भारतीय शेयर बाजार में रिटेल निवेशकों की भूमिका एक बार फिर चर्चा में है। जून तिमाही में छोटे निवेशकों ने बड़ी खरीदारी की, जबकि जुलाई में उन्होंने कुछ शेयरों में मुनाफावसूली शुरू कर दी। जानिए NSE के आंकड़ों, FPI और DII की खरीदारी से जुड़ी पूरी जानकारी।
भारतीय शेयर बाजार में रिटेल निवेशकों की भागीदारी जून तिमाही में एक बार फिर मजबूत देखने को मिली। लगातार दो तिमाहियों तक बिकवाली करने के बाद छोटे निवेशकों ने बाजार में जमकर खरीदारी की। हालांकि जुलाई में उन्होंने दोबारा कुछ शेयर बेचने शुरू कर दिए हैं।
रिटेल निवेशकों ने जून तिमाही में खरीदे ₹39,287 करोड़ के शेयर
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जून 2026 के बीच रिटेल निवेशकों ने शेयर बाजार में करीब ₹39,287 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की। यह दिसंबर 2024 तिमाही के बाद सबसे बड़ा निवेश है, जब रिटेल निवेशकों ने लगभग ₹42,746 करोड़ के शेयर खरीदे थे।
इससे पहले रिटेल निवेशकों ने जनवरी-मार्च तिमाही में करीब ₹3,843 करोड़ की बिकवाली की थी, जबकि अक्टूबर-दिसंबर 2025 तिमाही में उन्होंने लगभग ₹37,365 करोड़ बाजार से निकाले थे। जून तिमाही में उनकी वापसी ऐसे समय हुई जब विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण कई शेयर आकर्षक कीमतों पर उपलब्ध हो गए थे।
📈 रिटेल निवेशकों की बड़ी खरीदारी
- जून तिमाही खरीदारी: ₹39,287 करोड़
- सबसे बड़ी खरीदारी: दिसंबर 2024 के बाद
- जनवरी-मार्च 2026: ₹3,843 करोड़ की बिकवाली
- अक्टूबर-दिसंबर 2025: ₹37,365 करोड़ निकाले
- मुख्य फोकस: Mid-cap और Small-cap शेयर
Mid-cap और Small-cap शेयरों में बढ़ी दिलचस्पी
रिटेल निवेशकों की खरीदारी का फायदा खासतौर पर mid-cap और small-cap शेयरों को मिला। जून तिमाही में BSE SmallCap इंडेक्स में 8.3 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि BSE MidCap में 1.2 प्रतिशत की तेजी रही। इसके उलट बड़े शेयरों वाले BSE LargeCap और Nifty 50 में गिरावट देखने को मिली।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि रिटेल निवेशकों ने मुख्य रूप से उन शेयरों में निवेश किया जो पहले गिर चुके थे और जिनमें आगे बढ़ने की संभावना दिखाई दे रही थी। जून के अंत में बाजार में आई तेजी के बाद कई निवेशकों ने मुनाफा भी बुक किया।
जुलाई में रिटेल निवेशकों ने शुरू की मुनाफावसूली
हालांकि जुलाई में रिटेल निवेशकों का रुख थोड़ा बदल गया। 13 जुलाई तक उन्होंने करीब ₹2,532 करोड़ के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की। विशेषज्ञों के अनुसार यह घबराहट में की गई बिक्री नहीं बल्कि सावधानी और मुनाफा निकालने की रणनीति हो सकती है।
निवेश विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, महंगाई की चिंता, मानसून की स्थिति और बाजार में आने वाले कई IPO के कारण छोटे निवेशक अब ज्यादा सोच-समझकर निवेश कर रहे हैं।
🏦 FPI और DII की बाजार में भूमिका
- FPI खरीदारी: जुलाई में ₹15,793 करोड़
- जून तिमाही FPI बिकवाली: करीब ₹1.4 लाख करोड़
- DII खरीदारी: जून तिमाही में ₹2.20 लाख करोड़
- 2026 पहले छह महीने DII निवेश: ₹4.7 लाख करोड़
- बाजार समर्थन: घरेलू संस्थागत निवेशकों से मजबूती
विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में वापसी
वहीं दूसरी ओर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI ने जुलाई में भारतीय शेयरों में दोबारा खरीदारी शुरू की है। 14 जुलाई तक FPI ने करीब ₹15,793 करोड़ के शेयर खरीदे। इससे पहले जून तिमाही में विदेशी निवेशकों ने लगभग ₹1.4 लाख करोड़ की बिकवाली की थी।
विदेशी निवेशकों की वापसी के पीछे भारतीय शेयरों का आकर्षक मूल्यांकन, रुपये की स्थिरता और वैश्विक निवेश का भारत की ओर रुख करना प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। कुछ निवेशक दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों से पैसा निकालकर भारत में निवेश बढ़ा रहे हैं।
DII लगातार दे रहे हैं बाजार को मजबूती
घरेलू संस्थागत निवेशक यानी DII लगातार बाजार को मजबूती दे रहे हैं। जून तिमाही में DII ने करीब ₹2.20 लाख करोड़ के शेयर खरीदे। पिछले नौ तिमाहियों से DII लगातार भारतीय बाजार में शुद्ध खरीदार बने हुए हैं।
म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों और अन्य घरेलू निवेश संस्थानों से लगातार पैसा आने के कारण बाजार को मजबूत सहारा मिल रहा है। 2026 के पहले छह महीनों में DII ने करीब ₹4.7 लाख करोड़ का निवेश किया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले काफी अधिक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर रिटेल निवेशकों की बिकवाली केवल मुनाफा निकालने तक सीमित रहती है तो बाजार पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा। विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार में liquidity बनाए रखने में मदद कर सकती है। आने वाले समय में निवेशकों की नजर वैश्विक हालात, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के नतीजों पर रहेगी।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य सूचना के लिए है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।