V2V Communication: 2028 से नए वाहनों में अनिवार्य हो सकती है तकनीक

केंद्र सरकार ने नए वाहनों में Vehicle-to-Vehicle (V2V) Communication System को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव रखा है। सड़क हादसों को कम करने और हाईवे पर सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने यह योजना तैयार की है। इसके तहत अक्टूबर 2027 से चरणबद्ध तरीके से इस तकनीक को लागू करने का प्रस्ताव है और अक्टूबर 2028 तक सभी नए वाहनों में इसे जरूरी किया जा सकता है।

नए वाहनों में V2V Communication System अनिवार्य करने की तैयारी

मंत्रालय ने इसके लिए सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 में बदलाव का मसौदा जारी किया है। सरकार ने इस प्रस्ताव पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से अगले 30 दिनों में सुझाव मांगे हैं। इसके बाद अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी।

प्रस्तावित नियमों के अनुसार, 1 अक्टूबर 2027 से बनने वाले दोपहिया, तिपहिया, यात्री वाहन और मालवाहक वाहनों में V2V तकनीक के लिए तय AIS-230 मानकों का पालन करना होगा। इसके एक साल बाद यानी 1 अक्टूबर 2028 से सभी नए वाहनों में V2V Communication System लगाना अनिवार्य हो सकता है।

V2V तकनीक कैसे करेगी सड़क सुरक्षा में मदद

इस व्यवस्था का उद्देश्य वाहनों को आपस में वास्तविक समय (real-time) में जानकारी साझा करने की सुविधा देना है। सामान्य सुरक्षा सिस्टम में वाहन के सेंसर और कैमरे काम करते हैं, लेकिन V2V तकनीक के जरिए वाहन अपनी स्थिति, गति, दिशा और ब्रेक लगाने जैसी जानकारी आसपास मौजूद अन्य वाहनों तक पहुंचा सकेंगे।

इस तकनीक की मदद से वाहन आगे अचानक ब्रेक लगाने, टक्कर की संभावना, गलत दिशा में चलने वाले वाहन और आपातकालीन वाहनों की जानकारी पहले ही दे सकेंगे। इससे ड्राइवर को समय रहते सतर्क किया जा सकेगा और दुर्घटना रोकने में मदद मिल सकती है।

🚗 V2V Communication System के मुख्य फायदे

  • सुरक्षा: सड़क हादसों को कम करने में मदद
  • जानकारी साझा करना: वाहन real-time में डेटा भेज सकेंगे
  • अलर्ट सिस्टम: टक्कर और इमरजेंसी की चेतावनी
  • हाईवे सुरक्षा: ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर होगी
  • स्मार्ट परिवहन: Intelligent Transport System को मजबूती मिलेगी

कनेक्टेड वाहन तकनीक से बदलेगी ड्राइविंग व्यवस्था

सरकार का मानना है कि कनेक्टेड वाहन तकनीक से हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होगी और ड्राइवरों को आसपास के ट्रैफिक की ज्यादा जानकारी मिल पाएगी। यह तकनीक भविष्य में Intelligent Transport System को मजबूत करने में भी मदद करेगी।

मंत्रालय के अनुसार, यह सिस्टम Cellular Vehicle-to-Everything (C-V2X) तकनीक पर आधारित होगा, जो 5.875-5.925 GHz फ्रीक्वेंसी बैंड पर काम करेगा। दूरसंचार विभाग ने जून 2026 में इस स्पेक्ट्रम को लाइसेंस से छूट दी थी, जिससे इस तकनीक को लागू करने का रास्ता आसान हुआ है।

AIS-230 मानकों में तय किए गए नियम

AIS-230 मानक में V2V सिस्टम के लिए तकनीकी क्षमता, सुरक्षा, पर्यावरण संबंधी जरूरतों और साइबर सुरक्षा से जुड़े नियम तय किए गए हैं। इसमें वाहन की लोकेशन के लिए GNSS सिस्टम, संचार सुरक्षा और अन्य तकनीकी आवश्यकताओं को भी शामिल किया गया है।

🛣️ V2V सिस्टम में मिलने वाले प्रमुख अलर्ट

  • Emergency Brake Alert: अचानक ब्रेक लगाने की जानकारी
  • Collision Warning: टक्कर की संभावना का अलर्ट
  • Wrong Direction Alert: गलत दिशा में चलने वाले वाहन की सूचना
  • Emergency Vehicle Alert: आपातकालीन वाहनों की जानकारी
  • Cyber Security: सुरक्षित संचार व्यवस्था

भारत में सुरक्षित और स्मार्ट परिवहन की दिशा में कदम

सरकार की योजना के अनुसार, शुरुआत में आपातकालीन ब्रेक अलर्ट, आगे की टक्कर की चेतावनी, गलत दिशा में वाहन चलने की सूचना और इमरजेंसी वाहन अलर्ट जैसी सुविधाओं को शामिल किया जाएगा।

भारत में हर साल बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। ऐसे में सरकार अब बेहतर सड़क निर्माण और सख्त नियमों के साथ-साथ तकनीक आधारित समाधानों पर भी जोर दे रही है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो V2V Communication देश में सुरक्षित और स्मार्ट परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

Disclaimer: यह जानकारी सरकारी प्रस्ताव और उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है। अंतिम नियम अधिसूचना के बाद लागू होंगे।

Gourav Kumar Singh

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