अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में सोमवार को मजबूती देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव कम होने के संकेत मिलने के बाद Crude oil की कीमतों में गिरावट आई, जिससे रुपये को समर्थन मिला। शुरुआती कारोबार में रुपया 43 पैसे मजबूत होकर 96.14 रुपये प्रति डॉलर पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी दिन यह 96.57 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
रुपये में मजबूती के पीछे क्या कारण रहे
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेतों के बाद वैश्विक बाजार में सकारात्मक माहौल बना है। तेल की कीमतों में गिरावट और डॉलर में कमजोरी का फायदा भारतीय मुद्रा को मिला है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच हमले रोकने की खबर के बाद वैश्विक निवेशकों की चिंता कम हुई है। इसके कारण तेल की कीमतों में गिरावट आई और डॉलर पर दबाव बढ़ा। इस बदलाव का सीधा फायदा भारतीय मुद्रा को मिला।
वित्तीय सलाहकार कंपनी Finrex के अनुसार, आने वाले सत्र में भी रुपये के मजबूत रहने की संभावना है। कच्चे तेल की कीमतों में 5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के बाद निवेशकों ने पहले से बढ़े जोखिम प्रीमियम को कम किया है। इसके अलावा डॉलर इंडेक्स में भी नरमी देखी गई, जो रुपये के लिए सकारात्मक संकेत है।
रुपये की मजबूती की मुख्य वजह
- कारण: अमेरिका-ईरान तनाव में कमी
- तेल: Crude oil कीमतों में गिरावट
- रुपया: 43 पैसे मजबूत होकर 96.14 प्रति डॉलर
- डॉलर: Dollar Index में नरमी
- निवेशक: जोखिम कम होने से भरोसा बढ़ा
- बाजार: भारतीय मुद्रा को समर्थन मिला
निर्यातक और आयातकों की रणनीति
विशेषज्ञों का कहना है कि निर्यातक Dollar बेचने के लिए बेहतर स्तर का इंतजार कर सकते हैं, जबकि आयातक कम कीमतों का फायदा उठाकर भविष्य के भुगतान के लिए डॉलर खरीद सकते हैं। वहीं भारतीय रिजर्व बैंक कमजोर स्तरों पर रुपये को समर्थन देने के लिए कदम उठा सकता है।
Asia Market में भी सोमवार को अलग-अलग मुद्राओं में हलचल देखने को मिली। नौ प्रमुख एशियाई मुद्राओं में से छह ने डॉलर के मुकाबले मजबूती दर्ज की। थाई बहत सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली मुद्रा रही, जबकि फिलीपीनी पेसो और जापानी येन में भी बढ़त देखने को मिली।
दूसरी ओर, दक्षिण कोरियाई वॉन में सबसे ज्यादा कमजोरी दर्ज की गई। इंडोनेशियाई रुपिया में भी गिरावट रही, जबकि ताइवान डॉलर में मामूली बदलाव देखा गया।
मुद्रा बाजार पर असर डालने वाले कारक
- Crude oil: कीमतों में बदलाव रुपये को प्रभावित करता है
- अमेरिका: फेडरल रिजर्व की नीति अहम
- डॉलर: कमजोरी या मजबूती का असर
- वैश्विक तनाव: निवेशकों की रणनीति बदलता है
- RBI: रुपये को स्थिर रखने के लिए कदम
- बाजार: अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर नजर
आने वाले दिनों में रुपये की दिशा
Global बाजारों में डॉलर की कमजोरी का एक बड़ा कारण अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में अस्थायी रोक को माना जा रहा है। इससे तेल की कीमतों में गिरावट आई और निवेशकों का भरोसा कुछ हद तक वापस लौटा।
आने वाले दिनों में रुपये की दिशा crude oil की कीमतों, अमेरिका की मौद्रिक नीति और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। बाजार की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर बनी हुई है, जो मुद्रा बाजार को प्रभावित कर सकते हैं।
अस्वीकरण: यह जानकारी बाजार रिपोर्टों पर आधारित है। मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव कई वैश्विक और आर्थिक कारणों से प्रभावित हो सकता है।