भारत में डेटा सेंटर निवेश बढ़ने के साथ राज्यों के सामने यह सवाल भी है कि नई परियोजनाओं के लिए बिजली, पानी और जमीन पर्याप्त हैं या नहीं। NITI Aayog के Frontier Tech Hub ने अक्टूबर 2026 में Data Centre Evaluation Framework जारी किया। इसका उद्देश्य राज्यों को निवेश प्रस्तावों का आकलन करने और यह समझने में मदद देना है कि कोई परियोजना लंबे समय तक आर्थिक रूप से उपयोगी और पर्यावरण के लिहाज से टिकाऊ रह पाएगी या नहीं।
Data Centre Evaluation Framework क्या है?
डेटा सेंटर ऐसी सुविधाएं हैं जहां कंप्यूटर सर्वर और नेटवर्क उपकरण डिजिटल सेवाओं को चलाते हैं। AI, क्लाउड, बैंकिंग, ऑनलाइन खरीदारी और सरकारी डिजिटल सेवाओं के बढ़ने से इन सुविधाओं की मांग बढ़ रही है। लेकिन बड़े डेटा सेंटर को सिर्फ जमीन और निवेश की रकम से नहीं चलाया जा सकता। उन्हें भरोसेमंद बिजली, कूलिंग, जल प्रबंधन, नेटवर्क और प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत होती है।
NITI Aayog का ढांचा राज्यों को अलग-अलग पहलुओं पर विचार करने का तरीका देता है। इसका उद्देश्य निवेश को रोकना नहीं, बल्कि मंजूरी से पहले आवश्यक संसाधनों और संभावित असर की जांच को मजबूत करना है। अगर किसी स्थान पर पानी की कमी है या बिजली नेटवर्क पर्याप्त नहीं है, तो इन समस्याओं का पता निर्माण शुरू होने से पहले लगना चाहिए।
ढांचे के पांच मुख्य आधार
इस ढांचे में बिजली और ऊर्जा, पानी और कूलिंग, स्थान और पर्यावरणीय स्थिरता, आर्थिक व रणनीतिक मूल्य, और नीति व क्रियान्वयन जैसे पांच आधार शामिल हैं। इन पहलुओं को अलग-अलग देखने से किसी परियोजना की ताकत और कमजोरियां स्पष्ट हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, किसी जगह पर सस्ती जमीन हो सकती है, लेकिन वहां पानी या ग्रिड कनेक्शन की कमी परियोजना की लागत बढ़ा सकती है।
राज्यों को केवल घोषित निवेश राशि पर ध्यान देने के बजाय यह भी देखना होगा कि परियोजना से वास्तविक आर्थिक लाभ क्या होगा। रोजगार, स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं की भागीदारी, डिजिटल सेवाओं की उपलब्धता और दीर्घकालीन संचालन जैसे पहलुओं का मूल्यांकन महत्वपूर्ण है। नीति में पारदर्शिता और तय समय सीमा भी निवेशकों को बेहतर योजना बनाने में मदद कर सकती है।
📋 मंजूरी से पहले पांच जांच
- बिजली: ग्रिड, सबस्टेशन और भविष्य की मांग
- पानी: मौसमी उपलब्धता और स्थानीय उपयोग
- जगह: बाढ़, गर्मी और पर्यावरणीय जोखिम
- आर्थिक लाभ: रोजगार और स्थानीय उद्योग पर असर
- प्रशासन: अनुमति, जवाबदेही और समय सीमा
बिजली और पानी की योजना क्यों जरूरी है?
बड़े डेटा सेंटर चौबीसों घंटे काम कर सकते हैं। बिजली में लंबे समय की रुकावट से सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, इसलिए ग्रिड की क्षमता और बैकअप व्यवस्था पहले से जांचनी चाहिए। भविष्य में विस्तार की योजना भी जरूरी है। यदि शुरुआत में ही बिजली की मांग कम आंकी जाए, तो बाद में अतिरिक्त ट्रांसमिशन लाइन या सबस्टेशन बनाने की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे काम में समय और लागत दोनों बढ़ सकते हैं।
पानी का सवाल भी महत्वपूर्ण है। कई कूलिंग सिस्टम गर्मी निकालने के लिए पानी का इस्तेमाल करते हैं, हालांकि तकनीक के अनुसार जरूरत अलग हो सकती है। राज्य को यह समझना चाहिए कि प्रस्तावित केंद्र का पानी स्थानीय परिवारों, खेती और उद्योग की जरूरतों से कैसे जुड़ेगा। वर्षा जल संग्रह, उपचारित पानी का दोबारा इस्तेमाल और पानी की खपत की निगरानी जैसे उपाय कुछ परिस्थितियों में दबाव कम कर सकते हैं।
पर्यावरण और स्थानीय समुदाय
डेटा सेंटर के लिए जमीन चुनते समय बाढ़, गर्मी, जल निकासी, जैव विविधता और आसपास की आबादी पर असर देखना चाहिए। एक स्थान पर परियोजना आर्थिक रूप से लाभदायक हो सकती है, लेकिन यदि वहां जल संकट या पर्यावरणीय जोखिम अधिक है, तो दीर्घकाल में लागत बढ़ सकती है। इसलिए पर्यावरणीय आकलन और स्थानीय समुदायों से संवाद योजना का हिस्सा होना चाहिए।
बिजली और पानी के अलावा बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक कचरे और उपकरणों के जीवनकाल के अंत में उनके निपटान की योजना भी जरूरी है। बड़ी डिजिटल सुविधाओं में उपकरण समय के साथ बदले जाते हैं। यदि कचरे का सुरक्षित प्रबंधन न हो, तो पर्यावरण पर असर पड़ सकता है। राज्य स्तर पर स्पष्ट नियम और निगरानी से इस तरह के जोखिम को घटाने में मदद मिल सकती है।
🌱 टिकाऊ डेटा सेंटर के उपाय
- ऊर्जा दक्षता: कम बिजली में अधिक कंप्यूटिंग
- स्वच्छ ऊर्जा: नवीकरणीय बिजली और भंडारण
- पानी बचत: उपचारित पानी और रिसाव नियंत्रण
- कचरा प्रबंधन: बैटरी व इलेक्ट्रॉनिक कचरे का सुरक्षित निपटान
- जवाबदेही: वादों और वास्तविक प्रगति की निगरानी
निवेशकों और राज्यों के लिए इसका मतलब
निवेशकों को परियोजना के लिए उपलब्ध संसाधनों की शुरुआती जांच से फायदा हो सकता है। इससे निर्माण के दौरान बिजली कनेक्शन, पानी की आपूर्ति या अनुमति से जुड़ी अनपेक्षित समस्याओं की संभावना घट सकती है। राज्यों के लिए यह ढांचा अलग-अलग प्रस्तावों की तुलना करने में उपयोगी हो सकता है, ताकि प्रोत्साहन और सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग स्पष्ट लक्ष्यों के साथ किया जाए।
यह ढांचा अपने आप हर राज्य में एक समान नियम लागू कर देता है, ऐसा नहीं समझना चाहिए। यह निर्णय लेने में मदद देने वाला ढांचा है। वास्तविक मंजूरी संबंधित नियमों, राज्य की नीतियों और परियोजना के विवरण पर निर्भर करेगी। कंपनियों को आधिकारिक दस्तावेज और स्थानीय शर्तें पढ़नी चाहिए।
मूल सरकारी जानकारी यहां पढ़ें: Press Information Bureau की घोषणा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. NITI Aayog का यह ढांचा क्यों जारी हुआ?
इसका उद्देश्य राज्यों को डेटा सेंटर निवेश का बेहतर आकलन करने में मदद देना है। बिजली, पानी, जमीन, पर्यावरण और आर्थिक लाभ की जांच से यह समझा जा सकता है कि परियोजना लंबे समय तक टिकाऊ रह सकती है या नहीं।
2. क्या हर डेटा सेंटर को एक जैसी मंजूरी मिलेगी?
नहीं। परियोजना का आकार, स्थान, बिजली और पानी की जरूरत तथा लागू नियम अलग हो सकते हैं। ढांचा राज्यों को मूल्यांकन में मदद देता है, लेकिन वास्तविक अनुमति संबंधित सरकारी प्रक्रियाओं और शर्तों पर निर्भर रहती है।
3. पानी की जांच क्यों जरूरी है?
कूलिंग की तकनीक के अनुसार डेटा सेंटर में पानी की जरूरत हो सकती है। राज्य को स्थानीय उपलब्धता, मौसमी बदलाव और दूसरे उपयोगकर्ताओं की मांग देखनी चाहिए, ताकि नई परियोजना से क्षेत्र के जल संसाधनों पर अनावश्यक दबाव न पड़े।
4. क्या ढांचा निवेश को धीमा करेगा?
इसका घोषित उद्देश्य बेहतर योजना और स्पष्ट निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा देना है। शुरुआत में संसाधनों की जांच करने से बाद में निर्माण की देरी और लागत बढ़ने का जोखिम कम हो सकता है। वास्तविक असर राज्यों के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
5. आम लोगों को इससे क्या लाभ हो सकता है?
बेहतर योजना से बिजली और पानी जैसे संसाधनों पर दबाव समझने, पर्यावरणीय असर कम करने और परियोजना से स्थानीय आर्थिक लाभ मापने में मदद मिल सकती है। हालांकि, लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि सुझावों को व्यवहार में कितना प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है।
निष्कर्ष
डेटा सेंटर भारत की डिजिटल जरूरतों को पूरा करने में मदद करेंगे, लेकिन उनका विकास संसाधनों की वास्तविक उपलब्धता के साथ होना चाहिए। बिजली, पानी, पर्यावरण और आर्थिक लाभ की जांच से राज्यों को अधिक जिम्मेदार और टिकाऊ निवेश निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सरकारी दस्तावेज पर आधारित है। किसी परियोजना की मंजूरी और शर्तों के लिए संबंधित राज्य के आधिकारिक नियम देखें।