केंद्र सरकार ने सूचना के अधिकार यानी RTI के तहत यह जानकारी देने से इनकार कर दिया है कि संसद का एक सत्र चलाने में कितना खर्च आता है और सदन की कार्यवाही बाधित होने से करदाताओं के कितने पैसे का नुकसान होता है। Mint की ओर से 13 अगस्त को संसदीय कार्य मंत्रालय से पूछा गया था कि पिछले 10 राज्यसभा सत्रों में कार्यवाही बाधित होने या बैठक का समय कम होने के कारण कुल कितनी राशि बर्बाद हुई। इसके जवाब में राज्यसभा सचिवालय ने 2 सितंबर को कहा कि मांगी गई जानकारी RTI Act की धारा 2(f) के तहत ‘सूचना’ की श्रेणी में नहीं आती। लोकसभा सचिवालय की ओर से जवाब अभी आना बाकी है।
RTI के तहत संसद के खर्च की जानकारी देने से इनकार
RTI कानून की धारा 2(f) के अनुसार सूचना में रिकॉर्ड, दस्तावेज, ईमेल, राय, सलाह, आदेश, रिपोर्ट, आंकड़े और इलेक्ट्रॉनिक रूप में उपलब्ध सामग्री जैसी कई चीजें शामिल होती हैं। हालांकि राज्यसभा सचिवालय ने संसद की कार्यवाही बाधित होने से होने वाले आर्थिक नुकसान से जुड़ी मांगी गई जानकारी को इस परिभाषा के तहत सूचना मानने से इनकार किया है।
यह जवाब ऐसे समय आया है जब 2026 के मानसून सत्र के दौरान संसद में कई बार नारेबाजी, हंगामा और कार्यवाही स्थगित होने की घटनाएं हुईं। यह सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चला था। इस दौरान विपक्ष ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार से जवाब मांगा था। हंगामे के कारण कई विधेयक बिना सदस्यों की चर्चा के पारित हुए और प्रश्नकाल भी प्रभावित हुआ।
🏛️ संसद के मानसून सत्र की स्थिति
- सत्र: 20 जुलाई से 13 अगस्त 2026
- लोकसभा उत्पादकता: 19 प्रतिशत
- राज्यसभा उत्पादकता: 39 प्रतिशत
- लोकसभा में व्यवधान: 79 घंटे 34 मिनट
- बिना चर्चा पारित विधेयक: 12 में से 11
- लोकसभा बैठक: कुल 17 घंटे 32 मिनट
मानसून सत्र में संसद की उत्पादकता
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के अनुसार मानसून सत्र में लोकसभा की उत्पादकता 19 प्रतिशत और राज्यसभा की 39 प्रतिशत रही। उन्होंने विपक्ष पर सदन में बहस से बचने का आरोप लगाते हुए कहा था कि 12 में से 11 विधेयक बिना चर्चा के पारित हुए। लोकसभा की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस सत्र में कुल 79 घंटे 34 मिनट का समय व्यवधान और जबरन स्थगन के कारण चला गया। वहीं 18वीं लोकसभा के सभी आठ सत्रों में इस बार लोकसभा के बैठने का समय सबसे कम रहा और सदन की कुल बैठक केवल 17 घंटे 32 मिनट हुई।
संसद की कार्यवाही में होने वाले खर्च को लेकर लंबे समय से यह दावा किया जाता रहा है कि हर मिनट करीब 2.5 लाख रुपये करदाताओं के पैसे से खर्च होते हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील महेश जेठमलानी ने भी इस पुराने अनुमान का उल्लेख किया था। 2024 में राज्यसभा सांसद विक्रमजीत साहनी ने भी दावा किया था कि संसद का हर मिनट करीब 2.5 लाख रुपये का पड़ता है। हालांकि इस आंकड़े का कोई आधिकारिक स्रोत उपलब्ध नहीं है।
💰 संसद की कार्यवाही पर खर्च का विवाद
- पुराना दावा: करीब 2.5 लाख रुपये प्रति मिनट
- आधिकारिक स्रोत: इस आंकड़े का कोई आधिकारिक स्रोत उपलब्ध नहीं
- 2008 का अनुमान: करीब 29 हजार रुपये प्रति मिनट
- बाद का दावा: 2.5 लाख रुपये प्रति मिनट
- PRS की स्थिति: आंकड़ों की गणना का आधार स्पष्ट नहीं
- निष्कर्ष: खर्च को तय राशि से जोड़ना पूरी तरह सटीक नहीं माना जा सकता
संसद के खर्च का आंकड़ा कितना सही है
थिंक टैंक PRS के अनुसार संसद के एक सत्र पर होने वाले खर्च से जुड़ा शुरुआती चर्चित आंकड़ा 2008 के लोकसभा के एक चर्चा पत्र में सामने आया था। इसमें अनुमान लगाया गया था कि संसद की कार्यवाही के प्रत्येक मिनट पर सरकारी खजाने से करीब 29 हजार रुपये खर्च होते हैं। इसके करीब चार साल बाद तत्कालीन संसदीय कार्य मंत्री पवन बंसल ने कथित तौर पर संसद में व्यवधान की लागत 2.5 लाख रुपये प्रति मिनट बताई थी। हालांकि PRS ने यह भी स्पष्ट किया था कि इन आंकड़ों की गणना किस आधार पर की गई, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए संसद के कामकाज को सीधे किसी तय रुपये की राशि से जोड़ना पूरी तरह सटीक नहीं माना जा सकता।
Disclaimer: यह जानकारी उपलब्ध रिपोर्टों और सार्वजनिक आंकड़ों पर आधारित है, अंतिम आधिकारिक आंकड़े अलग हो सकते हैं।