देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI ने चालू वित्त वर्ष में अपनी पहली Basel III अनुपालन वाली Additional Tier 1 (AT1) Bond जारी करके ₹4,691 करोड़ जुटाए हैं। बैंक को इस बॉन्ड इश्यू के लिए संस्थागत निवेशकों से उम्मीद से कहीं अधिक प्रतिक्रिया मिली। इसी मजबूत मांग को देखते हुए बैंक ने शुरुआती लक्ष्य से अधिक राशि स्वीकार करने का फैसला किया।
SBI AT1 Bond Issue: निवेशकों से मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया
बैंक ने शुरुआत में ₹3,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन निवेशकों की ओर से दो गुना से ज्यादा आवेदन मिलने के बाद कुल ₹4,691 करोड़ के बॉन्ड जारी किए गए। इस इश्यू में कुल 89 बोलियां प्राप्त हुईं, जिनमें प्रोविडेंट फंड, पेंशन फंड, म्यूचुअल फंड और विभिन्न बैंकों समेत कई बड़े संस्थागत निवेशकों ने भाग लिया।
SBI AT1 Bond इश्यू की मुख्य बातें
- जुटाई गई राशि: ₹4,691 करोड़
- शुरुआती लक्ष्य: ₹3,000 करोड़
- कुल बोलियां: 89
- निवेशक: प्रोविडेंट फंड, पेंशन फंड, म्यूचुअल फंड और बैंक
- मजबूत मांग: लक्ष्य से दोगुना से अधिक आवेदन
- उद्देश्य: बैंक की पूंजी को मजबूत बनाना
SBI ने इन AT1 Bond पर 7.75 प्रतिशत की वार्षिक कूपन दर तय की है। यह एक Perpetual Bond है, यानी इसकी कोई निश्चित परिपक्वता अवधि नहीं होती। हालांकि बैंक के पास पांच वर्ष पूरे होने के बाद और उसके बाद हर वर्षगांठ पर इन बॉन्ड को वापस खरीदने यानी Call Option का अधिकार रहेगा。
AT1 Bond की खास विशेषताएं
इस बॉन्ड इश्यू को CRISIL Ratings और CARE Ratings ने स्थिर दृष्टिकोण के साथ AA+ Rating दी है। यह रेटिंग बताती है कि इन बॉन्ड को मजबूत क्रेडिट गुणवत्ता वाला माना गया है और निवेशकों के बीच इन पर भरोसा काफी अच्छा है।
SBI के चेयरमैन सी. एस. सेटी ने कहा कि इस इश्यू में बड़ी संख्या में अलग-अलग संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बैंक पर उनके भरोसे को दिखाती है। उनके अनुसार, निवेशकों की मजबूत प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट है कि देश के सबसे बड़े बैंक की वित्तीय स्थिति और भविष्य को लेकर बाजार का विश्वास कायम है।
SBI ने फंड जुटाने की वजह भी बताई
बैंक ने बताया कि इस फंड जुटाने का उद्देश्य केवल पूंजी बढ़ाना ही नहीं, बल्कि फंडिंग के स्रोतों में विविधता लाना और अपनी दीर्घकालिक नियामकीय पूंजी को मजबूत करना भी है। इससे बैंक को भविष्य में कारोबार के विस्तार और नियामकीय आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।
AT1 Bond क्या है?
- प्रकार: Basel III के तहत जारी विशेष बॉन्ड
- अवधि: Perpetual Bond (कोई निश्चित मैच्योरिटी नहीं)
- कूपन दर: 7.75% प्रति वर्ष
- Call Option: 5 वर्ष बाद और हर वर्षगांठ पर
- रेटिंग: AA+ (CRISIL Ratings और CARE Ratings)
- उद्देश्य: बैंक की नियामकीय पूंजी को मजबूत करना
AT1 Bond बैंकिंग क्षेत्र में पूंजी मजबूत करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले विशेष वित्तीय साधन हैं। इन्हें Basel III नियमों के तहत जारी किया जाता है। जरूरत पड़ने पर और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मंजूरी के साथ बैंक इन बॉन्ड का मूल्य घटा सकता है या इन्हें इक्विटी में बदल सकता है। यही वजह है कि इन्हें बैंक की मुख्य पूंजी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
शेयर बाजार की नजर Q1 Results पर
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अक्सर अपनी पूंजी पर्याप्तता बनाए रखने और नियामकीय मानकों का पालन करने के लिए ऐसे बॉन्ड जारी करते हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त शेयर जारी किए बिना पूंजी मजबूत करने का अवसर मिलता है।
शेयर बाजार में बुधवार को SBI के शेयर में मामूली बढ़त देखने को मिली। कारोबार समाप्त होने पर शेयर 0.10 प्रतिशत चढ़कर ₹1,013.80 पर बंद हुआ। पिछले एक महीने में इसमें करीब 2 प्रतिशत, तीन महीने में 7 प्रतिशत और छह महीने में लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि पिछले एक वर्ष में शेयर ने करीब 27 प्रतिशत और पिछले पांच वर्षों में लगभग 129 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।
कंपनी 7 अगस्त 2026 को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1 Results) घोषित करने वाली है। बाजार की नजर अब इन नतीजों पर रहेगी, क्योंकि निवेशक बैंक की आय, मुनाफे, ऋण वृद्धि और परिसंपत्ति गुणवत्ता से जुड़े प्रमुख आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
1. SBI ने AT1 Bond से कितनी राशि जुटाई?
SBI ने अपनी पहली Basel III अनुपालन वाली AT1 Bond जारी करके ₹4,691 करोड़ जुटाए।
2. AT1 Bond पर कितनी कूपन दर तय की गई है?
इन बॉन्ड पर 7.75 प्रतिशत की वार्षिक कूपन दर तय की गई है।
3. क्या AT1 Bond की कोई निश्चित अवधि होती है?
नहीं। यह Perpetual Bond है, हालांकि बैंक के पास पांच वर्ष बाद Call Option का अधिकार रहता है।
4. इस बॉन्ड को कौन-सी रेटिंग मिली है?
CRISIL Ratings और CARE Ratings ने इसे स्थिर दृष्टिकोण के साथ AA+ Rating दी है।
5. SBI इस फंड का उपयोग किस लिए करेगा?
बैंक इस राशि का उपयोग अपनी नियामकीय पूंजी मजबूत करने, फंडिंग स्रोतों में विविधता लाने और भविष्य के कारोबार विस्तार के लिए करेगा।
Disclaimer: यह जानकारी सार्वजनिक रिपोर्टों पर आधारित है। निवेश से पहले आधिकारिक दस्तावेज और वित्तीय सलाह अवश्य लें।
