यह लेख राजेश एक्सपोर्ट्स, SEBI की जांच, ACC बैटरी PLI योजना और कंपनी द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण से जुड़ी प्रमुख जानकारी प्रस्तुत करता है।
PTI के अनुसार, भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) जल्द ही एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज के लिए अपने प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) प्रोग्राम के तहत राजेश एक्सपोर्ट्स की पात्रता के बारे में फैसला करेगा。
राजेश एक्सपोर्ट्स पर SEBI की कार्रवाई और PLI पात्रता
यह फैसला SEBI द्वारा बेंगलुरु स्थित कंपनी पर बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए एक सख्त अंतरिम आदेश जारी करने के बाद आया है।
एजेंसी की “मजबूत राय” है कि कंपनी को तुरंत अयोग्य घोषित कर दिया जाना चाहिए। PTI के अनुसार, भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी, जो हाल ही में किर्गिस्तान की आधिकारिक यात्रा से लौटे हैं, जल्द ही अंतिम निर्णय लेंगे। PTI ने एक सूत्र के हवाले से कहा, “आने वाले दिनों में अंतिम फैसला लिया जाएगा।” SEBI ने 3 जून के 109 पन्नों के विस्तृत अंतरिम आदेश में दावा किया कि सोने के आभूषणों की पारंपरिक निर्माता और निर्यातक कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स ने वित्त वर्ष 21 और वित्त वर्ष 25 के बीच ₹15.15 लाख करोड़ की चौंकाने वाली आय अर्जित की।
वित्तीय अनियमितताओं के आरोप
इससे पता चलता है कि इस अवधि के दौरान इसकी सहायक कंपनियों से जुड़ी आय का लगभग 99.8% हिस्सा गलत तरीके से दिखाया गया था। इसके अलावा, कंपनी के लिथियम-आयन सेल प्रोजेक्ट में शामिल दो प्रमुख कंपनियां – एलेस्ट प्राइवेट लिमिटेड और ACC एनर्जी स्टोरेज प्राइवेट लिमिटेड – सीधे तौर पर मार्केट रेगुलेटर द्वारा चिह्नित गैर-कानूनी कैश डायवर्जन, अस्पष्ट संबंधित-पक्ष लेनदेन और गंभीर डिस्क्लोजर उल्लंघनों से जुड़ी थीं।
नतीजतन, SEBI ने कंपनी के रिकॉर्ड की नई फोरेंसिक जांच का आदेश दिया है और राजेश एक्सपोर्ट्स के चेयरमैन और प्रमोटर राजेश मेहता को अगले आदेश तक कंपनी के शेयरों को खरीदने, बेचने या उनमें व्यापार करने से रोक दिया है।
📋 SEBI जांच के प्रमुख बिंदु
- कंपनी: राजेश एक्सपोर्ट्स
- मामला: कथित वित्तीय अनियमितताएं
- अवधि: FY21 से FY25
- आरोप: ₹15.15 लाख करोड़ आय बढ़ाकर दिखाने का दावा
- कार्रवाई: फोरेंसिक जांच और ट्रेडिंग प्रतिबंध
PLI योजना पर मंत्रालय की नजर
MHI, बैटरी स्टोरेज PLI प्रोग्राम के मुख्य प्रशासक के रूप में, अपनी अगली कार्रवाई तय करने के लिए रेगुलेटर के निष्कर्षों की बारीकी से जांच कर रहा है। हालांकि, मेहता और राजेश एक्सपोर्ट्स ने SEBI के आरोपों का सख्ती से खंडन किया है और जोर देकर कहा है कि वे मौजूदा जांच में सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं।
राजेश एक्सपोर्ट्स ने रविवार को कहा कि उसने पहले ही सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) को 300 से 400 टेराबाइट सामग्री भेज दी है। कंपनी ने स्पष्टीकरण देने के लिए 15 दिनों के भीतर आवश्यक दस्तावेज फिर से जमा करने का वादा किया है, क्योंकि उसे लगता है कि मार्केट वॉचडॉग सही फाइलें नहीं ढूंढ पाया था। कंपनी के फाउंडर और चेयरमैन राजेश मेहता ने PTI को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि SEBI के 3 जून के अंतरिम फैसले की वजह एक मामूली अकाउंटिंग गलती है। इस फैसले में कंपनी पर आरोप लगाया गया था कि उसने FY21 और FY25 के बीच अपनी बिक्री को ₹15.15 लाख करोड़ बढ़ाकर दिखाया।
राजेश मेहता का पक्ष
मेहता ने कहा, “हमने उन्हें 300-400 GB के कागजात सौंपे थे, जिनमें लाखों पेज थे।” उन्होंने रेगुलेटर पर आरोप लगाया कि उसने कंपनी के EBITDA डेटा को गलत तरीके से निकाला और उसे कुल टॉप-लाइन इनकम (कुल बिक्री) के तौर पर गलत क्लासिफाई किया। मुझे लगता है कि वे सही कागजात नहीं ढूंढ पाए। मेहता ने कहा, “यहीं सारी गलतफहमी हुई। उन्होंने EBITDA को रेवेन्यू मान लिया। EBITDA का मतलब ग्रॉस प्रॉफिट होता है। उन्होंने ग्रॉस प्रॉफिट को ही रेवेन्यू बता दिया। ₹15.15 लाख करोड़ की रकम को देखते हुए, उन्होंने बहुत बड़ी गलती की है।”
मेहता ने इस कथित गलती को समझाने के लिए एक रिटेल ज्वैलरी शॉप का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि राजेश एक्सपोर्ट्स के गोल्ड बुलियन जैसे ज़्यादा वॉल्यूम और कम मार्जिन वाले बिज़नेस में, अगर कोई ग्राहक ₹30,000 में दो किलो सोना खरीदता है, तो उससे ₹30,000 की आमदनी होती है।
⚠️ कंपनी का स्पष्टीकरण
- दावा: अकाउंटिंग डेटा की गलत व्याख्या
- मुद्दा: EBITDA को रेवेन्यू मान लिया गया
- दस्तावेज: लाखों पन्नों का रिकॉर्ड जमा
- स्थिति: SEBI जांच में सहयोग जारी
- अगला कदम: अतिरिक्त दस्तावेज दोबारा जमा होंगे
EBITDA और रेवेन्यू विवाद
इस ट्रांज़ैक्शन से ग्रॉस प्रॉफिट और नेट प्रॉफिट क्रमशः ₹1,000 और ₹500 हो सकता है। मेहता ने कहा कि पूरे ₹30,000 के इनवॉइस अमाउंट को रिकॉर्ड करने के बजाय, SEBI ने गलती से ₹1,000 के ग्रॉस प्रॉफिट को बेस रेवेन्यू नंबर के तौर पर दर्ज कर लिया।
इसी तर्क को बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी के स्तर पर लागू करते हुए, उन्होंने बताया कि कंपनी नियमित रूप से ₹100 में सोना खरीदती है और उसे ₹101 में बेचती है, जिससे ₹1 का ग्रॉस प्रॉफिट होता है। मेहता का दावा है कि SEBI ने इस एक रुपये को असली ₹101 के सेल्स टर्नओवर के बजाय इनकम मान लिया।
Disclaimer: यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और नियामकीय निर्णयों पर निर्भर करेंगे।
