस डिस्काउंटिंग में तेज़ी से वृद्धि हुई है और वर्तमान में लगभग 2.5 लाख MSMEs इससे जुड़ चुके हैं। वहीं, 45 दिनों से अधिक समय तक लंबित भुगतानों की निगरानी MSME समाधान (Samadhaan) पोर्टल के माध्यम से की जा रही है।
उन्होंने बड़ी कंपनियों से अपील की कि वे MSMEs को अपनी सप्लाई चेन का हिस्सा बनाएं, जिससे तकनीक हस्तांतरण, गुणवत्ता सुधार और घरेलू विनिर्माण को मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि गुणवत्ता प्रमाणन को महंगा मानने की धारणा सही नहीं है, क्योंकि उच्च गुणवत्ता मानकों को अपनाने से MSMEs की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ती है।
MSME पंजीकरण और FTA पर सरकार की योजना
सरकार के औपचारिककरण (Formalisation) अभियान का भी असर दिखाई दे रहा है। उद्यम (Udyam) पोर्टल पर पंजीकृत MSMEs की संख्या तीन साल पहले के लगभग 1.6 करोड़ से बढ़कर अब 8.84 करोड़ हो गई है। सरकार का मानना है कि अनुपालन में कमी, जागरूकता बढ़ने और MSME वर्गीकरण में किए गए बदलावों से यह वृद्धि संभव हुई है।
भरत खेड़ा ने यह भी बताया कि सरकार ने वाणिज्य मंत्रालय से अनुरोध किया है कि भविष्य के मुक्त व्यापार समझौतों (Free Trade Agreements-FTAs) में MSMEs के लिए अलग अध्याय शामिल किए जाएं, ताकि छोटे उद्योग भी वैश्विक व्यापार के अवसरों का अधिक लाभ उठा सकें। उन्होंने उद्योग संगठनों से MSMEs के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की भी अपील की, जिससे वे FTAs के लाभों का बेहतर उपयोग कर सकें।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। सरकारी नीतियों, योजनाओं और नियमों में समय-समय पर बदलाव संभव है।

