REIT और InvIT में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए प्रस्तावित नए कर बदलाव से राहत मिल सकती है। Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 में REIT और InvIT से मिलने वाले लाभांश पर कर छूट का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव है। अगर यह बदलाव कानून बन जाता है तो संबंधित कंपनी ने पुरानी या नई कर व्यवस्था में से कोई भी विकल्प चुना हो, निवेशक को मिलने वाले लाभांश पर कर नहीं देना पड़ सकता है। हालांकि पूरी रकम कर मुक्त नहीं होगी और भुगतान के अलग-अलग हिस्सों पर अलग नियम लागू रहेंगे।
REIT और InvIT लाभांश पर कर छूट का प्रस्ताव
मौजूदा व्यवस्था में REIT और InvIT के लाभांश पर कर का नियम इस बात पर निर्भर करता है कि उसके पीछे मौजूद कंपनी ने कौन-सी कर व्यवस्था चुनी है। अगर कंपनी पुरानी व्यवस्था में कर देती है तो निवेशक को मिलने वाला लाभांश कर मुक्त रहता है। लेकिन अगर कंपनी नई रियायती कर व्यवस्था चुनती है तो लाभांश निवेशक की आय में जुड़ जाता है और उस पर उसकी कर श्रेणी के अनुसार कर लग सकता है।
प्रस्तावित बदलाव में इस शर्त को हटाने की बात कही गई है। इसका मतलब यह होगा कि कंपनी की कर व्यवस्था चाहे जो हो, निवेशक को मिलने वाला लाभांश कर मुक्त हो सकता है। इससे खासकर अधिक कर दर वाली श्रेणी में आने वाले निवेशकों को फायदा मिल सकता है। हालांकि अभी इसे लागू कानून नहीं माना जा सकता है और इसके लिए राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी है।
📈 निवेशकों को प्रस्तावित कर राहत
- REIT: लाभांश पर प्रस्तावित कर छूट
- InvIT: लाभांश पर प्रस्तावित कर छूट
- कर व्यवस्था: कंपनी की पुरानी या नई व्यवस्था का असर कम हो सकता है
- अधिक कर श्रेणी: निवेशकों को फायदा मिल सकता है
- स्थिति: राष्ट्रपति की मंजूरी अभी जरूरी है
कर विशेषज्ञों के अनुसार इस बदलाव से निवेशकों की कर के बाद मिलने वाली कमाई बेहतर हो सकती है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी निवेशक को नई कर व्यवस्था चुनने वाली कंपनी से REIT का 75,000 रुपये का लाभांश मिलता है और वह 30 प्रतिशत कर श्रेणी में आता है, तो मौजूदा नियम के तहत उसे करीब 23,400 रुपये कर देना पड़ सकता है। प्रस्तावित बदलाव लागू होने पर इस लाभांश पर कर देनदारी शून्य हो सकती है।
इस बदलाव का एक फायदा यह भी हो सकता है कि निवेशकों की कर देनदारी अधिक निश्चित हो जाएगी। अभी निवेशक के पास यह तय करने का अधिकार नहीं होता कि उसके निवेश के पीछे मौजूद कंपनी कौन-सी कर व्यवस्था चुने। कंपनी के इस फैसले का असर निवेशक के लाभांश पर लगने वाले कर पर पड़ सकता है। नई व्यवस्था में यह अंतर कम होने की उम्मीद है।
पूरी रकम नहीं होगी कर मुक्त
हालांकि निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि REIT और InvIT से मिलने वाली पूरी रकम कर मुक्त नहीं होगी। इनके भुगतान में लाभांश के अलावा ब्याज, किराये से होने वाली आय और पूंजी से जुड़े अन्य हिस्से शामिल हो सकते हैं। प्रस्तावित बदलाव के तहत केवल लाभांश वाले हिस्से को अतिरिक्त छूट मिल सकती है।
ब्याज से मिलने वाली रकम पर निवेशक की लागू कर दर के अनुसार कर देना जारी रहेगा। किराये से जुड़ी आय पर भी मौजूदा नियम लागू रहेंगे। इसी तरह REIT या InvIT की इकाइयां बेचकर होने वाले पूंजीगत लाभ पर भी कर व्यवस्था में कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं है।
💰 भुगतान के अलग-अलग हिस्सों पर अलग नियम
- लाभांश: प्रस्तावित अतिरिक्त छूट का लाभ मिल सकता है
- ब्याज: लागू कर दर के अनुसार कर जारी रहेगा
- किराये की आय: मौजूदा नियम लागू रहेंगे
- पूंजीगत लाभ: मौजूदा कर व्यवस्था में बदलाव प्रस्तावित नहीं
- कुल भुगतान: पूरी रकम को कर मुक्त नहीं माना जा सकता
इसे एक उदाहरण से समझें तो अगर किसी निवेशक को कुल 1 लाख रुपये का भुगतान मिलता है और इसमें 60,000 रुपये ब्याज तथा 40,000 रुपये लाभांश है, तो प्रस्तावित छूट केवल 40,000 रुपये वाले लाभांश हिस्से पर लागू होगी। 60,000 रुपये की ब्याज आय पर कर देना पड़ेगा। इसलिए निवेशकों को केवल कुल भुगतान देखकर अपनी वास्तविक कमाई का अनुमान नहीं लगाना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश करने से पहले पिछले दो-तीन वर्षों के भुगतान का विवरण देखना जरूरी है। निवेशकों को यह जांचना चाहिए कि उन्हें मिलने वाली कुल रकम में लाभांश, ब्याज और अन्य हिस्सों का कितना योगदान है। इससे कर कटने के बाद वास्तविक कमाई का बेहतर अंदाजा लगाया जा सकता है।
TDS का भी रखना होगा ध्यान
TDS का भी ध्यान रखना जरूरी है। निवासी निवेशकों के लिए ब्याज और लाभांश दोनों हिस्सों पर स्रोत पर कर कटौती हो सकती है। अगर भविष्य में लाभांश कर मुक्त हो जाता है, तब भी पहले से काटी गई राशि अपने आप खत्म नहीं होगी। निवेशक आयकर रिटर्न दाखिल करते समय इस रकम का कर क्रेडिट ले सकता है और जरूरत से ज्यादा कर कटने पर वापसी का दावा कर सकता है।
निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि प्रस्तावित लाभांश छूट का मतलब REIT या InvIT की इकाइयां बेचने पर होने वाले लाभ पर कर छूट नहीं है। पूंजीगत लाभ पर मौजूदा नियम लागू रहेंगे। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि जब तक विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक प्रस्तावित कर छूट को लागू लाभ न माना जाए।
अस्वीकरण: यह जानकारी उपलब्ध विवरण पर आधारित है और इसे व्यक्तिगत कर या निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए।
