भारतीय रुपये ने 28 जुलाई को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की। घरेलू मुद्रा शुरुआती कारोबार में 14 पैसे की बढ़त के साथ 95.75 रुपये प्रति Dollar पर पहुंच गई, जबकि इससे पहले यह 95.89 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुई थी।
रुपये में मजबूती के पीछे क्या कारण रहे
रुपये को मजबूत बनाने में हाल के दिनों में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हस्तक्षेप और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी का अहम योगदान रहा। International Market में तेल की कीमतों में गिरावट से भारत के आयात खर्च को राहत मिलने की उम्मीद है, जिसका असर रुपये पर भी देखने को मिला।
फिनरेक्स के अनुसार, रुपये की शुरुआत करीब 95.85 प्रति डॉलर के स्तर पर मजबूत रहने की संभावना थी। रिपोर्ट में बताया गया कि Brent Crude oil की कीमत पिछले सप्ताह के 100 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर से गिरकर करीब 87.10 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेतों से भी तेल बाजार को राहत मिली है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा स्तर पर आयात करने वाली कंपनियों के लिए डॉलर खरीदने का अच्छा मौका हो सकता है। कम तेल कीमतों और Reserve Bank of India की नीतियों से रुपये को सहारा मिल रहा है। वहीं निर्यातकों को सलाह दी गई है कि वे ऊंचे स्तर पर डॉलर की बिक्री जारी रखें।
रुपये की मजबूती की मुख्य वजह
- शुरुआती स्तर: 95.75 रुपये प्रति Dollar
- बढ़त: 14 पैसे की मजबूती
- RBI: केंद्रीय बैंक का हस्तक्षेप
- कच्चा तेल: कीमतों में गिरावट से राहत
- आयात: खर्च कम होने की उम्मीद
- बाजार: रुपये को मिला समर्थन
आयातकों और निर्यातकों के लिए सलाह
बाजार विशेषज्ञों ने आयातकों को सलाह दी है कि वे अगले एक महीने के लिए अपनी विदेशी मुद्रा जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए गिरावट के समय डॉलर खरीदारी कर सकते हैं। इससे मुद्रा में होने वाले उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम किया जा सकता है।
एशियाई बाजारों में अधिकतर मुद्राएं अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर रहीं। दक्षिण कोरियाई वॉन में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जबकि ताइवान डॉलर और इंडोनेशियाई रुपिया में भी कमजोरी देखने को मिली। दूसरी ओर, चीनी मुद्रा युआन और मलेशियाई रिंगिट ने डॉलर के मुकाबले हल्की बढ़त हासिल की।
डॉलर और रुपये पर नजर रखने वाले कारक
- कच्चा तेल: कीमतों की दिशा
- वैश्विक बाजार: अंतरराष्ट्रीय हालात
- RBI नीति: मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप
- अमेरिकी फेड: ब्याज दरों के फैसले
- निवेशक: डॉलर की मांग और रुझान
- भविष्य: रुपये की चाल पर असर
आगे रुपये की दिशा कैसी रह सकती है
इस बीच अमेरिकी डॉलर एक महीने के उच्च स्तर के आसपास बना हुआ है। निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठक में ब्याज दरों को लेकर संभावित फैसले पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि तेल की कीमतों में गिरावट ने महंगाई को लेकर चिंता कुछ कम की है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में रुपये की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बाजारों की स्थिति और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर निर्भर करेगी। फिलहाल market में डॉलर की मजबूती के बावजूद RBI के कदम और कम तेल कीमतें रुपये को समर्थन दे रहे हैं।
अस्वीकरण: यह जानकारी बाजार रिपोर्टों पर आधारित है। मुद्रा बाजार में बदलाव कई आर्थिक और वैश्विक कारणों से प्रभावित हो सकते हैं।