India Semiconductor Mission 2.0: ₹1.25 लाख करोड़ से मिलेगा बड़ा बूस्ट

भारत सरकार सेमीकंडक्टर निर्माण क्षेत्र को नई ऊंचाई देने के लिए India Semiconductor Mission 2.0 के तहत बड़ा निवेश करने जा रही है। जानिए इस मिशन से भारत के ग्लोबल चिप मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की रणनीति क्या है।

India Semiconductor Mission 2.0: सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को मिलेगा ₹1.25 लाख करोड़ का बूस्ट, भारत बनेगा ग्लोबल चिप मैन्युफैक्चरिंग हब भारत सरकार देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है।

India Semiconductor Mission 2.0 को मिलेगा ₹1.25 लाख करोड़ का बूस्ट

सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्रालय की व्यय वित्त समिति (Expenditure Finance Committee) जल्द ही India Semiconductor Mission (ISM) 2.0 के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपये के बजट प्रस्ताव को मंजूरी दे सकती है। इसके बाद इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने रखा जाएगा।

यह बजट ISM 1.0 की तुलना में काफी बड़ा है। पहले चरण के लिए सरकार ने 76,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था, जबकि दूसरे चरण में लगभग 65 प्रतिशत अधिक राशि प्रस्तावित की गई है। इससे स्पष्ट है कि सरकार अब देश में सेमीकंडक्टर उद्योग को और तेज गति से विकसित करना चाहती है।

📌 सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की प्रमुख बातें

  • प्रस्तावित बजट: ₹1.25 लाख करोड़
  • मिशन: India Semiconductor Mission (ISM) 2.0
  • उद्देश्य: भारत को ग्लोबल चिप मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना
  • फोकस: चिप निर्माण, डिजाइन, उपकरण, मटेरियल और सप्लाई चेन
  • अगला चरण: केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी
  • लाभ: निवेश, रोजगार और निर्यात में बढ़ोतरी

ISM 2.0 का उद्देश्य और रणनीति

केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित India Semiconductor Mission 2.0 का उद्देश्य केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है। इस योजना के तहत सेमीकंडक्टर उपकरण (Equipment), कच्ची सामग्री (Materials), स्वदेशी चिप डिजाइन, बौद्धिक संपदा (IP), सप्लाई चेन और पूरे इकोसिस्टम को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे भारत वैश्विक कंपनियों के लिए भरोसेमंद चिप निर्माण केंद्र के रूप में उभर सकेगा।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि ISM 2.0 का मुख्य फोकस स्वदेशी चिप डिजाइन, नए उत्पादों का विकास, वैश्विक तकनीकी साझेदारों को आकर्षित करना और कुशल मानव संसाधन तैयार करना होगा। सरकार का लक्ष्य केवल विदेशी निवेश लाना नहीं, बल्कि देश में पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन विकसित करना है।

अब तक कितनी परियोजनाओं को मिली मंजूरी

अब तक भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत 12 मैन्युफैक्चरिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इन परियोजनाओं में कुल करीब 1.64 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इनमें एक सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट, दो कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट और नौ चिप पैकेजिंग यूनिट शामिल हैं। इससे भारत में पहली बार बड़े पैमाने पर व्यावसायिक चिप निर्माण का रास्ता खुल रहा है।

डिजाइन सेक्टर में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार की Design Linked Incentive (DLI) योजना के तहत अब तक 24 परियोजनाओं को समर्थन दिया गया है। इसके अलावा 105 कंपनियों को अत्याधुनिक चिप डिजाइन टूल्स उपलब्ध कराए गए हैं। विभिन्न वैश्विक फाउंड्री में 23 सफल डिजाइन ‘टेपआउट’ पूरे हो चुके हैं, जो भारत की बढ़ती डिजाइन क्षमता को दर्शाते हैं।

🏭 भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर की वर्तमान स्थिति

  • स्वीकृत परियोजनाएं: 12
  • कुल निवेश: ₹1.64 लाख करोड़
  • फैब्रिकेशन यूनिट: 1
  • कंपाउंड सेमीकंडक्टर यूनिट: 2
  • चिप पैकेजिंग यूनिट: 9
  • DLI परियोजनाएं: 24
  • डिजाइन टूल्स प्राप्त कंपनियां: 105
  • सफल Tape-out: 23

व्यावसायिक उत्पादन और आगे की योजना

आईटी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, भारत का वर्षों पुराना सपना अब धीरे-धीरे साकार हो रहा है। इस साल दो सेमीकंडक्टर परियोजनाओं में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है, जबकि CG Semi की नई यूनिट का उद्घाटन 4 जुलाई को होने की संभावना है। वर्ष के अंत तक एक-दो और परियोजनाओं के शुरू होने की उम्मीद है।

सरकार का मानना है कि इन निवेशों से भारत न केवल घरेलू मांग पूरी कर सकेगा, बल्कि वैश्विक कंपनियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण सप्लाई हब बन जाएगा। कोविड महामारी और अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव के बाद दुनिया भर में देशों ने चिप सप्लाई चेन को विविध बनाने पर जोर दिया है और भारत इस अवसर का लाभ उठाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है ISM 2.0

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ISM 2.0 को समय पर मंजूरी मिलती है और परियोजनाएं तय समय सीमा में पूरी होती हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, हाई-टेक रोजगार और निर्यात के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगा सकता है। इसके साथ ही देश वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में एक मजबूत और विश्वसनीय भागीदार के रूप में अपनी पहचान स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।

Disclaimer: यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी पर आधारित है। सरकारी निर्णय, बजट स्वीकृति और परियोजना की समयसीमा में आधिकारिक बदलाव संभव हैं।

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I’m Gourav Kumar Singh, a graduate by education and a blogger by passion. Since starting my blogging journey in 2020, I have worked in digital marketing and content creation. Read more about me.

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