ओडिशा में सरकारी डिजिटल सेवाओं को आपदा या तकनीकी बाधा के दौरान जारी रखने के लिए एक नए डेटा सेंटर की योजना बनाई गई है। Data Center Dynamics की 16 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य मंत्रिमंडल ने Keonjhar में Odisha State Data Centre (OSDC) स्थापित करने के लिए ₹176.83 करोड़ के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी। यह सुविधा Dharanidhar University के दक्षिणी परिसर में बनाई जानी है और इसका मुख्य उद्देश्य Bhubaneswar में मौजूद प्राथमिक डेटा सेंटर के लिए disaster recovery व्यवस्था तैयार करना है। यह मंजूरी और प्रस्तावित निर्माण है, तैयार होकर चालू हो चुकी सुविधा नहीं।
Odisha Data Centre Project का उद्देश्य क्या है?
सरकारी विभाग अब नागरिक सेवाओं, आवेदन, रिकॉर्ड, भुगतान और आंतरिक कामकाज के लिए डिजिटल सिस्टम पर निर्भर हैं। ऐसे सिस्टम चलाने वाले सर्वर और डेटा स्टोरेज को डेटा सेंटर में रखा जाता है। यदि मुख्य केंद्र में बिजली की बड़ी समस्या, नेटवर्क बाधा, आग, बाढ़ या साइबर हमले के कारण सेवा बंद हो जाए, तो कई सरकारी काम प्रभावित हो सकते हैं। Disaster recovery डेटा सेंटर का उद्देश्य ऐसी स्थिति में सिस्टम और जरूरी डेटा को दूसरी जगह से बहाल करने में मदद करना है।
रिपोर्ट के अनुसार, Keonjhar में प्रस्तावित केंद्र Bhubaneswar स्थित प्राथमिक सुविधा का बैकअप बनेगा। अलग जगह पर डेटा और कंप्यूटिंग संसाधन रखने से एक ही स्थान पर होने वाली समस्या के कारण सभी सेवाएं एक साथ ठप होने का जोखिम कम हो सकता है। हालांकि, केवल दूसरी इमारत बना देना पर्याप्त नहीं है। डेटा की प्रतियां अपडेट रहनी चाहिए, नेटवर्क कनेक्शन काम करना चाहिए और सेवा बहाली की प्रक्रिया का नियमित परीक्षण होना चाहिए।
₹176.83 करोड़ के बजट में क्या शामिल है?
रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना का कुल बजट ₹176.83 करोड़ है। इसमें लगभग 16.22 मिलियन डॉलर के बराबर पूंजीगत खर्च और करीब 2.4 मिलियन डॉलर के बराबर पांच साल के संचालन खर्च का उल्लेख है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि ₹17 मिलियन डॉलर से अधिक राशि Fifth State Finance Commission के अनुदान से आएगी, जबकि शेष धन राज्य के Electronics and Information Technology Department के State Data Centre maintenance बजट से दिया जाएगा। ये बजट के घोषित हिस्से हैं, वास्तविक खर्च और भुगतान का अंतिम विवरण परियोजना के आगे बढ़ने पर सामने आएगा।
प्रोजेक्ट को स्थापित करने में लगभग नौ महीने लगने की उम्मीद बताई गई है और Krystal Integrated Services को सहायता के लिए अनुबंध दिया गया है। यह अनुमान है, निश्चित उद्घाटन तारीख नहीं। निर्माण, उपकरणों की खरीद, नेटवर्क कनेक्टिविटी, सुरक्षा परीक्षण और विभागीय प्रणालियों के स्थानांतरण जैसे चरण पूरे होने के बाद ही सुविधा को पूरी तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा। परियोजना की प्रगति पर सरकारी अपडेट से समयसीमा की पुष्टि करनी चाहिए।
🏢 Odisha State Data Centre की जानकारी
- स्थान: Dharanidhar University का दक्षिणी परिसर, Keonjhar
- मंजूर बजट: ₹176.83 करोड़
- मुख्य उद्देश्य: Bhubaneswar केंद्र के लिए disaster recovery
- निर्माण अनुमान: लगभग नौ महीने
- सुविधाएं: स्वतंत्र बिजली, कूलिंग, नेटवर्क और कंप्यूटिंग व्यवस्था
सरकारी सेवाओं को क्या फायदा मिल सकता है?
सरकारी डेटा सेंटर में कई तरह के विभागीय ऐप और डिजिटल सेवाएं हो सकती हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि Bhubaneswar का प्राथमिक राज्य डेटा सेंटर 2011 से काम कर रहा है और उसमें 600 से अधिक सरकारी एप्लिकेशन होस्ट किए जा रहे हैं। इतने सारे सिस्टम के लिए निरंतर उपलब्धता जरूरी है, क्योंकि सेवा बाधित होने पर विभागों और नागरिकों को परेशानी हो सकती है। बैकअप केंद्र आपदा के दौरान जरूरी सेवाओं को फिर से शुरू करने में मदद दे सकता है, बशर्ते उसे सही ढंग से तैयार और परखा गया हो।
इस तरह की व्यवस्था से नागरिकों के लिए आवेदन की स्थिति देखना, दस्तावेजों तक पहुंचना, विभागों के बीच सूचना साझा करना और कुछ ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग करना आसान बना रह सकता है। इससे सरकारी कर्मचारियों को भी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड उपलब्ध रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अलग-अलग विभागों के सिस्टम की प्राथमिकता अलग हो सकती है। इसलिए पहले यह तय करना जरूरी है कि संकट के समय कौन-सी सेवाएं तुरंत बहाल करनी हैं और कौन-सी बाद में शुरू हो सकती हैं।
Disaster recovery और डेटा बैकअप में फर्क
डेटा बैकअप का मतलब जानकारी की एक या अधिक सुरक्षित प्रतियां रखना है। Disaster recovery इससे व्यापक व्यवस्था है। इसमें डेटा के साथ सर्वर, नेटवर्क, सॉफ्टवेयर, उपयोगकर्ता पहुंच और काम शुरू करने की प्रक्रिया भी शामिल होती है। यदि बैकअप फाइल मौजूद है लेकिन उसे पढ़ने के लिए जरूरी सिस्टम उपलब्ध नहीं है, तो सेवा जल्दी बहाल नहीं हो पाएगी। इसलिए सरकार को नियमित बैकअप के साथ यह भी जांचना चाहिए कि वैकल्पिक स्थान से वास्तविक सेवाएं शुरू की जा सकती हैं या नहीं।
एक मजबूत योजना में डेटा कितनी बार कॉपी होगा, आखिरी सुरक्षित कॉपी कितनी पुरानी हो सकती है और सेवा कितने समय में वापस शुरू होनी चाहिए, जैसे सवालों के स्पष्ट जवाब होने चाहिए। इन्हें तकनीकी योजना में recovery point और recovery time जैसे लक्ष्यों से समझा जाता है। सभी सेवाओं के लिए एक ही लक्ष्य उपयुक्त नहीं होगा। नागरिकों से सीधे जुड़ी जरूरी सेवाओं को अधिक प्राथमिकता दी जा सकती है।
🛡️ भरोसेमंद सरकारी Data Centre के कदम
- अलग स्थान: मुख्य केंद्र से भौगोलिक दूरी
- बैकअप कॉपी: सुरक्षित और नियमित डेटा प्रतियां
- स्वतंत्र बिजली: वैकल्पिक आपूर्ति और परीक्षण
- साइबर सुरक्षा: पहुंच नियंत्रण और निगरानी
- मॉक टेस्ट: सेवा बहाली का नियमित अभ्यास
सुरक्षा, खर्च और जवाबदेही क्यों जरूरी हैं?
सरकारी डेटा में नागरिकों और विभागों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी हो सकती है। इसलिए नए केंद्र में भौतिक सुरक्षा के साथ साइबर सुरक्षा भी जरूरी होगी। सर्वर कक्ष तक पहुंच नियंत्रित होनी चाहिए, सिस्टम में बदलाव दर्ज होने चाहिए और अनधिकृत गतिविधियों की निगरानी की जानी चाहिए। बैकअप की प्रतियां भी सुरक्षित रखनी होंगी, क्योंकि यदि मुख्य सिस्टम पर साइबर हमला हो तो उससे जुड़े बैकअप पर भी खतरा हो सकता है। अलग पहचान, नेटवर्क नियंत्रण और सुरक्षित प्रतियां जोखिम घटाने में मदद कर सकती हैं।
परियोजना के बजट में निर्माण और संचालन दोनों शामिल हैं, इसलिए केवल शुरुआती लागत देखकर उसकी सफलता नहीं मापी जानी चाहिए। बिजली, कूलिंग, उपकरण बदलने, सॉफ्टवेयर, नेटवर्क और प्रशिक्षित कर्मचारियों का खर्च आगे भी रहेगा। सरकारी विभागों को संचालन की जिम्मेदारियां, सेवा स्तर और रखरखाव की प्रक्रिया स्पष्ट रखनी चाहिए। पारदर्शी निगरानी से यह समझने में मदद मिलेगी कि परियोजना समय पर पूरी हो रही है और उसके संसाधन सही उपयोग में आ रहे हैं या नहीं।
मूल रिपोर्ट यहां पढ़ें: Data Center Dynamics की रिपोर्ट।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. ओडिशा में नया डेटा सेंटर कहां बनेगा?
रिपोर्ट के अनुसार, Odisha State Data Centre Keonjhar में Dharanidhar University के दक्षिणी परिसर में स्थापित किया जाना है। इसका उद्देश्य Bhubaneswar में मौजूद प्राथमिक डेटा सेंटर के लिए अलग स्थान पर आपदा के समय काम आने वाली सुविधा तैयार करना है।
2. परियोजना के लिए कितना बजट मंजूर हुआ है?
ओडिशा मंत्रिमंडल ने ₹176.83 करोड़ के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। रिपोर्ट में पूंजीगत खर्च और पांच साल के संचालन खर्च के हिस्सों का भी उल्लेख है। वास्तविक खर्च परियोजना के क्रियान्वयन और सरकारी रिकॉर्ड से स्पष्ट होगा।
3. Disaster recovery डेटा सेंटर क्यों जरूरी है?
यदि मुख्य डेटा सेंटर में बिजली, नेटवर्क या साइबर सुरक्षा की समस्या हो जाए, तो दूसरी जगह मौजूद व्यवस्था से जरूरी सेवाएं बहाल करने में मदद मिल सकती है। इसके लिए डेटा प्रतियां, वैकल्पिक सिस्टम और नियमित परीक्षण जरूरी हैं।
4. क्या नया केंद्र तुरंत चालू हो गया है?
नहीं। उपलब्ध रिपोर्ट परियोजना को मंजूरी दिए जाने और निर्माण की योजना के रूप में बताती है। लगभग नौ महीने का अनुमान दिया गया है, लेकिन वास्तविक संचालन शुरू होने की पुष्टि सरकारी घोषणा और परियोजना अपडेट से करनी चाहिए।
5. क्या डेटा बैकअप अकेले सरकारी सेवाओं को बचा सकता है?
नहीं। बैकअप डेटा की प्रतियां सुरक्षित रखता है, जबकि सेवा बहाली के लिए सर्वर, नेटवर्क, सॉफ्टवेयर, बिजली और जिम्मेदार कर्मचारियों की भी जरूरत होती है। इसलिए नियमित अभ्यास और पूरे सिस्टम की जांच जरूरी है।
निष्कर्ष
Keonjhar में प्रस्तावित Odisha State Data Centre सरकारी डिजिटल सेवाओं को आपदा के दौरान जारी रखने में मदद कर सकता है। इसका वास्तविक लाभ निर्माण पूरा होने, सुरक्षित डेटा प्रतियों, स्वतंत्र बिजली और नियमित recovery परीक्षण पर निर्भर करेगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्ट पर आधारित है। बजट, समयसीमा और संचालन की पुष्टि के लिए सरकारी स्रोतों की जांच करें।
