Piramal Finance Q1 Result: मुनाफा 67% बढ़ा, AUM 1.07 लाख करोड़

पिरामल फाइनेंस ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी के मुनाफे, AUM, एसेट क्वालिटी और रिटेल कारोबार में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली, जिससे उसकी वित्तीय स्थिति पहले की तुलना में और मजबूत हुई है।

पिरामल फाइनेंस ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर करीब 66.8 प्रतिशत बढ़कर 460.98 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 276.37 करोड़ रुपये था। कंपनी की कुल आय भी बढ़कर 3,429.54 करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले 2,690.11 करोड़ रुपये थी। बेहतर कारोबार और प्रबंधन के कारण कंपनी के नतीजों में मजबूत बढ़त देखने को मिली।

पिरामल फाइनेंस के पहली तिमाही के नतीजे

कंपनी की AUM यानी प्रबंधन के तहत कुल संपत्ति 25 प्रतिशत बढ़कर 1.07 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसमें रिटेल कारोबार का योगदान सबसे अधिक रहा। रिटेल AUM में 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ यह 91,249 करोड़ रुपये हो गया, जबकि होलसेल AUM 27 प्रतिशत बढ़कर 13,238 करोड़ रुपये पहुंच गया। अब कंपनी के कुल पोर्टफोलियो में रिटेल और होलसेल कारोबार का अनुपात लगभग 85:15 है।

पिरामल फाइनेंस ने हाल ही में Gold Loan कारोबार की भी शुरुआत की है। जून 2026 में इस कारोबार के पहले पूरे महीने में कंपनी ने 6 करोड़ रुपये का वितरण किया। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जयराम श्रीधरन ने कहा कि गोल्ड लोन कारोबार का विस्तार धीरे-धीरे किया जाएगा। उनका कहना है कि पहले नई शाखाएं खोली जाएंगी, कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा और सभी जरूरी प्रक्रियाओं को मजबूत बनाया जाएगा। इसके बाद ही इस कारोबार का तेजी से विस्तार किया जाएगा।

पिरामल फाइनेंस Q1 FY27 की मुख्य बातें

  • नेट प्रॉफिट: 460.98 करोड़ रुपये
  • सालाना वृद्धि: 66.8%
  • कुल आय: 3,429.54 करोड़ रुपये
  • कुल AUM: 1.07 लाख करोड़ रुपये
  • रिटेल-होलसेल अनुपात: 85:15

Gold Loan और कारोबार विस्तार की रणनीति

कंपनी के अनुसार आने वाले समय में भी रिटेल और होलसेल कारोबार के बीच संतुलन बनाए रखा जाएगा। प्रबंधन का मानना है कि लंबे समय तक कुल पोर्टफोलियो में लगभग 15 से 20 प्रतिशत हिस्सेदारी होलसेल कारोबार की रहनी चाहिए।

कंपनी की उधारी लागत में भी सुधार देखने को मिला है। जून तिमाही में उधार लेने की औसत लागत घटकर 8.80 प्रतिशत रह गई, जबकि एक साल पहले यह 9.13 प्रतिशत थी। वहीं फंड जुटाने की लागत भी घटकर 6.26 प्रतिशत पर आ गई। प्रबंधन का अनुमान है कि अगले छह महीनों तक Repo Rate में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, हालांकि वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में इसमें हल्की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

एसेट क्वालिटी और अन्य प्रमुख अपडेट

  • NPA: 2.4%
  • उधारी लागत: 8.80%
  • फंड जुटाने की लागत: 6.26%
  • पूंजी जुटाने की मंजूरी: 4,000 करोड़ रुपये तक
  • विदेशी ऋण: फिलहाल कोई योजना नहीं

NPA और पूंजी जुटाने की योजना

माइक्रो लोन कारोबार को लेकर कंपनी ने कहा कि पूरे उद्योग में जोखिम पहले की तुलना में काफी कम हुआ है। नए नियम लागू होने के बाद ऋण पोर्टफोलियो की गुणवत्ता में सुधार आया है, जिसका फायदा पूरी इंडस्ट्री को मिल रहा है।

एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर भी कंपनी ने बेहतर प्रदर्शन किया है। 30 जून 2026 तक कंपनी का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति यानी NPA अनुपात घटकर 2.4 प्रतिशत रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 2.8 प्रतिशत था। इससे पता चलता है कि कंपनी के खराब कर्ज में कमी आई है।

इस बीच कंपनी के बोर्ड ने जरूरत पड़ने पर अधिकतम 4,000 करोड़ रुपये तक की पूंजी जुटाने की मंजूरी भी दी है। प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि अभी यह तय नहीं किया गया है कि पैसा किस माध्यम से जुटाया जाएगा। बाजार की स्थिति को देखते हुए सही समय पर फैसला लिया जाएगा। कंपनी ने यह भी कहा कि फिलहाल डॉलर विनिमय दर में उतार-चढ़ाव को देखते हुए विदेशी वाणिज्यिक ऋण लेने की कोई योजना नहीं है।

कंपनी की वित्तीय स्थिति हुई मजबूत

पहली तिमाही के नतीजे बताते हैं कि पिरामल फाइनेंस लगातार अपने कारोबार का विस्तार कर रही है। मजबूत मुनाफा, बढ़ती AUM, बेहतर एसेट क्वालिटी और नियंत्रित लागत से कंपनी की वित्तीय स्थिति पहले के मुकाबले अधिक मजबूत दिखाई दे रही है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले वित्तीय सलाह अवश्य लें।

Gourav Kumar Singh

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