भारत सरकार के 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास और नवाचार कोष के तहत अगले चरण में फंड प्रबंधकों का चयन आने वाले कुछ हफ्तों में किया जा सकता है।
इस कोष का उद्देश्य अत्याधुनिक तकनीक पर काम करने वाली कंपनियों और नए कारोबारों में बड़े निवेश को बढ़ावा देना है। आरडीआई सेल की प्रमुख ज्योति शर्मा के अनुसार, अगले चरण के फंड प्रबंधकों के चयन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है और अंतिम बैठक कुछ हफ्तों में होने की उम्मीद है।
RDI Fund के अगले चरण में फंड प्रबंधकों का चयन
उन्होंने बताया कि इन फंड प्रबंधकों का चयन योग्यता के आधार पर किया जाएगा। इसके लिए पहले से यह तय नहीं किया गया है कि कितने फंड प्रबंधकों को चुना जाएगा। यानी पांच या दस की कोई निश्चित सीमा नहीं रखी गई है। जो संस्थाएं तय मानकों को पूरा करेंगी, उनके बारे में अंतिम फैसला अधिकारियों की एक विशेष समिति करेगी।

दूसरे स्तर का फंड प्रबंधक ऐसी मध्यस्थ संस्था होती है, जिसे सरकार के आरडीआई कोष से पैसा मिलता है। इसके बाद यह संस्था चुनी गई नई कंपनियों और शुरुआती चरण की तकनीकी कंपनियों तक धन पहुंचाती है। यह सहायता लंबे समय के कम ब्याज वाले कर्ज या हिस्सेदारी आधारित निवेश के रूप में दी जा सकती है। मार्च तक आरडीआई सेल ने पहले चरण में टीडीबी और बायरेक को फंड प्रबंधक के रूप में चुना था।
चयन प्रक्रिया को लेकर हितों के टकराव के सवाल
आरडीआई योजना को लेकर हाल में हितों के टकराव से जुड़े सवाल भी उठे हैं। एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि आरडीआई निवेश के पहले चरण में वित्त पोषण पाने वाले 22 में से 15 नए कारोबारों के संबंध चयन समिति के सात सदस्यों से जुड़े थे। इसके बाद चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे।
हालांकि, इससे पहले सरकार की ओर से कहा गया था कि TDB में हितों के टकराव से निपटने के लिए मजबूत नीति लागू है। सरकार के अनुसार, इस नीति का लंबे समय से व्यवस्थित तरीके से पालन किया जा रहा है और किसी तरह की शिकायत या अनियमितता की सूचना नहीं मिली है। टीडीबी की ओर से किए गए चयन में भी मूल्यांकन की मजबूत प्रक्रिया और योग्यता आधारित व्यवस्था अपनाने की बात कही गई थी।
💰 आरडीआई कोष की प्रमुख जानकारी
- कुल कोष: 1 लाख करोड़ रुपये
- मुख्य उद्देश्य: अनुसंधान, विकास और नवाचार को बढ़ावा देना
- फंड प्रबंधक: चुनी गई मध्यस्थ संस्थाएं
- चयन आधार: योग्यता और तय मानक
- निवेश का रूप: लंबे समय का कम ब्याज वाला कर्ज या हिस्सेदारी आधारित निवेश
- लाभार्थी: नई कंपनियां और शुरुआती चरण की तकनीकी कंपनियां
TBD और Bayrec ने जारी की बड़ी राशि
संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, 23 जुलाई तक टीडीबी ने 22 नई कंपनियों को 2,192 करोड़ रुपये की राशि जारी की थी। वहीं, बायरेक की ओर से आठ कंपनियों को 390.35 करोड़ रुपये दिए गए थे। आरडीआई सेल का कहना है कि योजना को लागू करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है और पहले चुने गए फंड प्रबंधकों ने नई कंपनियों के लिए आवेदन भी आमंत्रित किए हैं।
यह योजना जनवरी 2025 में घोषित की गई थी और 3 नवंबर को इसे औपचारिक रूप से लागू किया गया। शुरुआती चरण में अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़ी नई कंपनियों को काफी धन मिला था। हालांकि, आरडीआई सेल की प्रमुख ने स्पष्ट किया कि यह योजना किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। मजबूत परियोजना वाले किसी भी क्षेत्र की कंपनी को इस कोष से सहायता मिल सकती है।
नई कंपनियों के लिए तकनीकी तैयारी का स्तर तय
आरडीआई योजना के तहत पात्र नई कंपनियों के लिए तकनीकी तैयारी का न्यूनतम स्तर 4 रखा गया है। तकनीकी तैयारी का स्तर यह बताता है कि कोई कंपनी अपनी तकनीक या उत्पाद को विकसित करने की प्रक्रिया में कितनी आगे पहुंच चुकी है। इसका स्तर शून्य से शुरू होकर नौ तक जाता है, जहां नौ का मतलब पूरी तरह विकसित और तैयार उत्पाद से है।
उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि आरडीआई के फंड प्रबंधकों के पास लंबे समय के निवेश के साथ-साथ अलग-अलग तकनीकी क्षेत्रों की समझ भी होनी चाहिए। खासकर क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश के लिए तकनीक की गहरी जानकारी जरूरी मानी जाती है।
🚀 नई तकनीकी कंपनियों के लिए आरडीआई का महत्व
- तकनीकी क्षेत्र: योजना किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं
- न्यूनतम स्तर: तकनीकी तैयारी का स्तर 4
- संभावित क्षेत्र: क्वांटम कंप्यूटिंग सहित गहरी तकनीक
- निवेश की जरूरत: लंबे समय के निवेश और तकनीकी समझ
- संभावित बदलाव: शुरुआती स्तर की मजबूत कंपनियों को भी सहायता देने पर विचार
शुरुआती चरण की कंपनियों के लिए राहत की मांग
कुछ विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया है कि सरकार को तकनीकी तैयारी के स्तर 4 की अनिवार्यता पर दोबारा विचार करना चाहिए। गहरी तकनीक के क्षेत्र में उत्पाद तैयार होने में कई साल लग सकते हैं और शुरुआती चरण में पर्याप्त पूंजी मिलना मुश्किल होता है। ऐसे में मजबूत विचार रखने वाली लेकिन शुरुआती स्तर की कंपनियों को भी सरकारी सहायता का लाभ मिल सके, तो इससे नए तकनीकी कारोबारों को आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है।
Disclaimer: यह जानकारी समाचार उद्देश्य के लिए है और इसे निवेश या वित्तीय सलाह नहीं माना जाना चाहिए।
